ग्रामीण विशेष

हसदेव अरण्य क्षेत्र में PEKB (परसा ईस्ट केते बासन और परसा) में कोयला खनन में हो रही अवैध खनन को बंद करने की मांग को लेकर राष्ट्रपति महामहिम राष्ट्रपति माननीय द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन। सर्व आदिवासी समाज

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज़ महामहिम द्रोपदी मुर्मू राष्ट्रपति महोदया जी, राष्ट्रपति भवन, नई दि

2. श्री अर्जुन मुंडा जी, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री, भारत सरकार नई दिल्ली

3. राज्यपाल महोदय राजभवन, रायपुर, छत्तीसगढ़।

4. माननीय श्री विष्णुदेव साय जी, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन, रायपुर।

द्वाराः- श्रीमान् कलेक्टर महोदय।

विषयः- पाँचवी अनुसूची के हसदेव अरण्य क्षेत्र में PEKB (परसा ईस्ट केते बासन और परसा) में कोयला खनन में अवैधानिक कार्य बंद कर दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही एवं राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को छत्तीसगढ़ में आबंटित कोयला खदान रद्द करने बाबत्।

विषयांतर्गत निवेदन है कि छत्तीसगढ़ राज्य की पाँचवी अनुसूची जिला सरगुजा में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को कोयला आपूर्ति के लिए परसा ईस्ट केते बासेन और परसा में कोयला खनन किया जा रहा है। नियमों एवं अधिकारों का उल्लंघन करते हुए अवैधानिक तरीके से खनन कार्य किया जा रहा है। ग्राम सभा सहमति बिना बहुमूल्य वनों की कटाई ग्राम केते के पुर्नव्यवस्थापन में अनियमितता एवं ग्रामसभा के असहमति के बाद भी ग्राम सीमा पारम्परिक सीमा में ग्रामीणों / आदिवासियों के पारम्परिक देव व्यवस्था एवं उनकी आस्था / मान्यताओं को जानबूझकर नष्ट किया जा रहा है। इन सभी कार्यों में जिला कलेक्टर, एसडीएम एवं पुलिस अधिकारियों ने अपने प्रशासनिक पद

का दुरूपयोग कर दुर्भावना एवं प्रलोभन से अवैधानिक कार्य किया एवं सहमति दिये हैं। सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ (रूढ़िजन्य परम्परा पर आधारित) के द्वारा अध्ययन समिति के संज्ञान में निम्नांकित विषय आया है:-

1. ग्राम केते, ब्लॉक उदयपुर, जिला सरगुजा के विस्थापन एवं पुर्नव्यवस्थापन में अनियमितता बरती गई है। केते ग्राम की मांग एवं मूलभूत सुविधा की पूर्ति अभी तक नहीं हुआ है। व्यवस्थापन उपरांत जिस गाँव (बासेन) में बसाया गया है उस गाँव में ग्रामसभा की सहमति नहीं ली गई है, जिसके कारण जीवन यापन एवं रहन-सहन में तकलीफ उठाना पड़ रहा है। अंतिम संस्कार के लिए भी जगह नहीं मिल पाता है। कुछ लोगों को मुआवजा का अप्रत्याशित रूप से पैसा मिलने के कारण उनका जीवन शैली बिगड़ गया और दुर्घटना के शिकार हो गये। केते ग्राम के लोगों को विस्थापन उपरांत मकान (20×20 फीट) दी गई है जिसमें गुजर-बसर नहीं हो सकता। इसलिए 45-50 परिवार बासेन से पलायन हो गये हैं। विस्थापित गाँव केते के कुल संख्या का 20 प्रतिशत परिवार को ही ठेका मजदूर के रूप में रखा गया है। गाँव के अन्य लोग जीविकोपार्जन के लिए भटक रहे हैं। असुविधा, प्रताड़ना एवं ग्राम के पारम्परिक आस्था के विपरित परिस्थिति के कारण असामयिक मौत हो जा रहा है। जन्म दर भी घट गया है, मृत्यु दर लगातार बढ़ रही है। यह पूर्णतः भूमिअर्जन, पुनर्वास और पुनर्वयवस्थापन on Chhattisgar में उचित प्रतिकार एवं पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013
[1/15, 3:35 PM] cggrameennews2019: ग्राम साल्ही, हरिहरपुर, फतेहपुर, घाटबर्स, तारा (चारपारा) के ग्रामसभा के सहमति के बगैर भूमिअर्जन, डायवर्सन और वनों की कटाई की जा रही है। विगत कई वर्षों से निवेदन/आवेदन, आंदोलन एवं पदयात्रा करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई है। लिखित दस्तावेज के साथ साल्ही, हरिहरपुर, फतेहपुर, घाटबर्रा, तारा (चारपारा) के लोग दो साल से लगातार धरना में बैठे हैं उनकी पारम्परिक आस्था, जीवकोपार्जन, बच्चों की शिक्षा अस्त-व्यस्त हो गई है।

