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पहल:घरों के बाहर मोहल्ले में लग रहा स्कूल, ऑनलाइन क्लास की दिक्कतों को दूर करने बलोद और बेमेतरा में प्रयोग शुरू

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तस्वीर बालोद की है। किसी ने नहीं सोचा था कि कभी इस तरह से भी स्कूल लगेंगे। मगर बच्चों को पढ़ाने और इनके पढ़ने के जज्बे से यहा काम जारी है।

  • शिक्षक लाउडस्पीकर में कराते हैं पढ़ाई, अब गांव के पाटे और चौराहे बने स्कूल
  • स्मार्ट फोन और इंटरनेट की कनेक्टिविटी की परेशानी को देख निकाला हल

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देश के साथ प्रदेश में स्कूल की पढ़ाई अब ऑनलाइन हो रही है। शहरी संपन्न परिवारों में इसे लेकर कोई परेशानी नहीं। मगर गांव के गरीब किसान और मजदूरों के घर में इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्टफोन की किल्लत अब भी है। ऐसे में शिक्षकों ने मोहल्ला स्कूल की शुरूआत की है। इस कॉन्सेप्ट में पूरा मोहल्ला ही क्लास रूम बन रहा है। घरों के बाहर या किसी चौराहे पर स्कूली बच्चे दूरी बनाकर बैठते हैं। लाउडस्पीकर पर शिक्षक उन्हें पढ़ाते हैं। बालोद और बेमेतरा जिले में इसी तरह के स्कूल संचालित हैं।

राज्य गीत के साथ शुरु होती है क्लास 
बालोद जिले से करीब 28 किलोमीटर कापसी गांव की प्राथमिक शाला इस कोरोना के संकटकाल में बंद है। मगर स्कूल की पढ़ाई मोहल्ला स्कूल के जरिए जारी है। बच्चों को उनके घरों के सामने बने चबूतरों पर पढ़ाया जा रहा है। सभी बच्चे क्लास शुरू होने से पहले राज्य गीत अरपा पैरी के धार… गाते हैं। ग्राम पंचायत ने लाउड स्पीकर का इंतेजाम किया है। शिक्षक अमित कुमार सिन्हा इसी से बच्चों को पाठ पढ़ा रहे हैं। शांता राम अटल, नील कमल ठाकुर नाम के शिक्षक भी ऐसे ही बच्चों को काबिल बनाने में जुटे हैं।

बेमेतरा जिले में भी मोहल्ला स्कूल के कॉन्सेप्ट पर काम किया जा रहा है। यहां विकास खण्ड नवागढ़ के ग्राम बेंवरा में प्राथमिक शाला व पूर्व माध्यमिक शाला के बच्चों के लिए मोहल्ला स्कूल शुरू किया गया है। राजीव गांधी शिक्षा मिशन के समन्वयक कमोद ठाकुर ने बताया कि मोहल्ला स्कूल के तहत यहां 15 केंद्र बनाए गए हैं। इनमें शिक्षकों के अलावा गांव के ही पढ़े लिखे युवक व युवतियां अपने आसपास के कक्षा पहली से कक्षा 8वीं तक के बच्चों को एक घंटे की निशुल्क क्लास दे रहे हैं। ताकि किसी भी बाधा की वजह से बच्चों की पढ़ाई ना रुके।