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ब्युरोक्रेसी में कोरोना

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धनु बाण जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज कोरोना पीड़ितों की संख्या भले ही इस समय पहले की तुलना में कम हुई हो लेकिन, अब ब्यूरोक्रेसी के लोग ज्यादा शिकार होने लगे हैं। चीफ सिकरेट्री अमिताभ जैन समेत मंत्रालय के आधा दर्जन से अधिक आईएएस इस समय कोरोना से पीड़ित हैं। समझा जाता है, विधानसभा के शीतकालीन सत्र दौरान अधिकारी इंफेक्टेड हुए होंगे। सत्र के दौरान मंत्रियों के यहां लगातार ब्रीफिंग हुई। अधिकांश मंत्रियों के बंगले में कोरोना के प्रोटोकाॅल का कोई पालन होता नहीं। जाहिर है, विधायकों में भी एक तिहाई से अधिक कोरोना से संक्रमित हैं। ये वे विधायक हैं, जिन्होंने टेस्ट कराया है। बाकी विधायकों ने मानसून सत्र में ही टेस्ट कराने से दो टूक इंकार कर दिया था। अगर सभी का टेस्ट हो तो विधायकों की संख्या काफी ज्यादा हो सकती है। बहरहाल, अभी तो आईएएस मुश्किल में हैं।

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25 करोड़ का क्लब

नया रायपुर की रंगत बढ़ाने एनआरडीए अब कई स्तर पर काम शुरू कर दिया है। मंत्रियों, नौकरशाहों के बंगले का काम अब अंतिम चरण में है….इसके साथ शाही सुख-सुविधाओं वाला एक भव्य क्लब बनाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। 25 करोड़ में बनने वाले इस क्लब का डिजाइन तैयार करने एनआरडीए आजकल में टेंडर जारी करने वाला है। अफसरों का दावा है, ऐसा क्लब मेट्रो सिटी में भी नहीं होगा। इसमें दिन भर इंगेज करने वाली सुविधाएं होंगी। इंटरनेशनल लेवल की लायब्रेरी, जीम, योगा सेंटर, स्वीमिंग पुल, सैलून, मसाज, थियेटर, बीयर-बार, रेस्टोरेंट, कांफ्रेंस हाॅल के साथ टहलने के लिए बड़ा सा रोज गार्डन। ठीक भी है। इस तरह का क्लब बन जाने के बाद सरकारी अमला और उनके घर वाले नया रायपुर जाने में आगे-पीछे नहीं होंगे। नया रायपुर में रहने का क्रेज बढ़ेगा, सो अलग।

होटल पर मेहरबानी

एनआरडीए के पास एक तरफ कर्मचारियों को वेतन बांटने के लिए पैसे नहीं हैं। उधर, फोर स्टार होटल परिसर के झील और सड़क के सौंदर्यीकरण के लिए एनआरडीए ने 29 करोड़ रुपए का टेंडर जारी कर दिया है। जबकि, होटल को इसी शर्त पर रियायती दर से लैंड दिया गया था कि वो झील को भी डेवलप करेगा। तो फिर बड़े लोगों के होटल पर एनआरडीए की इतनी मेहरबानी क्यों? ये सवाल तो उठते ही हैं।

बिहार पीछे क्यों?

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जिलों के दौरे में लोगों से मेल-मुलाकात के साथ ही वहां के अधिकारियों से आत्मीय चर्चा कर रहे हैं। इसमें उनके गांव, घर-परिवार, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई जैसी तमाम बातें होती हैं। मुख्यमंत्री इस समय हलके मूड में होते हैं। इसी हफ्ते की बात है….मुख्यमंत्री जांजगीर में थे। उनका संवाद शुरू हुआ तो कुछ प्रशासनिक अफसर अटेंशन में डायरी खोलकर जेब से पेन निकाल लिए। इस पर सीएम मुस्कुराते हुए बोले…डायरी, पेन को अलग रख तन और को हल्का कर लो। संवाद के दौरान मुख्यमंत्री अधिकारियों से कई मामलों में उनकी राय भी पूछते हैं। जैसे रायगढ़ में प्रोबेशनर आईपीएस पुष्कर शर्मा से उन्होंने पूछा, ये बताओ बिहार देश को इतनी बड़ी संख्या में हर साल आईएएस, आईपीएस देता है, फिर विकास के मामले में वो इतना कैसे पिछड़ गया। पुष्कर बिहार से आते हैं।

विश्वस्त आईपीएस

वैसे तो सरकार अपने भरोसेमंद आईपीएस को ही खुफिया चीफ बनाती है। मगर डाॅ0 आनंद छाबड़ा की बात कुछ और है। वे छत्तीसगढ़ के पहले खुफिया चीफ होंगे, जो मुख्यमंत्री के साथ हेलिकाप्टर में जिलों के दौरे में जा रहे हैं। और, पूरे समय उनके साथ होते हैं। चतुर अधिकारी की तरह वे फोटो फ्रेम से दूर रहते हैं, लेकिन पूरी चीजें उनकी निगरानी में होती हैं। इससे पहिले छत्तीसगढ़ में बड़े-बड़े कद्दावर खुफिया चीफ हुए लेकिन, सीएम के साथ हेलिकाप्टर में जाने का मौका किसी को नहीं मिला। पहले सीएम के सिर्फ बस्तर विजिट में खुफिया चीफ जाते थे, वो भी सीएम के साथ नहीं। सरकार से जुड़़े लोग भी मान रहे कि मुख्यमंत्री आनंद पर काफी भरोसा करते हैं। बता दें, हिमांशु गुप्ता के बाद आनंद को जब खुफिया की कमान सौंपी गई थी तो लोग यह मानकर चल रहे थे कि ये टेंटेटिव व्यवस्था है। कुछ दिन बाद खुफिया चीफ बदल जाएंगे। क्योंकि, उनसे कई सीनियर रेंज में आईजी हैं। लेकिन, आज की तारीख में आनंद सरकार के विश्वस्त अफसर बन गए हैं।

विवेकानंद का विकल्प

96 बैच के आईपीएस विवेकानंद सिनहा एडीजी के पद प्रमोशन के पात्र हो गए हैं। वीवीआईपी रेंज के आईजी हैं, इसलिए हो सकता है जल्द ही उनका प्रमोशन हो भी जाए। लेकिन, उनके बाद दुर्ग रेंज का आईजी कौन होगा, ये बड़ा सवाल है। दुर्ग से सीएम सहित पांच-पांच मंत्री हैं। राजनांदगांव जैसा संवेदनशील जिला भी इसी में आता है। सरकार के पास आईजी दूसरा कोई है नहीं। पुलिस मुख्यालय में एक आईजी हैं केसी पैकरा। दूसरे, दिपांशु काबरा को सरकार ने एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बनाया है। इनके अलावे पांच रेंज और पांच ही आईजी हैं। अशोक जुनेजा की जगह पर सरकार विवेकानंद को एडीजी नक्सल बना सकती है। ऐसे में, फिर किसी डीआईजी को सरकार दुर्ग का प्रभारी आईजी बनाएगी। क्योंकि, इसके अलावा सरकार के पास और कोई विकल्प नहीं है।