ग्रामीण विशेष

प्रसंग नागपंचमी …. जन्मेजय का नाग यज्ञ और … आदि वंशियों का नागपूजा

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 
आदिम वंशीय में नाग पूजन पुरातन परंपरा है, जिसमें नाग शक्ति का आवाहन किया जाता है. इसके लिए वर्ष का एक दिन तय है जो श्रावण मास के अंधियारी पाख के पंचमी तिथि को पड़ता है. पौराणिक ग्रंथों के अध्ययन, बड़े बुजुर्गों के सत्संग – श्रवण और स्वचिंतन से संचित अनुभूति को साझा करना समीचीन हो न हो लेकिन प्रासंगिक तो अवश्य होगा.
घर में रामायण, भागवत और गीता जैसे पौराणिक ग्रन्थ का होना शिक्षित और सुसंस्कृत परिवार की पहचान होता था. उनका पठन और पाठन का उतना महत्त्व नहीं होता था जितना उनका “होने ” का होता था. लेकिन मैंने पिता जी के कठोर निर्देश के चलते रोज शाम को गीता का श्लोक और भाष्य का पठन नहीं वाचन करता था ताकि घर के अन्य सदस्य भी उसे सुन सकें. रामायण और भागवत कथा का भी बीच बीच में वाचन करता था. गीता नीरस “दर्शन” के शास्त्र है लेकिन रामायण – रामचरित मानस और श्रीमद्भागवत की रोचक और रोमांचक कथाएं जिज्ञासाएं जगाती है. फलस्वरूप मैंने इन पौराणिक ग्रंथों से अनायास ही गुजर गया.
भागवत कथा राजा परीक्षित की कहानी से प्रारंभ होती है. अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु था. अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित का युद्ध तक्षक नाग से हुआ था जिसमे परीक्षित हत हुआ था. तक्षक नाग से पिता की हत्या का बदला लेने के लिए परीक्षित पुत्र जन्मेजय ने तक्षक सहित नागवंश के विनाश के लिए संग्राम रचा था जिसे “ जन्मेजय के नाग यज्ञ “ के नाम से जाना जाता है. महाकवि जयशंकर प्रसाद की हिंदी महाकाव्य “कामायनी” के बाद “जन्मेजय का नाग यज्ञ” उनकी बहुचर्चित नाट्य कृति है. नागराज तक्षक जन्मेजय के नाग यज्ञ समर में भी विजयी रहे. नागवंशियों की विजयोत्सव ही आदिवंशियों की नागपूजा का पारंपरिक पर्व रूप है.
गाँव देव किरारी (अकलतरा) में नागपंचमी को उल्लासपूर्ण नागपर्व के रूप में आदिकाल से मनाया जा रह है. मैं तो अपने बचपन से देखते आ रहा हूँ, गाँव में इस दिन कोई कृषि कार्य नहीं होता. धरती माता की जुताई – खुदाई नहीं की जाती. किसान अपने खेतों के मेढ़ में नाग शक्ति के लिए दूध लाई रखते हैं. संवरीन गुरवाइन दाई ठाना में नाग दर्शन कर दूध – लाई और नारियल चढाया जाता है. आसपास के गाँवों से लोगों का दर्शन के लिए ताँता लगा रहता है. एक दिन का मेला लग जाता है. गाँव की बेटियाँ मेला देखने मायके आती हैं. गुरुवाइन दाई और नागदेवता पर जन मानस की ऐसी आस्था और श्रद्धा है कि आज तक गाँव में सर्प दंश से एक भी मृत्यु नहीं हुई.
नागपंचमी मल्ल युद्ध तो नहीं होता लेकिन कबड्डी मैच जरुर होता है यह भी सनातन है. इस वर्ष 32 गाँवों की कबड्डी टीम प्रतिभागी रहे. जिसमें तमनार रायगढ़ से लेकर दुर्ग भिलाई तक के टीम शामिल रहे. रिमझिम बरसात के बावजूद भी लोग कीचड़ मिटटी से लोटपोट खिलाड़ियों का जोरशोर से उत्साह वर्धन करते रहे. रात दस बजे तक दर्शक डटे रहे. सरपंच अशोक कश्यप तथा उपसरपंच फूलसिंह जगत के नेत्रित्व में गाँव के गणमान्य नागरिकों जितेन्द्र कश्यप, कमल कश्यप, धनञ्जय श्याम, सुन्ना गोंड, महेश्वर कश्यप, हेमंत कश्यप, धनेश नेताम ने सम्पूर्ण आयोजन संभाला. मुख्य अतिथि के रूप में गाँव के वरिष्ठ नागरिक रमेशचंद्र श्याम उपस्थित रहे.
कबड्डी मैच में ग्राम रलिया (जयरामनगर) की विजेता टीम को नगद दस हजार रूपये, टी शर्ट और शील्ड से पुरष्कृत किया गया. उपविजेता रहे तखतपुर को सात हजार रूपये, टी शर्ट और शील्ड से सम्मानित किया गया. तीसरे स्थान प्राप्त नवागांव (कौड़िया) को पांच हजार रूपये, टी शर्ट और शील्ड देकर प्रोत्साहित किया गया. चौथे स्थान पर रहे साबर ग्राम को तीन हजार रूपये टी शर्ट और शील्ड से प्रदान कर उनके मनोबल बढाया गया. बेस्ट रेडर नागेश्वर ग्राम रलिया, और बेस्ट केचर अजय यादव तखतपुर को भी सम्मानित किया गया.
पुलिस विभाग और स्वास्थ्य विभाग अकलतरा ने व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने में अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई.
रमेश चन्द्र श्याम