देश धर्म की रक्षा हेतु समाज कभी भी गुलामी की दासता स्वीकार नही किए जिसके कारण कई मौकों पर संकटों का सामना करना पड़ा–लोकेंद्र सिंह*
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
*वीरांगना महारानी दुर्गावती की 459वी बलिदान दिवस संपन्न*
गोंडवाना की साम्राज्ञी, मुगलों से लोहा लेने वाली महान वीरांगना महारानी दुर्गावती जी की 459 वी बलिदान दिवस आदिवासी गोंड समाज रुद्री द्वारा बाजार चौक रुद्री में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री लोकेंद्र सिंह राष्ट्रीय महासचिव गोंडवाना गोंड महासभा,अध्यक्षता श्री आर.एन. ध्रुव प्रांताध्यक्ष अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छग, विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री डॉ जी एस ठाकुर संचालक श्री गणपति अस्पताल रुद्री रोड धमतरी, श्री डॉ चंद्रशेखर धुर्वा संचालक यश डायग्नोसिस रुद्री रोड धमतरी, श्रीमती सुजाता ध्रुव उपाध्यक्ष अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ जिला धमतरी, श्रीमती अनीता यादव सरपंच ग्राम पंचायत रूद्री धमतरी,श्री प्रीतम साहू उप सरपंच ग्राम पंचायत रूद्री धमतरी थे। मुख्य अतिथि श्री लोकेंद्र सिंह जी ने कहा कि वीरांगना महारानी दुर्गावती की बलिदान की शौर्य गाथा का बखान करना सूर्य को दीपक दिखाने के बराबर है। उन्होंने कहा कि गोंडवाना समाज सैकड़ों, हजारों वर्षों से राष्ट्र,धर्म की रक्षा हेतु संघर्ष करते आ रहा है और कभी भी गुलामी की दासता स्वीकार नहीं किए। इसी कारण समाज को कई मौकों पर संकटों का सामना करना पड़ा है। श्री आर एन ध्रुव जी ने कहा कि वीरांगना महारानी दुर्गावती जी का शूर–वीरता इतना महान था कि जब उनकी शहादत हुई और उनके स्मारक पर बुंदेलखंड परंपरा अनुसार बारी–बारी से सबने पत्थर चढ़ाया तो वह पत्थर जीवंत रूप में शौर्य से फड़फड़ाने लगे। डॉ ठाकुर जी ने कहा कि मेरी पढ़ाई जबलपुर में हुई है। जहां मैंने वीरांगना महारानी दुर्गावती के पराक्रम की गाथा को करीब से देखा है। वहां के गढ़, किला, देव–देवालय गोंडवाना के वैभव को दर्शा रहा है। डॉ धुर्वा जी ने कहा कि देश में जब कई राजा महाराजा मुगल शासक के समक्ष आत्मसमर्पण कर चुके थे। ऐसे समय में वीरांगना महारानी दुर्गावती आत्म सम्मान, स्वाभिमान, देश –धर्म की रक्षा हेतु बलिदान देकर वीरता का परिचय दिए। हम सबके लिए गौरव की बात है कि आज हम मुगल सेना के छक्के छुड़ाने वाली महान वीरांगना को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर मिला है। कार्यक्रम में मरादेव के युवा शक्तियों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक नृत्य को सबने सराहा। इस अवसर पर गोंड समाज रुद्री के संरक्षक मनीष मरकाम,सह संरक्षक परस ओटी, अध्यक्ष जगमोहन कुंजाम, उपाध्यक्ष टीकम सोरी, कोषाध्यक्ष नीरज नेताम ,उप कोषाध्यक्ष हीरामन उईके, सचिव संतोष कुंजाम,सह सचिव हेमंत कुमार मंडावी, मुड़ा सदस्य योगेश मंडावी, रूखमणी ध्रुव, सरस्वती ठाकुर सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं सामाजिक गण उपस्थित थे।

