हमर राज पार्टी और सर्व आदिवासी समाज ने बी.एड.शिक्षकों सेवाएं यथावत व समयोजन में दिया साथ
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदेश के बीएड प्रशिक्षित युवक युवती लगातार अपनी सेवाओं को निरंतर रखते हुए शिक्षा विभाग में समायोजन की मांग के लिए अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे हैं। कड़ाके की ठंड में बस्तर और सरगुजा के बीएड प्रशिक्षित रायपुर पदयात्रा कर धरना स्थल पर धरना दे रहे हैं। सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि महिलाएं अपनी गोदी में छोटी-छोटी बच्चों के साथ यहां आंदोलनरत है। किंतु छत्तीसगढ़ सरकार उनकी मांगों की उपेक्षा कर रही है। आज शुक्रवार को सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष अकबर राम कोर्राम एवं प्रदेश सचिव विनोद कुमार नागवंशी आंदोलनकारियों के मांगों का तूता धरना स्थल पहुंचकर समर्थन किया। उसके प्रतिनिधियों ने भी धरना स्थल पर मांगों का समर्थन किया। आंदोलनकारियों की सभा को संबोधित करते हुए अकबर राम कोर्राम ने दावा किया कि नौकरी लगना मुश्किल है, लेकिन एक बार नौकरी लग गया तो नौकरी छूटना महा मुश्किल है। राज्य सरकार किसी भी बीएड प्रशिक्षित शिक्षक को उनकी सेवाओं का सम्मान करें ना कि उनकी सेवाएं समाप्त करें।
“बी.एड. धारक सहायक शिक्षकों की सेवा समाप्ति: छत्तीसगढ़ का काला अध्याय” अध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज
छत्तीसगढ़ में बी.एड. धारक सहायक शिक्षकों को सेवा से हटाए जाने के विरोध में, सर्व आदिवासी समाज, सर्व समाज और अन्य संगठन एकजुट होकर संघर्ष करेंगे। रायपुर के तुता धरना स्थल पर श्री विनोद नागवंशी, सचिव, प्रदेश सर्व आदिवासी समाज, ने कहा,
“आज का दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में काला अध्याय के रूप में दर्ज होगा। यदि सरकार नगर निकाय चुनाव के लिए अध्यादेश ला सकती है, तो इन शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए कदम क्यों नहीं उठा सकती? इन शिक्षकों ने सभी नियमों का पालन करते हुए सेवा में प्रवेश किया है।”
इसी क्रम में श्री अकबर कोर्राम जी प्रदेश अध्यक्ष, गोंडवाना गोंड महासभा एवं सर्व आदिवासी समाज, एवं पूर्व डीआईजी ने कहा,
“मैंने बस्तर में शिक्षक के रूप में कार्य किया है और वहां की दुर्दशा को नज़दीक से देखा है। आज भी बस्तर और सरगुजा में शिक्षकों की भारी कमी है। दुर्भाग्यवश, आदिवासी समाज से मुख्यमंत्री होने के बावजूद इन क्षेत्रों की उपेक्षा की जा रही है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि बी.एड. धारक शिक्षकों की सेवा सुरक्षित की जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो सर्व आदिवासी समाज और अन्य संगठन व्यापक आंदोलन करेंगे।”
बी.एड. धारक सहायक शिक्षक पिछले 16 दिनों से सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर धरने पर हैं।
शिक्षकों के हाथ में टर्मिनेशन लेटर सौंपा जाना समाज और शिक्षा के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
सर्व समाज ने आंदोलन में शामिल होने का ऐलान किया।
तूता धरना स्थल में सुविधाओं के अभाव के बीच युवतियां भी दिन भर धरना स्थल में डटे हुए हैं। महिलाओं को किसी प्रकार की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।

