वीर मेला के दूसरे दिन मातृ-सम्मेलन सम्पन्न महिलाओं ने संभाला पूरा संचालन
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
40 आदिवासी प्रतिभाएँ सम्मानित
राजाराव पठार, कर्रेझर। शहीद वीर नारायण सिंह के शहादत दिवस पर आयोजित तीन दिवसीय विराट वीर मेले के दूसरे दिन मातृ-सम्मेलन का आयोजन भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। यह दिन पूर्णतः महिलाओं के नाम समर्पित रहा। मंच संचालन से लेकर विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन तक सभी दायित्व महिलाओं द्वारा निभाया गया।महिला नेतृत्व का सशक्त प्रदर्शन कार्यक्रम में डॉ. सुशीला नेताम, राष्ट्रीय अध्यक्ष, महिला प्रभाग गोंडवाना महासभा ने कहा कि आदिवासी समाज की शक्ति इसकी मातृ शक्ति है। संस्कृति, परंपरा और संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ाने में महिलाओं का योगदान अमूल्य है। मातृ सम्मेलन जैसे आयोजन समाज में महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को सशक्त करते हैं।सुश्री नीलिमा श्याम, जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि वीर मेला सिर्फ उत्सव नहीं, यह हमारी पहचान का प्रतीक है। आधुनिक दौर में भी हमारी महिलाएँ संस्कृति की संवाहक बनकर नए इतिहास लिख रही हैं।
इस अवसर पर मंजू प्रभाकर ने अध्यक्षता की। साथ ही अनिता ठाकुर, माधुरी रावटे, उतरा मरकाम, ईश्वरी नेताम, प्रेमलता नेताम, राखी गोटा, बिंदा देवी नाग, शकुंतला दीवान, बिमला कुरेटी, शांति नरेटी, छबिला गोटी, उषा मरकाम, रम्भा नेताम, रिगवती वट्टी, तारा पोटाई, बंसती बाला, नंदा ध्रुव, चमेली नेताम, चन्द्रकिरण नेताम, सविता नेताम, शकुंतला तारम, हेमलता मंडावी सहित बड़ी संख्या में महिलाएँ उपस्थित थीं।
आदिवासी प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम
दूसरे दिवस आयोजित आदिवासी प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में प्रदेश के अनेक जनप्रतिनिधियों ने शिरकत की।कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अतिथिपूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल,
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत,कुंवर सिंह निषाद (विधायक, गुंडरदेही),भैया लाल सिन्हा (पूर्व विधायक, बालोद),
सावित्री मंडावी(विधायक,भानुप्रतापपुर),अनिला भेड़िया (विधायक, डोंडी लोहारा),
अम्बिका मरकाम (विधायक, सिहावा),ओंकार साहू (विधायक, धमतरी)तथा अन्य जनप्रतिनिधि शामिल रहे।
कार्यक्रम में पद्मश्री पंडी राम मण्डावी को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 40 आदिवासी प्रतिभाओं को मंच से सम्मानित किया गया।
भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री
उन्होंने वीर नारायण सिंह के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि सोनाखान के जमींदार वीर नारायण सिंह न्यायप्रिय प्रशासक, अनुशासित नेता और साहसी योद्धा थे। अकाल में जनता को बचाने के लिए अंग्रेजों से संघर्ष इतिहास में अद्वितीय है। उन्होंने जो मार्ग दिखाया—अन्याय का प्रतिकार और न्याय का पक्ष—वही हमारे समाज की प्रेरणा है। उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी अधिकारों, वनाधिकार पट्टा, सामुदायिक दावे, तथा संरक्षण से जुड़े मुद्दों को भी विस्तार से रखा।
साथ ही दिवंगत आदिवासी नेता जीवन ठाकुर के प्रकरण में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
कुंवर सिंह निषाद, विधायक गुंडरदेही ने कहा कि वीर मेला आदिवासी संस्कृति का अद्वितीय मंच है। आधुनिक युग में भी यह आयोजन युवाओं में अपनी जड़ों को बचाने का भाव जागृत करता है। जल-जंगल-जमीन की रक्षा केवल आदिवासियों नहीं, सभी की जिम्मेदारी है।भैया लाल सिन्हा, पूर्व विधायक बालोद ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं आदिवासी होने के बावजूद आदिवासी हितों की अनदेखी हो रही है। बड़े पूंजीपतियों के हित में जंगलों की कटाई करवाना दुर्भाग्यपूर्ण है। सावित्री मंडावी, विधायक भानुप्रतापपुर ने कहा समाज के विकास का मूल आधार शिक्षा है। युवा वर्ग में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति चिंताजनक है। समाज को नशामुक्ति के लिए ठोस नीति बनानी होगी। अनिला भेड़िया, विधायक डोंडी लोहारा ने कहा कि “वीर मेला हमारी सांस्कृतिक अस्मिता, परंपरा और सामूहिक शक्ति का जीवंत प्रतीक है। यह मंच हमारे समाज को अपनी जड़ों से जोड़ता है। आदिवासी समाज ने सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा की है—यह सिर्फ संसाधन नहीं, हमारी पहचान और अस्तित्व का आधार है। आज जरूरत है कि हम सभी मिलकर इन अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए खड़े हो।
सिहावा विधायक अम्बिका मरकाम ने कहा कि वीर नारायण सिंह हमारे इतिहास के महानायक हैं, जिन्होंने अन्याय के विरुद्ध संघर्ष कर समाज को नई दिशा दी। वीर मेला उनके विचारों को जीवित रखता है और युवाओं में स्वाभिमान तथा संघर्ष की भावना जगाता है। धमतरी विधायक ओंकार साहू ने कहा कि वीर मेला हमारे धरोहर का वह उत्सव है जो समाज को एकता, संस्कृति और संघर्ष की भावनाओं से जोड़ता है। यहां की सांस्कृतिक झलक, पारंपरिक नृत्य, मातृ-शक्ति का नेतृत्व—सब मिलकर यह दिखाते हैं कि आदिवासी समाज स्वयं अपनी पहचान को मजबूती से संभाले हुए है।इस मौके पर बीएस रावटे ने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के अस्मिता खतरे पर है जिधर देखो उधर आदिवासियों को जमीनों को हड़प्पा जा रहा है इसलिए सभी आदिवासी संगठन को एकत्रित होकर एक संगठन एक मजबूती से हमको इस समस्या का समाधान निकालना है अकबर राम कोर्राम,वीर मेला समिति के अध्यक्ष यू आर गंगराले,विनोद नागवंशी,जीवराखन मरई,तुकाराम कोर्राम,कन्हैया उसेंडी,पूर्व विधायक ब्रम्हानंद नेताम,विनोद नागवंशी जिवराखन लाल उसारे आत्मा कौडो गंगा राम दर्रो भोला राम नेताम,प्रवीण ध्रुवे,प्रेमलाल कुंजाम,कृष्ण कुमार ठाकुर,उदय नेताम,बलराम गोटी,कमल नारायण ध्रुव,गौतम कुंजाम,शिव नेताम,ललित कावरे,वोमेश गंगराले, रवि नायक,पी आर ठाकुर,भोला राम नेताम,शैलेंद्र सोरी,महेंद्र गावड़े,श्याम तारम,गुलेंद्र कतलम,
रामेश्वर मरकाम,वेदप्रकाश ध्रुव,बंटी मरकाम,दिग्विजय सिंह ध्रुव,नागेश सलाम,अश्वनी कुंजाम,भागी कोर्राम,हेमंत छैदेया सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

