13 सितंबर,आदिवासी अधिकार दिवस के उपलक्ष में दो दिवसीय “राष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन” रायपुर, छत्तीसगढ़ में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्युज
संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 13 सितंबर, 2007 को आदिवासियों के अधिकारों की घोषणा की गई थी । जिसमें आदिवासियों के अलग -अलग विषयों को लेकर 46 अनुच्छेदों का उल्लेख है । इस दिन को प्रतिवर्ष “अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी अधिकार दिवस” के रूप में मनाया जाता है ।
आदिवासी समन्वय मंच, भारत” जिसका गठन 2016 में मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर महानगर में 9 राज्यों के बौद्धिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में हुआ था । यह कोई संगठन नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण भारत में कार्यरत आदिवासी समाज के सभी सामाजिक संगठनों व संस्थाओं के कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करते हुए देश के आदिवासियों के प्राकृतिक एवं संवैधानिक अधिकारों को बचाने एवं अन्याय-अत्याचार-दमन-शोषण के खिलाफ लड़ने हेतु सब को एक मंच पर लाने का एक माध्यम मात्र है । इस मंच के बेनर तले देश के अलग -अलग क्षेत्रों में साल भर में एक ही कार्यक्रम 12-13 सितंबर को “आदिवासी अधिकार दिवस समारोह” के रूप में मनाया जाता है । यह सातवां अवसर है, जब “आदिवासी समन्वय मंच, भारत” के तत्वाधान में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में “सर्व आदिवासी समाज संगठन, छत्तीसगढ़ एवं देश के आदिवासी समाज के समस्त सामाजिक संगठनों के सहयोग से 12-13 सितंबर, 2022 को दो दिवसीय ” राष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन” सफलतापूर्वक संपन्न हुआ
*पहला सत्र :- कार्यक्रम की शुरुआत 12 सितंबर, 2022 को आदिवासी परंपरा अनुसार प्रकृति एवं महापुरुषों की पूजा अर्चना करके की गई । स्वागत भाषण आप बी. एव. रावटे कार्यकारी अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज संगठन, छत्तीसगढ़ द्वारा दिया गया । तत्पश्चात स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया । कार्यक्रम की प्रस्तावना आप अशोक भाई चौधरी, राष्ट्रीय समन्वयक- आदिवासी समन्वय मंच, भारत द्वारा रखी गई। इस अवसर पर आसाम राज्य के तिनसुकिया जिले से आए हुए बिहू नृत्य दल द्वारा बांसुरी, ढोलक, लोकगीत के साथ मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति दी गई। उद्घाटन सत्र में आप फुलमन चौधरी, उपाध्यक्ष,UNPFII ( United Nations Permanent Forum on Indigenous Issues ), नंदकुमार सांय, पूर्व अध्यक्ष, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, भारत सरकार नई दिल्ली, अरविंद नेताम, पूर्व कैबिनेट मंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली आदि के द्वारा सभा को संबोधित किया गया ।*
*दूसरा सत्र :- अलग अलग समुह बनाकर ग्रुप डिस्कशन किया गया । आदिवासियों से संबंधित छ: अलग-अलग विषयों पर छ: समूह बनाकर 2 घंटे तक गहन चिंतन मंथन किया गया । जिसके विषय इस प्रकार है :-
(1) विकास की आधुनिक अवधारणा में आदिवासी एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, संवर्धन तथा पुनः निर्माण ।
(2) पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण एवं संवर्धन में आदिवासी महिलाओं की भूमिका ।
(क) महिलाओं का संपत्ति पर अधिकार*
(ख) महिलाओं की समस्याएं
(ग) महिला सुरक्षा कानून
(3) आदिवासियों के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अधिकार तथा वास्तविक स्थिति ।
(क) भूमी अधिग्रहण कानून, एट्रोसिटी एक्ट एवं कोर्ट के फैसले*
(ख) विस्थापन
(ग) आदिवासी नीति
(घ) पेसा कानून 1996, वन अधिकार कानून 2006 ।
(4) शिक्षा एवं रोजगार,पदोन्नति में आरक्षण, अनुसूचित क्षेत्रों में तृतीय -चतुर्थ वर्ग में 100% आरक्षण, युवाओं के सामने चूनौतियाँ
*(5) आदिवासी संस्कृति, कला, बोली – भाषा, साहित्य, इतिहास, हुन्नर एवं ज्ञान का संशोधन, दस्तावेज़ीकरण एवं प्रसारण।*