3. 2010 में केन्द्रीय पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और कोयला मंत्रालय द्वारा इसे खनन के लिए No Go एरिया घोषित किया गया था। भारतीय वन्य जीव संस्थान के रिपोर्ट के अनुसार हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन से अपरिवर्तनीय क्षति होगी जिसकी भरपाई कर पाना मुश्किल है एवं हाथी मानव द्वंद्व के बढ़ने का भी उल्लेख है।

4. कोल बेरिंग एक्ट 1957 के तहत भी पाँचवी अनुसूची क्षेत्र में किसी भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के पूर्व ग्रामसभा की सहमति लेना आवश्यक है। परसा कोयला ब्लाक हेतु किसी भी ग्रामसभा से विधिवत सहमति नहीं ली गई।

5. परसा कोयला खदान हेतु वन भूमि डायवर्सन के लिए किसी भी ग्रामसभा से विधिवत सहमति नहीं मिली है। शासकीय अधिकारियों के दबाव में फर्जी प्रस्ताव बनाकर पाँचवी अनुसूची क्षेत्र एवं पेशा का उल्लंघन किया जा रहा है। 6

. हसदेव से रायपुर तक ग्रामीणों द्वारा पदयात्रा कर महामहिम राज्यपाल छत्तीसगढ़ से भेंटकर शिकायत किये थे। जिसके लिए महामहिम राज्यपाल द्वारा छत्तीसगढ़ शासन को ग्रामसभा के फर्जी प्रस्ताव की जाँच एवं आदिवासियों की नैसर्गिक अधिकारों के लिए पत्र लिखा गया था जिसका आज तक कोई जवाब नहीं आया है।

7. छत्तीसगढ़ विधानसभा में 26 जुलाई, 2022 को अशासकीय संकल्प “हसदेव क्षेत्र में आबंटित सभी कोल ब्लाक रद्द किये जाएं” का संकल्प सर्वसम्मति से स्वीकृत हुआ था।

8. वन अधिकार मान्यता कानून 2006 के तहत सामुदायिक वन अधिकार पत्र ग्राम घाटबर्रा का गैर कानूनी तरीके से स्थगित कर दिया गया। केते कोल ब्लाक 15 वर्ष के लिए उत्खनन का समयावधि खत्म नहीं हुआ है। 140 मिलीयन टन कोयला खनन होना था। अभी 82 मिलीयन टन कोयला खनन हुआ है 58 मिलीयन टन गलत माइनिंग के कारण फेस में दबा है।

9. कोल माइनिंग के लिए ब्लास्टिंग की दूरी गाँव एवं मकानों के बहुत नजदीक है। घरों में दरार एवं छप्पर टूटते जा रहे हैं। जान-माल का खतरा बना रहता है। माइनिंग नियमों के तहत माइंस एरिया के 15 किलोमीटर सर्कल में मूलभूत सुविधा शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और रोजगार मुहैया कराना होता है लेकिन उस क्षेत्र में नहीं किया गया।

ग्रामसभा की प्रस्ताव एवं प्रशासनिक स्तर पर किये गये निर्णय का विवरण-

• 19/02/2014 ग्रामसभा साल्ही वन अधिकार पत्र एवं सामुदायिक वन संसाधन ।

• 09/12/2014 ग्रामसभा हरिहरपुर कोयला खनन का विरोध।

• 12/03/2017 ग्रामसभा हरिहरपुर भूमि व्यपवर्तन का प्रस्ताव खारिज का खनन का विरोध। 15/03/2017 ग्रामसभा साल्ही भूमि व्यपवर्तन का प्रस्ताव खारिज का खनन का विरोध।

21/06/2017 ग्रामीणों का कलेक्टर के समक्ष आपत्ति।

• 16/07/2017 ग्रामसभा साल्ही ग्रामसभा विरोध के बाद भी अवैधानिक रूप से एसडीएम उदयपुर

ने पुनः ग्रामसभा में चर्चा हेतु प्रस्ताव भेजा।

26/07/2017 ग्रामसभा हरिहरपुर वन अधिकार पत्रक प्रदाय करने हेतु प्रस्ताव।

24/01/2018 ग्रामसभा फतेहपुर ग्रामसभा संपन्न होने के बाद कंपनी और अधिकारिक दबाव में सचिव ने