छग स्टेट पावर कंपनी द्वारा बनाए गए नियम विरुद्ध पदोन्नति प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोकी जाय-आर एन ध्रुव
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
छ.ग.उच्च न्यायालय द्वारा प्रकरण क्रमांक WP(S)No. 9778/2019 विष्नुप्रसन्न तिवारी विरूद्ध छ0ग0राज्य, WP.PIL/91/2019 में पदोन्नति में आरक्षण नियम 2003 को निरस्त कर 2 माह में माननीय सुप्रीम कोर्ट एम. नागराज केस एवं जर्नेल केस में पारित आदेश के शर्तों का पालन करते हुये नये पदोन्नति नियम 02 माह में बना लेने की छूट दी गई थी पर उक्त शर्तों का पालन किये बिना सामान्य प्रशासन विभाग व्दारा दिनांक 30 अक्टुबर 2019 को नये नियम तैयार कर लागू किया गया जिसे चुनोैती देने के कारण 100 बिंदु के रोस्टर नियम पर दिनांक 09.12.2019 को इसे सर्वोच्च न्यायालय के न्याय दृष्टांत के विपरीत होना बताकर पी-5 पदोन्नति के लिये 100 बिंदु के रोस्टर पर रोक स्थगन का आदेश देते हुये आरक्षण के बिना सरकार वरिष्ठता के आधार पर नियम कानून का पालन करते हुये नियमित पदोन्नति दे सकती है, कहा गया है। परन्तु नियम एवं कानून का पालन किये बिना मात्र वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दी जा रही है जबकि आरक्षण अधिनियम-1994 एवं नियम-1998 तथा पदोन्नति नियम-2003 एवं समय समय पर हुए संशोधन प्रभावी है। मात्र रोस्टर नियम-5 जिसके अनुसार 100 बिंदु का रोस्टर तैयार किया गया है, को स्थगित किया गया, समाप्त नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में प्रदेश में लागू पदोन्नति नियम-2003 समय-समय पर शासन द्वारा जारी निर्देश/आदेश के अनुसार आरक्षित पदों को किसी भी तरीके से अनारक्षित वर्गों से नहीं भरा जावेगा। इस महत्वपूर्ण प्रावधान का उल्लंघन करते हुए न्यायालय के आदेश का गलत व्याख्या करते हुए आरक्षित अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के रिक्त पदों को अनारक्षित वर्ग सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकारी/ कर्मचारीयों से पदोन्नति द्वारा भरा जा रहा है, जबकि होना यह चाहिए कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित रिक्त पदों को न्यायालय के अंतिम आदेश तक सुरक्षित रखा जाकर शेष बचे पदों को वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति द्वारा भरा जा सकता है, परन्तु सामान्य प्रशासन विभाग/विधि विभाग/महाधिवक्ता से कोई दिशा-निर्देश या अभिमत जारी किए बिना सभी विभागों द्वारा नियम विरूद्व आरक्षित रिक्त पदों को एवं बैकलाग रिक्त पदो को सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकारी/कर्मचारी से भरा जा रहा है, जिससे आरक्षित अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारी/कर्मचारी के पदोन्नति पर आरक्षण संबंधी भारतीय संविधान अनुच्छेद-16(4)(क), 85 वाॅं संविधान संशोधन, 2001 पदोन्नति में परिणामिक वरिष्ठता,16(4)(ख) संविधान संशोधन 2000 बैकलाग रिक्ति को 50 प्रतिशत कोटा से अतिरिक्त होना बताया गया है, एवं अनुच्छेद-335 का 82 वाॅं संविधान संशोधन 2000 का स्पष्ट उल्लंघन किया जा रहा है और ऐसा कर आरक्षण अधिनियम/नियम का उल्लंघन किया जा रहा है, जिस पर तत्काल रोक लगाया जाकर आरक्षित पदों पर पदोन्नत सामान्य/अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकारी/कर्मचारी की पदोन्नति तत्काल निरस्त किया जावे और विधि विभाग/सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देश नियम के बिना हो रहे पदोन्नति की कार्यवाही पर रोक लगाई जावे। वर्तमान पदोन्नति व्यवस्था से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारी/कर्मचारियों को अपूरणीय क्षति होगी, जिसे पूरा कर पाना संभव नहीं होेगा, क्योंकि जो अनारक्षित वर्ग के सामान्य/अन्य पिछड़े वर्ग के अधिकारी/कर्मचारी आरक्षित पदो के विरूद्व पदोन्नत हो गए है, उन्हें हटाये जाने पर न्यायालय का शरण लेंगे और स्थगन प्राप्त कर लेंगे। जैसा कि फर्जी जाति के मामलों पर जो स्थगन लिए है उसे आज तक स्थगन नहीं हटाया जा सका है।
सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक एफ 4-2/2001/2/2 दिनांक 08 मार्च 2006 में स्पष्ट किया गया है कि रोस्टर में आरक्षित वर्ग का बिंदु सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित नहीं है वरन अनारक्षित है अर्थात अनारक्षित बिंदु पर यदि वरिष्ठता के आधार पर आरक्षित श्रेणी के व्यक्ति का नंबर वरिष्ठता एवं योग्यता के आधार पर आता है तो उसे अनारक्षित बिंदु के विरुद्ध विचार किया जाएगा जो बाद में उसी वर्ग के आरक्षित बिंदु से समायोजित नहीं होगा। उक्त परिपत्र का परिपालन भी पावर कंपनी द्वारा नहीं किया गया एवं गलत व्याख्या करके सामान्य वर्ग के कार्मिकों को पदोन्नति प्रदान की गई एवं कई बार इस संबंध में संगठन को कोर्ट में जाने की सलाह दी गई एवं अनुसूचित वर्ग के कार्मिकों को पदोन्नति से वंचित किया गया। वर्तमान में अनुसूचित जाति ,अनुसूचित जनजाति वर्ग के कार्मिकों के लिए पावर कंपनी प्रबंधन द्वारा नई पदोन्नति नियम 50-50 प्रतिशत बनाया गया है वह नीति विरुद्ध है ।जिससे पावर कंपनी के कार्मिकों में आक्रोश की भावना व्याप्त हो गई है ।
छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ के प्रांताध्यक्ष आरएन ध्रुव द्वारा छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी द्वारा बनाए गए नियम विरुद्ध पदोन्नति प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोक लगाकर वर्षों से पीड़ित, शोषित अनुसूचित जाति ,जनजाति वर्ग को न्याय दिलाए जाने की मांग सुश्री अनुसुइया उइके जी महामहिम राज्यपाल छत्तीसगढ़, माननीय श्री भूपेश बघेल जी मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़, माननीय श्री डॉक्टर प्रेमसाय सिंह टेकाम जी आदिम जाति कल्याण मंत्री छत्तीसगढ़, मुख्य सचिव छत्तीसगढ़, अध्यक्ष/ सचिव अनुसूचित जनजाति आयोग छत्तीसगढ़, श्री अंकित आनंद चेयरमैन एवं स्पेशल सिक्योरिटी एनर्जी विभाग छत्तीसगढ़, श्रीमती उज्जवला बघेल मैनेजिंग डायरेक्टर विद्युत मंडल रायपुर, श्री निर्मल कुमार बिजोरा मैनेजिंग डायरेक्टर विद्युत विभाग रायपुर, श्री हर्ष गौतम मैनेजिंग डायरेक्टर रायपुर से किए हैं।

