छत्तीसगढ़

गंगाराम छेदईहा के माताजी साखिन बाई का कुंडा संस्कार गोंडी रीति से ग्राम टिकैत पेंड्री जिला मुंगेली में संपन्न

Spread the love

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

तिरुमाय साखिन बाई छेदईहा (तिरु. गंगाराम छेदइहा के मातजी) का निधन २१ अगस्त २०२४ को हो गया था जिसका कुंडा संस्कार २९ अगस्त को उनके गृह ग्राम टिकैत पेंडारी जिला मुंगेली में संपन्न हुआ.
साखी\न बाई दो पुत्रों गंगाराम और शिवकुमार सहित नाती पोतों से भरपूरा और खुशहाल परिवार छोड़ कर गई हैं. गंगाराम छेदईहा जी स्वयम गोंडी रीती रिवाज के जानकार और पक्षधर हैं. वे सर्व आदिवासी समाज बिल्हा परिक्षेत्र के संरक्षक हैं और बिल्हा में ही रहते हैं. संगठन के सभी कार्यक्रम में उनकी सक्रीय सहभागिता रहती है. वे जल संसाधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन में सेवारत हैं. गाँव एवं समाज में उनका नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है.
तिरुमाय साखिन बाई के कुंडा संस्कार में दूर दूर से परिजन, इष्ट मित्र और सगाजन बड़ी संख्या में पहुंचे थे. पाली से पालीगढ़ महासभा के अध्यक्ष तिरु कौशल सिंह आज, मुंगेली से केन्द्रीय गोंड मह्सभा मुंगेली के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र मरावी जी पहुंचे थे. बिल्हा क्षेत्र से समस्त सक्रीय सक्रिय कार्यकर्ता … जैसे शिव नारायण चेचाम जिला अध्यक्ष युवा प्र. जदुनाथ सिंह उइके, अनिल मरावी, महासिंह नेताम, गोविन्द मरावी, पंकज उइके, चेतन मरावी आदि कार्यक्रम में शामिल हुए.
भूपेन्द्र सिंह मरकाम जी का कृषि यंत्र फायनेंस करवाए हैं उसके इंस्टालमेंट जमा करने में कुछ व्यौहारिक जटिलता से सामना हो गे था. उससे के लिए वे मुझे भी याद किये थे. इसलिए बिलासपुर के बैंक में उनका काम शुरू करवाकर कुछ देर निकला. मरकाम जी व्यौहार और सन्देश रस्ते में बद्री खैरवार जी को भी लिया.
बिलासपुर -रायपुर नेशनल हाइवे पर बिल्हा मोड़ से थोडा आगे दायें तरफ धौराभाठा गाँव पड़ता है. धौराभाठा से मोहदा ग्राम पड़ता है. आगे मनियारी नदी है जो बिलासपुर और मुंगेली जिले का सीमा रेखा है. नदी पार मोहंदी और टिकैत पेंडारी जुड़वाँ गाँव है. एक तालाब दोनों गाँव का विभाजक है. गाँव के रोड बरसात में टू व्हीलर के लायक नहीं है. लेकिन हमलोग जोखिम उठा लिए थे, तू व्हीलर में ही थे.