सभी दल मिलकर एकमत से राष्ट्रपति पद पर देश के मूल गोंड जनजाति वर्ग से ही चुनें–आरएन ध्रुव
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
भारत देश के राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद जी का कार्यकाल जुलाई 2022 में पूर्ण होने जा रहा है। आजादी के बाद देश में विभिन्न वर्गों को राष्ट्रपति पद में आसीन होने का अवसर प्रदान किया गया। लेकिन देश के सबसे बड़ी जाति समुदाय यहां के मूल निवासी गोंड समाज को कभी भी देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति के पद पर प्रतिनिधित्व का अवसर नहीं मिला है।देश के इतिहास में गोंडवाना के शासकों ने हूण, मंगोल , मुगलों से लगातार वीरता पूर्वक मुकाबला कर देश की जनता, जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा किए है।देश की आजादी में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में गोंड समाज का अहम भूमिका रहा है। आजादी के बाद अखंड भारत के निर्माण में गोंडवाना के सबसे अधिक 258 रियासतों को सम्मिलित किया गया है। इस तरह आजादी के बाद देश की अखंडता कायम रखने हेतु सबसे ज्यादा त्याग गोंड समाज ने ही किया है। देश में राज्य निर्माण के समय कन्नड बोलने वालों को कर्नाटक, गुजराती बोलने वालों को गुजरात, बंगाली बोलने वालों को बंगाल, उड़िया बोलने वालों को उड़ीसा ऐसे ही विभिन्न राज्यों का निर्माण भाषा, संस्कृति एवं भौगोलिक आधार पर हुआ है। लेकिन गोंडवाना गोंड महासभा के मांगों को नजरअंदाज करते हुए गोंडवाना का वैभवशाली इतिहास, भाषा, संस्कृति, रिती–रिवाज और अलग से भौगोलिक पृष्ठभूमि होते हुए भी गोंडवाना राज्य नहीं बनाया गया। जिसके कारण आज भी समाज में निराशा का भाव है।
अखिल भारतीय गोंडवाना गोंड महासभा के राष्ट्रीय सचिव आर.एन. ध्रुव द्वारा देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री माननीय श्री भूपेश बघेल जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री माननीय श्री अरविंद केजरीवाल जी सहित उत्तरप्रदेश, राजस्थान,महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा आदि सभी राज्यों के माननीय मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जुलाई 2022 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए भारत देश के मूल शासक गोंड जनजाति वर्ग से ही राष्ट्रपति पद हेतु सभी दल मिलकर आम सहमति बनाकर देश के सर्वोच्च पद पर सुशोभित कराने का अवसर प्रदान करने का निवेदन किए हैं।