(6) समसामयिक समस्याएं
(क) आदिवासियों को मूल सूची में शामिल नहीं करना
(ख) राज्यों का पुन: गठन
(ग)आदिवासियों पर अन्याय- अत्याचार-दमन-शोषण ।
(घ) डी लिस्टींग ।
(ड)अलग जन गणना कॉलम
(च) कुपोषण, स्वास्थ्य।
*तीसरा सत्र :- ग्रुप डिस्कशन का निष्कर्ष सभा में उपस्थित कार्यकर्ताओं के समक्ष रखा गया । पहले ग्रुप का निष्कर्ष- आप उत्पल चौधरी गुजरात, दूसरा ग्रुप- आप रंजना पावरा, महाराष्ट्र, तीसरा ग्रुप-आप डा. बेंजामिन बारा, दिल्ली, चौथा ग्रुप- नखता राम भील, राजस्थान, पाचवां ग्रुप- डॉक्टर नारायण केशव टेकाम, छत्तीसगढ़ और छठवां ग्रुप- आप अशोक बागुल, महाराष्ट्र द्वारा प्रस्तुत किया गया । इसी सत्र में आप राजकुमार रोत, विधायक, राजस्थान, ओमकार सिंह मरकाम, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक मध्य प्रदेश, नब कुमार सरनिया, सांसद, आसाम, चमाराराजा नागर मुथैय्या, कर्नाटक, देवा जी तोफा, महाराष्ट्र, डेविड बुरुडी़, आंध्र प्रदेश, हिमांशु कुमार (गांधीवादी विचारक एवं आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों को लेकर लड़ने वाले )आदि द्वारा सभा को संबोधित किया गया ।
तीसरे सत्र के बीच-बीच में मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां भी दी गई । जिसमें प्रमुख रूप से :-
(1) धनकूल गीत,कांकेर, छत्तीसगढ़
(2) कोकणी- कोकणा आदिवासी नृत्य, महाराष्ट्र(3) कर्मा सरहूल नृत्य, उरांव समाज, अंबिकापुर छत्तीसगढ़
(4) प्रकृति वंदना, टीमली लोकनृत्य, गुजरात
(5) मांदरी रेला पाटा नृत्य, भानुप्रतापपुर छत्तीसगढ़
(6) ध्रुर्वा मड़ई, गुंडाधुर नृत्य दल, सुकमा छत्तीसगढ़
(7) गढ़िया नृत्य, नगरी छत्तीसगढ़
(8) करमा लोक गीत-बैगा आदिवासी, छत्तीसगढ़
(9) गोरुकाना लोअनृत्य, कर्नाटक आदि नृत्य दलों के द्वारा पारंपरिक वेशभूषा धारण कर वाद्य यंत्र के साथ मनमोहक प्रस्तुतियां दी गई ।
13 सितंबर, 2022 को “आदिवासी सांस्कृतिक एकता महारैली” जो पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम से प्रारंभ हुई और जय स्तंभ चौक से होकर वापस सभा स्थल पर पहुंची । मुख्य कार्यक्रम का उद्घाटन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल महोदया महामहिम आप अनुसुईया उईके जी के मुख्य आतिथ्य में हुआ । इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में मंच पर आप स्टालिन इंटी, राष्ट्रीय अध्यक्ष – आदिवासी समन्वय मंच-भारत, अशोक भाई चौधरी-राष्ट्रीय समन्वयक, आदिवासी समन्वय मंच-भारत, अनिता सोलंकी-राष्ट्रीय अध्यक्ष, आदिवासी एकता परिषद (महिला प्रकोष्ठ), बी एस रावटे- कार्यकारी अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज संगठन- छत्तीसगढ़, फुलमन चौधरी (नेपाल), उपाध्यक्ष-UNPFII , नबकुमार सरनिया सांसद, आसाम, नंदकुमार सांय, पूर्व अध्यक्ष- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, भारत सरकार, अरविंद नेताम-पूर्व कैबिनेट मंत्री, भारत सरकार, डोंगरभाऊ बागुल- संस्थापक सदस्य – आदिवासी एकता परिषद, ओमकार सिंह मरकाम-पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक मध्य प्रदेश, राजकुमार रोत विधायक राजस्थान, चमाराराजा नागर मुथैय्या (कर्नाटक) क्षेत्रीय समन्वयक दक्षिण क्षेत्र, विरेश तुमराव (RTO) आदि उपस्थित थे । इस सत्र की शुरुआत आसाम के विश्व प्रसिद्ध “बिहू नृत्य” से हुई । प्रस्तावना अशोक भाई चौधरी जी के द्वारा रखी गई, तत्पश्चात नंदकुमार सांय के द्वारा सभा को संबोधित किया गया है । इस सत्र के अंत में कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल आप अनुसूईया उईके जी द्वारा आदिवासियों के संवैधानिक प्रावधान, भारत देश में आदिवासियों की स्थिति, पांचवी अनुसूची क्षेत्र में राज्य में राज्यपाल आदिवासियों के संरक्षक एवं देश में महामहिम राष्ट्रपति आदिवासियों के संरक्षक होते हैं आदि आदिवासियों की अनेक महत्वपूर्ण बातों को सम्मिलित करते हुए ऐतिहासिक उद्धबोधन दिया गया । आभार आप डॉक्टर बेंजामिन बाड़ा एवं संचालन विनोद नागवंशी जी द्वारा किया गया । इस सत्र के समापन के उपरांत महामहिम राज्यपाल द्वारा आदिवासी समन्वय मंच, भारत तथा समस्त सामाजिक संगठनों के 20 प्रतिनिधियों के साथ में मुलाकात कर आदिवासियों के विषयों को लेकर गंभीरता से चर्चा की गई और आगामी समय में आदिवासी समन्वय मंच भारत के साथ मिलकर महामहिम राष्ट्रपति एवं माननीय प्रधानमंत्री से मिलने का आश्वासन दिया गया ।*
