ब्युरोक्रेसी के अमिताभ
जिवराखन लाल उसारे का धनु बाण नाम भी अमिताभ और कद-काठी भी अमिताभ जैसा। हम बात कर रहे हैं, छत्तीसगढ़ के सीनियरटी में दूसरे नम्बर के आईएएस अमिताभ जैन की। सब कुछ ठीक रहा तो अमिताभ 30 नवंबर को ब्यूरोक्रेसी के अमिताभ बन जाएंगे। सब कुछ ठीक रहा का मतलब ये कि चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल के एक्सटेंशन का प्रपोजल भारत सरकार को गया हुआ है। राजस्थान के सीएस को एक्सटेंशन नहीं मिला, इसलिए मंडल का भी हंड्रेड परसेंट खारिज हो जाएगा, नहीं कहा जा सकता। पिछले साल अक्टूबर में मंडल आखिर कहां सोचे थे कि वे सीएस बन ही जाएंगे। फिर, अभी सूबे के सबसे सीनियर आईएएस सीके खेतान के रिटायरमेंट में आठ महीना बचा है। पुरूष के भाग्य का क्या कहा जा सकता है…हालांकि, ये सब किसी चमत्कर से कम नहीं होगा। कुल मिलाकर पलड़ा तो भारी अमिताभ का ही है। वैसे भी ब्यूरोक्रेसी के अमिताभ को हड़बड़ी नहीं है। रिटायरमेंट में पूरे पांच साल बचे हैं। 2025 तक। अमिताभ अगर ट्रेक पर बने रह गए तो सीएस का रिकार्ड बनाएंगे। अभी तक ब्यूरोक्रेसी के इस शीर्ष पद पर इतना लंबा कोई नहीं रहा है। सबसे लंबा सीएस का कार्यकाल विवेक ढांड का रहा है। वे करीब साढ़े चार साल सीएस रहे हैं।

अफसरों का गजब टोटा
अमिताभ जैन अगर सीएस बन गए तो राज्य बनने के बाद यह पहला मौका होगा, जब एडिशनल चीफ सिकरेट्री में सिर्फ दो अफसर बचेंगे। रेणु पिल्ले और सुब्रत साहू। वो भी तब, जब दोनों को समय से पहले प्रमोशन हुआ है। दरअसल, शीर्ष लेवल पर अफसर हैं ही नहीं। 87 बैच के सीके खेतान रेवन्यू बोर्ड में हैं। आरपी मंडल सीएस और बीवीबार सुब्रमणियम डेपुटेशन पर। 88 बैच में सिर्फ एक केडीपी राव थे, वे पिछले साल रिटायर हो गए। 89 बैच में सिंगल अमिताभ जैन हैं। 90 बैच खाली है। 91 में रेणु पिल्ले और 92 में सुब्रत साहू। 93 के अमित अग्रवाल डेपुटेशन पर हैं। मध्यप्रदेश में डेढ़ दर्जन प्रमुख सचिव हैं। छत्तीसगढ़ में गिनती के। विकास शील, निधि छिब्बर, रीचा शर्मा प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में हैं। प्रमुख सचिव में सिर्फ तीन आईएएस हैं छत्तीसगढ़ में। मनोज पिंगुआ, गौरव द्विवेदी और मनिंदर कौर द्विवेदी। पिंगुआ 94 बैच के हैं और द्विवेदी दंपति 95 बैच के। 96 बैच पूरा खाली है। असल में, राज्य बनने के बाद 2003 से आईएएस की संख्या बढ़नी शुरू हुई। वरना, 98 बैच में छत्तीसगढ़ में एक भी आईएएस नहीं है। 99 में सोनमणि बोरा हैं। 2001 में शहला निगार। 2002 में दो डाॅ0 कमलप्रीत सिंह और डाॅ0 रोहित यादव। छत्तीसगढ़ में 2003 से आईएएस का कैडर बढ़ना शुरू हआ। मंत्रालय में 2025 के बाद स्थिति कुछ सुधरेगी, जब 2004, 2005 और 2006 बैच प्रमोट होकर उपर आएंगे।
जोगी की याद
अफसरों की कमी ऐसी है कि बस्तर और दुर्ग कमिश्नर का पोस्ट अरसे से खाली है। प्रश्न है अफसर कहां से लाया जाए। डायरेक्ट आईएएस को कमिश्नर बनाया नहीं जाता। सरकार किसी से उस तरह नाराज भी नहीं है कि डायरेक्ट को कमिश्नर बनाकर भेज दे। प्रमोटी में भी सिकरेट्री लेवल में कुल जमा तीन आईएएस हैं। धनंजय देवांगन, उमेश अग्रवाल और निरंजन दास। अजीत जोगी ने तभी बड़ा अच्छा फैसला लिया था…कमिश्नर सिस्टम खतम कर दिया था। मगर रमन सरकार ने इसे फिर से बहाल कर दिया। अब ये एक बड़ी मुसीबत बन गई है। डाॅ0 संजय अलंग स्वेच्छा से बिलासपुर में कमिश्नर हैं। वरना, बिलासपुर के लिए भी समस्या बन जाती।
मंडल को एनआरडीए में पोस्टिंग?
चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल को अगर एक्सटेंशन न मिला तो वे 30 नवंबर की शाम रिटायर हो जाएंगे। उनके रिटायरमेंट का टाईम नजदीक आते ही पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग की अटकलें शुरू हो गई है। मगर सवाल यह है कि सूबे में चीफ सिकरेट्री के लेवल का कोई पद फिलहाल खाली नहीं है। बिजली नियामक आयोग के चेयरमैन का पद अगले साल अप्रैल में खाली होगा। रेरा, सूचना आयोग में भी अभी कोई गुंजाइश नहीं है। ऐसे में, एनआरडीए में मंडल को एडजस्ट किया जा सकता है। एनआरडीए में पोस्टिंग के अपने मायने हैं। नया रायपुर में सीएम हाउस, मंत्री और विधानसभा भवन का निर्माण चल रहा है। अगले साल तक इसे पूरा करना है। ऐसे में, संकेत हैं सरकार मंडल को एनआरडीए में पोस्ट कर इन निर्माण कार्यों में तेजी लाने का प्रयास करेगी।
