Friday, May 22, 2026
ग्रामीण विशेषछत्तीसगढ़

पुरखौती जमीन बेचकर बकबकायेंगे… फिर दुसर के बनी भूती जायेंगे… अइसे कइसे गोंडवाना राज बनायेंगे

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

विजय कुमार ध्रुव, राकेश कुमार ध्रुव, शिवांगी तीनो पिता दि. जीवनलाल ध्रुव. यशोदा बाई पति जीवनलाल ध्रुव, जाति कुंजाम (मरई) गोंड़ अ.ज.जा. निवासी धौराभाठा तहसील बिल्हा जिला बिलासपुर द्वारा अपने स्वामित्व एवं आधिपत्य की ग्राम धौराभाठा प.ह.न. 13 रा.नि.म. दगौरी तहसील बिल्हा जिला बिलासपुर स्थित खसरा नं 531/1 रकबा क्रमशः 0.5८ एकड़ भूमि को गैर आदिवासी क्रेता श्रीमती अमृत गुम्बर पति श्री सुरेन्द्र सिंह गुम्बर जाति पंजाबी निवासी पुराना हाईकोर्ट के पास बिलासपुर को विक्रय की अनुमति दिए जाने हेतु आवेदन किया गया है।
इस सम्बन्ध में जानकारी लेने रमेशचंद्र श्याम प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा एवं अनिल ध्रुव प्रदेश संयोजक ASU ग्राम धौराभांठा पहुंचे. धौराभाठा बिलासपुर – रायपुर हाइवे पर बिल्हा मोड़ से आगे एक कि.मी. के अन्दर ही पड़ता है. गाँव में अलग से गोंडपारा है. बिल्हा क्षेत्र के आदिवासी जमीन बचाओ अभियान के सजग कार्यकर्ताओं ने विजय कुमार ध्रुव के पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी दे दी थी. आवेदक वैवाहिक निमंत्रण में बेमेतरा गए हुए थे. मोबाइल पर उनसे बात हुई तो उन्होंने शादी के नेग में व्यस्त होना बताया. इसलिए उनके चाचाजी के घर बैठे.
चाचा विनोद ध्रुव से जानकारी मिली कि उनके पिता गाँव के गौटिया थे और चालीस एकड़ जमीन के मालिक थे. उनके चार बेटों में से आवेदक विजय के पिता दिवंगत जीवनलाल एक थे. बटवारा में तीन भाइयों को सात सात एकड़ जमीन मिले. आवेदक के पिता जीवनलाल को पांच एकड़ और एक हालर मिल मिला. भविष्य में आवेदक के दो भाइयों के बीच बटवारे में ढाई ढाई एकड़ ही जमीन बचेगा. जमीन क्यों बेचा जा रहा है तो जवाब मिला कर्जा है. गैर आदिवासी गुम्बर को क्यों बेचा जा रहा है. तो पता चला कि वहाँ गुम्बर परिवार की बीस एकड़ जमीन है उसे बढाना है.
सार बात … एक गोंड गौंटिया के संतान के प्रगति / अवनति की रफ़्तार… एक पीढ़ी के अंतराल में चालीस एकड़ से ढाई एकड़ में उतर आया. और परदेसिया उसी कालावधि में शून्य से बीस एकड़ बना लिया.
क्या जल जंगल जमीं का मालिक अपनी सोच नहीं बदल सकता कि भू राजस्व संहिता के आदिवासी जमीन को गैर आदिवासी को विक्रय में रोक उनके भले के लिए है ?
क्या गोंड समाज अपने जीवन शैली नहीं बदल सकता कि बाहरी टीम टाम दिखावा को छोड़कर अपनी हैसियत के हिसाब से खर्च करे.
कर्जा उतना ही लें कि जिसे अपने कमाई से छुट सके और पुरखौती जमीन को बेचना न पड़े ?