ग्रामीण विशेषछत्तीसगढ़

गोंडवाना किला महल लिम्हागढ़ का मनाया गया सप्तम वार्षिकी.

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

लिम्हा (बेलतरा) विकासखंड बिल्हा जिला बिलासपुर यूँ तो छोटा सा गोंडवाना गाँव है लेकिन आदिम संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन सदैव अग्रणी रहा है. दादा हीरासिंह मरकाम के साथी गोंडवाना समग्र क्रांति आन्दोलन के विजनरी प्रणेताओं में से एक डॉ. एम.सिंह खुशरो जी ने यहाँ गोंडवाना महल का निर्माण किया गया है. आसपास के गाँव वाले इसे गोंडवाना किला महल के नाम से जानते हैं. इसका लोकार्पण दादा हीरासिंह मरकाम ने जनवरी २०१८ में किया था. तब गोंडवाना के एतिहासिक बादल महल, जुना शहर, रतनपुर के भग्नावशेष के अंश को नेंगाचार का पालन करते हुए विशाल रैली के रूप में संधारण कर इस महल में स्थापित किया गया है. उक्त रैली में इन पंक्तियों के लेखक भी सहभागी होने का सौभाग्य प्राप्त है.
इस गोंडवाना किला महल के सातवीं वर्षगाँठ २ जनवरी २०२५ को बड़े धूमधाम से मनाया गया. इस अवसर पर किला परिसर में बुढादेव का पारंपरिक रीति से पूजन किया गया. पूजन के दौरान दो व्यक्तिय विलक्षण देव शक्ति से आवेशित हो गए. उपस्थित अतिथियों और गणमान्य नागरिकों का पीले चावल और पीले गमछों से स्वागत किया गया.
अतिथियों के उद्बोधन के पश्चात युवतियों ने रेला पाटा का जीवंत प्रदर्शन किया गया जिसमें गायकों और वादकों ने मांदर, निसान, डफ़रा, झांझ मजीरा का प्रयोग किया गया. किसी भी तरह के रिकार्डिंग गीत संगीत का उपयोग नहीं किया गया.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे रमेश चन्द्र श्याम कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महा सभा, विशिष्ट अतिथियों में सर्वश्री समयसिंह गोंड जिला अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महा सभा, घनश्याम खुशरो सचिव गोंडवाना समाज समाज सीपत परिक्षेत्र, शिव चरण जगत कोषध्यक्ष गोंडवाना समाज समाज सीपत परिक्षेत्र, जगदीश प्रसाद सिदार जिला कार्यकारिणी सदस्य छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा, अनिल ध्रुव प्रदेश संयोजक आदिवासी स्टूडेंट यूनियन (ASU), रामेश्वर शांडिल्य प्राचार्य, श्रीमती पंवरिया मरावी, रामनाथ पुलस्त, संतोष सिंह मरावी, श्रीमती प्रमिला मरावी उत्तराधिकारी गोंडवाना महल परिसर लिम्हागढ़ रहे. सम्मानित सगाजनो में सर्व श्री / श्रीमती गेंद्बाई टेकाम, बेबी कोर्राम, रमाशंकर सिंह तंवर, कीर्ति कुमार सरोटीया सहित अनेको लोग उपस्थित रहे.
कार्यक्रम का सञ्चालन श्री प्रहलाद कोर्राम ने किया और आभार प्रदर्शन श्री फाग सिंह सोरठे व्यख्याता ने किया.