गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति व छ.ग. गोंडवाना संघ एवं युवा प्रभाग जिला रायपुर में 24 -06-2024 को दिन सोमवार समय सुबह 7 बजे तेलीबंधा तलाब केनाल रोड में प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी वीरांगना_रानी_दुर्गावती_बलिदान_दिवस
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज रायपुर गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति व छ.ग. गोंडवाना संघ एवं युवा प्रभाग जिला रायपुर में 24 -06-2024 को दिन सोमवार समय सुबह 7 बजे तेलीबंधा तलाब केनाल रोड में प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी #वीरांगना_रानी_दुर्गावती_बलिदान_दिवस पर उनको याद किया और फूल माला के साथ श्रद्धासुमन सादर सेवा जोहार किया जिसमें प्रदेश अध्यक्ष चन्द्रभान नेताम ,प्रदेश सचिव गजानद नूरूटी,प्रदेश कोषाध्यक्ष गौकरण कुंजाम,रायपुर शहर जिला अध्यक्ष डुमन ओटी,युवा प्रभाग प्रदेश सचिव अशिवनी ध्रुव,गोंडवाना कर्मचारी रायपुर से अध्यक्ष मोहित कुमार दर्रों, टी. एस. कुंजाम , नीरज तुमरेकी,आशीष नेताम, करण मरई,शैलेश,चिरंजीव अन्य सगा बंधु लोग उपस्थित रहा है प्रदेश सचिव गजानंद नुरूटी ने रानी दुर्गावती के बलिदान के दिवस पर संदेश दिया
भारत देश के मध्य में भोपाल क्षेत्र के दूर पूर्वी दक्षिण तटीय सागर की सीमा विशाखापट्टनम तक देश का सर्वाधिक शक्तिशाली गोंडवाना राज्य गढ़ा कटंगा मंडला का राज वंश विस्तार था। इस राजवंश काल प्रारंभ 169 ए डी में यदु राय मरावी से होकर सन 1779 ए डी घूमेश शाह तक रहा है । इस राजवंश के सबसे प्रतापी सम्राट संग्राम शाह 1478 ए डी में राजगद्दी पर बैठे एवं मात्र 32 वर्ष के काल में अपने भुजबल एवं शौर्य सामर्थ के सहारे 52 गढ़ों को जीता तथा उस समय भारत के धन बल, शौर्य एवं गोंड़वाना की शानदार परंपरा को धारण करने वाले भारतवर्ष में अजेय सम्राट माने जाते थे । उस काल में दिल्ली का बादशाह इब्राहिम लोदी भी गढ़ा कटंगा राजवंश से घबराता था । इसी कारण उसने संग्राम शाह से मित्रवत व्यवहार किया। गुलाम वंश और गढ़ा कटंगा का गोंडवाना वंश की मित्रता इतनी घनिष्ठ थी की राजपूताना के सारे राजा इधर ताकने की हिम्मत भी नहीं कर पाते थे। राजपूताना के ठाकुर राजा राणा सांगा दिल्ली के गद्दी पर कब्जा करना चाहता था ।परंतु इस अजेय मित्रों के कारण कभी भी हिम्मत नहीं कर सका था।अतः उसने मंगोल वंश तुर्क के राजा बाबर को दिल्ली पर आक्रमण करने के लिए न्योता दिया। सारे राजपूताना राजाओं के साथ दिल्ली पर आक्रमण किया और इस युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर दिल्ली के गद्दी पर कब्जा किया। किंतु इस युद्ध के बाद भी राणा सांगा के दिल्ली की गद्दी दिवास्वप्न बन कर रह गई। इस तरह से मुगल वंश की स्थापना का श्रेय भी इन राजाओं को ही जाता है। इस युद्ध में हार का कारण बाबर का चलता फिरता तोपखाना था। यद्यपि संग्राम शाह ने युद्ध में इब्राहिम लोधी की मदद की थी । इस मदद के परिणाम स्वरुप बाद में अकबर का महारानी दुर्गावती के राज्य पर आक्रमण करने का कारण बना।

