पूर्ण ईसर गवरा महोत्सव -सांस्कृतिक महापर्व पर गुड़ियनजन अपने संस्कृति पर थिरके
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज दिनांक16.11.2021 को गोंडवाना चौक पांडादाह जिला राजनांदगांव में गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति एव छत्तीसगढ़गोंडवाना संघ के संयुक्त तत्वावधान में परम पूज्य गोंडवाना गुरुदेव गुरुमाता जी के सानिध्य में गोंडी रीति नीति परंपरा के तहत पूर्णईसर गवरा महोत्सव बड़े ही धूमधाम व हर्षोलास के साथ मनाया गया.कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गुरुमाता तिरुमाय दुलेश्वरी सिदार जी (जनपद पंचायत अध्यक्ष पाली जिला कोरबा).
विशिष्ठ अतिथि – तिरु. सिया मंडावी जी (संयोजक गोंडी ध. संस्कृति संरक्षण समिति ), तिरु. लच्छन मरकाम जी, तिरु, सोनऊ झव जी (प्रदेशाध्यक्ष छ.ग. गोंडवाना संघ ), तिरु, चंद्रभान नेताम जी ( प्रांताध्यक्ष गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति), तिरु, अनूपमरकाम जी, युवा प्रकोष्ठ- चंन्द्रैश छेदैहा. देवरचा महेन्द्र मरकाम, तेंदूभाठा मानसिंह, भुजारी तुकेश छेदैहा, भुजारी कमलेश छेदैहा,
डूमरडीह सुनील सेवता, भंडारपुरी (करेला) विनोद नेताम सांकरी, रितेश छेदैहा ईटार वहीं युवती शक्ति-त्रिवेणी छेदैहा, भुजारी रत्ना
छेदै हा, देवरच्चा रानी मंडावी, करवाही मनीषा छेदैहा. सांकरी ऐश्वर्या मंडावी, नवागांव कोयरा कुंजाम, बैहाटोला प्रियंका मंडावी,
भंडारपुर (करेला) सहित अन्य पदाधिकारीगण व सामाजिकजनों की उपस्थिति रही.श्रद्धेय गुरु दर्शन अनुसार तिरु. गजानंद नुरूटी (प्रांतासचिव गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति) ने बताया कि ईसर गवरा
जागरण (विवाह) का यह पर्व कार्तिक मास अमावस्या से 07 दिन पूर्व व समयानुसार फूल कुचरना से प्रारंभ होकर अमावस्या को
विवाह संपन्न होता है तथा राज गवरा का विवाह कार्यक्रम कार्तिक पूर्णिमा को संपन्न होता है, जिसे गोंडियनजन पूर्ण ईसर गवरा के रूप में सेवा जोहार (गोंगो) करते हैं, वहीं पूस माह में ठड़ गवरा पर्व को बड़े ही घूमधाम के साथ मनाया जाता है,इसी प्रकार गवरा कलश पर्व निरंतर चलने वाला पर्व है, जिसके माध्यम से एक मुठी चावल गवरा कलश में बचाकर आर्थिक समृद्धि, मातृशक्ति सशक्तिकरण व सामाजिक विकास को गति प्रदान की जाती है।
ईसर गवरा मडमिंग महोत्सव गोंडी धर्म संस्कृति का महाप्राण, सांस्कृतिक आस्था विश्वास का प्रतीक है, जिसमें प्रकृतिस्वरूप ईसर गवरा माता को प्रकृति का प्रतिनिधि व सांस्कृतिक जग लिए गोंगों, सेवा जोहार ( पूजा अर्चना)
की जाती है। यह पर्व पूर्णरूपेण जैसे आदिवासी गोंड समज विवाह होता है, ठीक उसी प्रक्रिया हर नेग जोग मातृशक्तियों पितृशक्ति
द्वारा किया जाता है। जिसमें पारंपरिक वाद्ययंत्र गुदूम बाजा, अखान आदि के माध्यम से सम्पन्न किया जाता है।यह पर्व प्रदेश के विभिन्न जिले – 18 नव.को गरियाबंद, 20 नव. को भाटापारा तथा आगामी दिनों में कांकेर, बालोद,
मुंगेली,रायगढ़, कोरबा, जांजगीर, बिलासपुर व महासमुंद इत्यादि जिलों में भी आयोजित की जायेगी, जहां कोरोना गाईड लाईन का
पालन करते हुए हजारो-हजारों की संख्या में गोडी धर्म के अनुयायीगण सिरकत करेंगे।इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज को संगठित करने, अपने धर्म संस्कृति पर आस्था विश्वास रखने, अपने रीति नीति रूढ़ीजन्य परंपरा संस्कृति कायम रखने, समाज को व्यवस्थित करने तथा सामाजिक विकास में सतत सहयोगी बनने की अपेक्षा की जाती है।कार्यक्रम में सभी गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति एवं छत्तीसगढ़ गोंडवाना के संयुक्त तत्वावधान में युवा प्रभाग तथा
गवरा दाई महिला सेवा समितियो के माध्यम से परमश्रद्धय गुरूदेव गुरूमाता, ईसर गवरा दाई के आशीर्वाद और सानिध्य में सम्पन्न कराया जाता है।
जय सेवा, जय ईसर देव गवरा दाई

