परमश्रद्धेय गुरूदेव गुरूमाता दाई कली कंकाली रायतार जंगो,लिंगों बाबा,के आशीर्वाद से कचारगढ़ जात्रा
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज़
परमश्रद्धेय गुरूदेव गुरूमाता दाई कली कंकाली,जंगो लिंगों के आशीर्वाद से गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति छत्तीसगढ़ गोंडवाना संघ युवा प्रभाग के सानिध्य में गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति कर्मचारी परिवार रायपुर द्वारा कली कंकाली जात्रा दिनांक 14/1/2023 को पारस नगर रायपुर से प्रारंभ हुआ।
जिसके तहत शक्ति दर्शन गों ध सं सं समिति छ ग गो संघ में एकता तथा मजबूती हेतु आदि शक्ति माता कंकाली,दाई रायतार जंगो, धर्म गुरु पहांदी पारी कुपार लिंगों हेतु विशेष अर्जी विनती कर एशिया के सबसे बड़े गुफा का दर्शन किया गया। पवित्र धार्मिक स्थल अपनी प्रकृति सुंदरता की वजह से ही ऑपरेटर के लिए आरक्षण का भी केंद्र है इसलिए यहां पहुंचने वाले आदिवासी भक्तिओन के साथ अन्य पर्यटन विभाग मध्य प्रदेश नरवाना के आदिवासियों का प्रमुख श्रद्धा स्थान है इसलिए गोंड जनजाति के लोग यहां दूर से आते हैं इस गुफा में अपने पूर्वजों तथा आदिवासी गोद धर्म के संस्थापक पारीक ऊपर लिंगो और मां कंकाली के दर्शन करने के विभिन्न राज्यों से आदिवासी कोयापुनेम मांघी पूर्णिमा को कचारगढ़ गुफा में पहुंचते हैं कचारगढ़ गुफाओं की खोज है यह स्थान गुण आदिवासी समूह की मौखिक कथा और परंपराओं में भी जीवित रहा है कचारगढ़ गुफाओं के स्थान का विवरण समय के साथ लुप्त हो गया था सन 190 के दशक में आदिवासी विद्यार्थी संघ के युवा आदिवासी छात्रों ने उनकी खोज शुरू की थी कहानियों में दिए गए वर्णन के मुताबिक उन्होंने गुफा की तलाश में गोंदिया जिले के कचारगढ़ की पहाड़ियों में खाना शुरू किया था लेखक मोती रावण कंगाली सहित एक समूह ने साले कासा के पास इस बड़ी गुफा को खोज लिया था जिसकी छत में एक बड़ा क्षेत्र था गुफा के प्रवेश द्वार के पास एक बड़ा शिलाखंड है जिसे देखकर लगता है जैसे तैसे एक तरह धकेल दिया गया है इस खोज के बाद एक वर्ष की तीर्थ यात्रा या कचारगढ़ यात्रा प्रारंभ हो गई