*समापन सत्र :- इस सत्र के अतिथि के रूप में माननीय आप अमरजीत भगत, कैबिनेट मंत्री- खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा योजना एवं संस्कृति, विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, कवासी लखमा-उद्योग एवं आबकारी, विभाग छत्तीसगढ़ शासन, डॉ मारिके-मानवशास्त्री,हालेण्ड, स्टॉलिन इंटी-राष्ट्रीय अध्यक्ष, आदिवासी समन्वय मंच, भारत, अशोक भाई चौधरी-राष्ट्रीय समन्वयक, आदिवासी समन्वय मंच, भारत, एडव्होकेट निकोलस बारला-राष्ट्रीय समन्वयक, आदिवासी समन्वय मंच, भारत, एडवोकेट विक्रम पर्ते – राष्ट्रीय सह समन्वयक, आदिवासी समन्वय मंच भारत, डॉक्टर सुनील पराड़- क्षेत्रीय समन्वयक -पश्चिम क्षेत्र, चमाराजा नागर मुथैय्या-क्षेत्रीय समन्वयक – दक्षिण क्षेत्र, विनय प्रकाश इक्का -क्षेत्रीय समन्वयक पूर्वी क्षेत्र, डॉक्टर बेंजामिन बाड़ा- क्षेत्रीय समन्वयक उत्तर पूर्वी क्षेत्र तथा भंवरलाल परमार-आदिवासी परिवार (राजस्थान), डॉ हिरा मीणा-राजस्थान, अकबर राम कोर्राम – अध्यक्ष गोंडवाना महासभा, सदेसिंह कोमरे, मोहन कोमरे,रमेश चन्द्र श्याम, जनक ध्रुव, एन आर चंद्रवंशी, जे. एल. ध्रुव, एडव्होकेट सेवती पन्ना,आर एन साय, श्यामसिंह तारम आदि थे । इनकी उपस्थिति में वर्ष 2022-23 के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में आप गजरा मेहता (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, एमपीईबी, मध्य प्रदेश एवं मार्गदर्शक – आदिवासी कर्मचारी अधिकारी संगठन (आकास),मध्य प्रदेश के नाम का प्रस्ताव एडवोकेट निकोलस बारला जी द्वारा रखा गया जिसका समर्थन डॉक्टर बेंजामिन बाड़ा जी द्वारा किया गया । कार्यक्रम के अध्यक्ष स्टालिन इंटी जी के द्वारा मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत असम राज्य की पहचान गमछा भेंटकर किया गया एवम् नए अध्यक्ष का स्वागत पगड़ी बांधकर किया गया साथ ही उन्हें भारतीय संविधान की प्रस्तावना सौंपी गई । नए अध्यक्ष आप गजरा मेहता जी द्वारा संविधान की प्रस्तावना पढ़कर शपथ ली गई और उनके साथ में मंच पर अतिथियों एवं सभा में उपस्थित कार्यकर्ताओं द्वारा खड़े होकर संविधान की प्रस्तावना को दोहराया गया। सभी कार्यकर्ताओं द्वारा भारतीय संविधान के साथ की जा रही छेड़खानी को रोकने की शपथ ली गई । इस ऐतिहासिक मौके पर डा. हिरा मीणा जी द्वारा रचित पुस्तक – “वाचिक साहित्य की पुरखौती परंपराएं और गीत” का विमोचन किया गया । इस अवसर पर मंच पर उपस्थित सदस्यों द्वारा सभा को संबोधित किया गया । बीच-बीच में सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुतियां भी दी गई । इस दो दिवसीय ऐतिहासिक कार्यक्रम में हजारों की संख्या में देश के अनेक राज्यों से कार्यकर्ता उपस्थित हुए । जिसमें प्रमुख रुप से गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दादरा नगर हवेली, बिहार, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, तेलंगाना, आंध्रा प्रदेश, कर्नाटका, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली आसाम, अण्डमान निकोबार आदि राज्य के कार्यकर्ता उपस्थित हुए । कार्यक्रम के दौरान आए सुझाव पर प्रस्ताव तैयार कर राज्य शासन एवं केंद्र शासन को भेजा जाएगा । कार्यक्रम का संचालन आप विनोद नागवंशी जी एवं आभार एडवोकेट निकोलस बालाजी द्वारा किया गया ।
“13 सितंबर, आदिवासी अधिकार दिवस” के उपलक्ष में आयोजित दो दिवसीय “राष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन” को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रुप से सहयोग करने वाले देश के सभी राज्यों के आदिवासी समाज के सभी सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं का तहे दिल से धन्यवाद एवं शुक्रिया अदा करते हैं ।

