रतनपुर महामाया में गोंड समाज ने पंडित पुजारियों को दरकिनार कर गर्भगृह में अपने तरीके से सेवा अर्पित किया…चढ़ाया डूमर और महुआ .
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
गोंडवाना राजवंश के ऐतिहासिक धरोहर बादल महल जुनाशहर रतनपुर में क्षेत्र के गोंड समाज ने पंचम दिन पारंपरिक जवारा सेवा अर्पित किया. जिसमे बिलासपुर और कोरबा जिले के सियान, जवान, महिलाये और युवतियां पारंपरिक परिधान में सजधज कर शामिल हुए. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बादल महल में पूजा कर महामाई जोहरनी के लिए बाजे गाजे के साथ रैली निकली. रैली में एक कन्या माता जोहरनी नेंग के समस्त सामग्री पर्रा में सजाकर शीष में धारण कर चल रही थी. रणबाकुरे युवा अपने राजसी गौरव के प्रतीक सश्त्र संचालन करते इष्ट देवों के जयकारा लगाते चल रहे थे.
महामाई मंदिर परिसर में समाज के सियानो ने अपने धार्मिक सांस्कृतिक आस्था और अधिकार के लिए जोरदार आवाज बुलंद की. वर्तमान में दर्शन के लिए ऐसी व्यस्था है कि गर्भ गृह के बाहर चौखट के निचे दर्शनार्थियो के लिए नायलोन धागों का पिंजरा बना दिया गया है जिसमें झुककर प्रवेश करना है. बैठकर दर्शन करना है और पंडित के हाथों में भेंट / चढ़ावा देना है. इस व्यवस्था को समाज के प्रमुखजनो ने अमान्य कर दिया और पुलिस बन्दोस्त प्रभारी से बात की गयी यह तय किया गे की समाज के दस प्रमुखजनो को गर्भ गृह के चौखट से सेवा अर्जी करने दिया जाए. सर्वश्री गंगाराम छेदईहा, भूपेन्द्र मरकाम और रमेश चन्द्र श्याम चौखट से अपने स्वयं के हाथों से भेंट अर्पित करना चाहा तो पंडित पुजारी ने फिर मना किया और चढ़ाव अपने हाथों पर माँगा. श्री मरकाम जी ने कहा कि हम महामाई दाई के कुल के लोग है, हम अपने हाथो से भेंट चढ़ाएंगे. छेदईहा जी ने कहा कि माँ बेटों के बीच व्यौहार में बाधक न बने. श्यामजी ने आग्रह किया कि सियानों को अपने हाथों भेंट चढाने दिया जाये. और आश्वस्त किया कि माता की गरिमा का ध्यान रखा जाएगा. और सियानो ने स्वयं अपने हांथो से भेंट चढ़ाया. क्या भेंट किया ? पांच पांच डूमर के कच्चे फल और महुआ. दोनों पुष्प हैं.
डूमर : हिंदी में गुलर, संस्कृत में उदुम्बर, बोटनिकल नाम : फिकस रेसीमोसा, यह अंजीर कुल का फल है और अंजीर के समस्त गुण (रक्त शोधक रक्त वर्धक) पाए जाते हैं. इसे बिना फुल के फल माना जाता है पेड़ के तने पर गुच्छों में लगते हैं. वस्तुतः फुल के वाह्य चक्र केलिक्स और कोरोला गेंद की तरह रूपांतरित हो जाते हैं. विकास के क्रम में इसके भीतरी भाग में पुरुष केसर और स्त्री केशर पनपते हैं और निषेचन के पश्चात बीज बनते है. कच्चे डूमर हरे रंग के ठोस होते है इसे इसे पुष्प माना जाता है. पके डूमर नर्म और लाल रंग के मीठे फल होते हैं.
गोंडी मान्यता :– डूमर जादू टोना रोधी कवच के रूप में काम करता है इसीलिए व्याह में दुमर डारा का मंडवा बनाते हैं. चूँकि यह रक्त से सम्बंधित है इसलिए रक्त पूजा के विकल्प के रूप में भी डूमर का चढावा अर्पित करते हैं.
रमेश चन्द्र श्याम
कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष

