लौंदा गाँव में फिर लोचा…. आदिवासी जमीन की गैर आदिवासीकरण पर प्रशासन असंवेदनशील… गोंडवाना महासभा ने अदालत में की आवाज बुलंद .
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
जल जंगल जमीन के मालिक होने का दावा करनेवाले आदिवासी समाज विशेषकर गोंड समाज जमीनदार होने और भूमिहीन होने की अवस्था में भविष्य में क्या परिणाम होगा इससे अनभिज्ञ है. इसलिए वे गैर आदिवासियों के कपटजाल में फंसते जा रहे हैं. अन्य समाज जैसे कंवर और उरांव समाज में ऐसी प्रवृत्ति नहीं है. ऐसी ही स्थिति गोंड समाज के जागरूक युवाओं ने अदालत में आवाज बुलंद की.
अखबार में प्रकाशित इश्तिहार में कथित रूप से श्री बद्री प्रसाद ध्रुव पिता केजू राम ध्रुव जाति गोंड़ निवासी ग्राम पूछेली तहसील पथरिया जिला मुंगेली ने ग्राम लौंदा तहसील पथरिया जिला मुंगेली की अपनी १.०२ एकड़ भूमि को गैर आदिवासी प्रभाकर और आशीष विश्वकर्मा पिता मोहित राम विश्वकर्मा को विक्रय अनुमति देने के लिए आवेदन किया है. आदिवासी स्टूडेंट यूनियन बिलासपुर तथा गोंडवाना गोंड महासभा बिलासपुर के सजग कार्यकर्ताओं ने इस विषय को संज्ञान में लेते हुए प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष के रमेश चन्द्र श्याम के नेत्रित्व में तहसीलदार पथरिया के कोर्ट पहुंचे.
पहले तो सबंधित तहसीलदार ने आपत्ति को स्वीकार करने में आनाकानी की, और अफसरी रौब दिखाकर टालने की कोशिश की. लेकिन आपत्तिकर्ता की ओर से उसी लहजे में सख्त जवाब देने पर सबसे अंत में सुनवाई के लिए तैयार हुए और कोर्ट छोड़ बाहर चले गए. दिनभर इंतिजार के बाद शाम सवा पांच बजे तहसीलदार साहब कोर्ट में उपस्थित हुए. आवेदक के वकील आये हुए और बहस हुई. आपत्ति करता की और से रमेश चन्द्र श्याम ने स्वयं पैरवी की. अंततः आपत्ति दर्ज की गई और आपत्ति के बिन्दुवार उत्तर देने के लिए आवेदक के अधिवक्ता को अगली तिथि दी गई.
कोर्ट की कार्यवाही पूरी होने तक शाम के छह बज गए. बरसाती मौसम था. मुसलाधार बारिश हलकी बूंदाबांदी में तब्दील हो गई थी. जैसा कि स्वनिर्धारित मानक प्रक्रिया के तहत वस्तुस्थिति जानने के लिए आवेदक से भी संपर्क किया जाता है, सो हम आवेदक श्री बद्री प्रसाद ध्रुव से मिलने उनके गाँव पूछेली पहुंचे.
पूछेली गाँव ग्राम लौदा से चार पांच कि.मी. अन्दर है. पूछेली सौ घरों की बस्ती है. जिसमे तीन चौथाई आबादी गोंड समाज की है बाकी एक चौथाई में जायसवाल, यादव साहू और दो घर के अग्रवाल भी समाहित हैं. अग्रवाल ही गाँव के गौंटिया है. घर में केजूराम जी मिले, थोड़ी देर में उनके पुत्र बद्री भी आगये. बद्री जी ने बताया कि वे खेत बेचने लिए मंजूरी के सिलसिले में पथरिया गए थे. हमने उन्हें बताया कि हम लोग उसी मंजूरी का विरोध में आपत्ति दर्ज किया है और असलियत जानने उनके पास आए हैं.
आवेदक बद्रीजी के पिता केजूराम जी ने सब कुछ सच सच बता दिया. वे बसे चार पांच रतनपुरिहा गोंड परिवार में से एक हैं. बत्तीस एकड़ की गाँव में खेती है. बद्री उनका अकेला पुत्र है. मोहितराम विश्वकर्मा से उनका अच्छा सम्बन्ध है. मोहित राम जी लौंदा गाँव के नहर पटवारी थे अब रिटायर हो गए हैं.. दो वर्ष पहले लौंदा के आदिवासी जमीन को उसके बेटे के नाम पर खरीदा है. और अब वे अपने बेटों के नाम पर चढ़वाना चाहते हैं. उन्हें यह भी पता नहीं है कि कितने रूपये में ख़रीदा है. भुगतान कितना चेक से और कितना नगद किया है. यह पूछने पर कि उन्हें इस तरह के लेन देन से कोई आर्थिक लाभ हुआ है या होगा तो उन्होंने साफ़ इनकार किया. जब उन्हें इस कृत्य के संभावित परिणाम समझाया तो तो वे सब समझ गए… मान गए.
इस मुहीम में साथ रहे सर्वश्री अनिल ध्रुव प्रदेश संयोजक आदिवासी स्टूडेंट यूनियन, महेंद्र मरावी, भागीरथी और राम बनवास जगत.


