सामाजिक

देश का असली मालिक … आदिवासी .. बन गया मनरेगा मजदूर …

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज़

देश के प्रथम निवासी आदिवासियों के गौरवपूर्ण इतिहास रहा है. विदेशी आक्रान्ताओं जो इस भूभाग के समृद्धि औ खुशाहाली और आदिवासियों की सहृदयता को देख यही बस गए. इन्होने मूल निवासियों के इतिहास को हर तरह से मिटाने का यत्न किया. 1857 के मंगल पांडे के इतिहास को पाठ्य पुस्तकों शामिल किया गया लेकिन एक राजा शंकरशाह – रघुनाथ शाह मंडावी के बलिदान को सम्मान नहीं दिया गया. आप्रवासियों के संघर्ष को स्वतंत्रता संग्राम… आदिवासियों के बलिदान को विद्रोह की संज्ञा दी गयी. . यह बात तो समझ आती है.
लेकिन वर्तमान हुक्मरानों ने भी आदिवासियों के वैभव और गौरवपूर्ण अतीत को मान्यता देने की नीयत का परिचय देने की यत्न भी नहीं किया. राजाओं के राज-पाट लूटकर उन्हें रंक बना दिया. संवैधानिक सुरक्षा के बावजूद भी सामान्य प्रजा की जल जंगल जमीन को प्रशासनिक मिली भगत से हथिया कर मनरेगा मजदुर बनने की स्थिति पर ला खड़ा किया. जल जंगल जमीन का असली मालिक अपने लिए सामुदायिक भवन के लिए भूखंड के लिए अर्जी-विनती करता है. इसे क्या समझा जाय ? लिए भूखंड के लिए सरकार से अर्जी-विनती करने को विवश है. सरकार की ऐसी क्यों> लिए सरकार से अर्जी-विनती करने को विवश है. सरकार की ऐसी दोगली नीति क्यों ..

अपने खोये हुए गौरव को पुन प्राप्त करने एवं पुरखों के बलिदान को सम्मान प्रदान कर स्वयं को गौरवान्वित करने हेतु बिल्हा क्षेत्र में पहली बार ग्राम खम्हारडीह में राजा शंकर शाह मंडावी और युवराज रघुनाथ शाह मंडावी के बलिदान को याद किया गया.

इस आयोजन में सर्वश्री / श्रीमती सुनीता जगत ब्लाक उपाध्यक्ष महिला प्र. सुचिराज नेटी डॉ. कुमतराम जगत. संरक्षक सर्व आदिवासी समाज बिल्हा ब्लाक एवं गोंड समाज खम्हारडीह चक के अध्यक्ष, गंगाराम छेदैहा कार्यकारी ब्लाक अध्यक्ष. रामनाथ कतलम अध्यक्ष मुरकुटा चक, शिव नारायण चेचाम जिला अध्यक्ष एवं विधायक प्रत्याशी बिल्हा, भूपेन्द्र मरकाम ब्लाक अध्यक्ष बिल्हा. गंगाराम छेदैहा कार्यकारी ब्लाक अध्यक्ष, जदुनाथ सिंह उइके जिला संयुक्त सचिव, अनिल मरावी जिला सचिव, गिरधारी नेटी, सुचिराज नेटी राकेश राज सहित क्षेत्र के सम्मानित सगाजन, युवा शक्ति मातृशक्ति उपस्थित रहे.
मंचीय एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का सफल संचालन श्री साल्कू मरकाम ने किया.

अपने इतिहास को जाने.. आपके पूर्वज शासक थे. सोच बदलें … शासक बने….