ग्राम लिमहा (बेलतरा) में साकार हो रहा गोंडवाना मातृशक्ति स्वावलंबन का सपना… हथकरघा उय्द्योग
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
गोंडवाना स्वातंत्र्य और आत्मा सम्मान के महायोद्धा द्वय महाराजा शंकरशाह एवं युवराज रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस १८ सितम्बर को मातृशक्ति स्वावलंबन का जीवंत स्वरुप देखने को मिला ग्राम लिमहा (बेलतरा) विकास खंड बिल्हा जिला बिलासपुर में. यहाँ गोंडवाना किला महल के ठीक सामने एक भवन से यांत्रिक रीदम में “ठकाठक-ठकाठक” की आवाज आ रही थी. किसी कारखाना चलने का आभास हुआ. बीच जंगल में बसे गाँव में अप्रत्याशित ऐसा आभास मन में कौतुहल जगा रहा था. डॉ. एम् सिंह खुसरो जी, जिनके आमंत्रण पर हम वहाँ पहुंचे थे, से पूछने पर ज्ञात हुआ कि पास में एक छोटा कपड़ा कारखाना चल रहा है.
भवन के अंदर जाकर देखे तो वहां कपडा बुनाई का हाथ पैर से चलने वाला यंत्र हथकरघा चल रहा था. वहां लकड़ी के बने पांच हथकरघा स्थापित थे जिनमें से चार यंत्र को एक एक मातृशक्ति बड़े मनोयोग से अपने हाथ और पैर से संचालित कर रही थी. वे थीं श्रीमती बेबी कोर्राम, संतोषी सोरठे, चम्पा रानी पोरते, संगीता सोरठे. आपस में वार्तालाप से यह पता चला कि कुछ ही माह पूर्व वे बाहर से प्रशिक्षण प्राप्त किये हैं और यहाँ ग्राम पंचायत के सहयोग और प्रोत्साहन से कारखाना प्रारंभ किये हैं. प्रतिदिन प्रति व्यक्ति दस मीटर तक कपडा तैयार कर लेते हैं. इस काम में और महिलायें जुड़ रही हैं. सरपंच श्री अमरसिंह सोरठे जी की विशेष भूमिका है.
गोंडवाना मातृशक्ति वाहिनी का उद्यमिता की ओर यह छोटा किन्तु महत्वपूर्ण कदम न सिर्फ उनके स्वावलंबन और सशक्तिकरण के लिए श्लाघनीय है बल्कि समग्र आदिवासी समाज के लिए अनुकरणीय भी है.

