शिक्षा

मैट्स स्कूल ऑफ एजुकेशन में विशेषज्ञ व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

*गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षक, शिक्षार्थी, विद्यालय एवं समुदाय के समन्वय पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षु शिक्षकों से किया संवाद*

रायपुर, 21 अगस्त 2026। मैट्स स्कूल ऑफ एजुकेशन, मैट्स यूनिवर्सिटी, गुल्लू (आरंग), रायपुर में “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों, शिक्षार्थियों, विद्यालयों और समुदाय को जोड़ना” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षु शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विभिन्न आयामों, शिक्षक की भूमिका, विद्यालय प्रबंधन, बाल विकास, अभिभावकीय सहभागिता, सामुदायिक भागीदारी, समावेशी शिक्षा तथा गुणवत्तापूर्ण अधिगम परिणामों के संबंध में विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ वाग्देवी के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं वंदना के साथ हुआ। ज्ञान, विद्या एवं विवेक की अधिष्ठात्री माँ वाग्देवी का स्मरण करते हुए अतिथियों एवं उपस्थितजनों ने ज्ञान के प्रकाश को आगे बढ़ाने तथा शिक्षा के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने की मंगलकामना की। दीप प्रज्वलन एवं वंदना के पश्चात कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई।

कार्यक्रम में श्री दिनेश शर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी, आरंग, रायपुर, श्री मुरली मनोहर देवांगन, निदेशक, थिंक IAS, श्री सोमनाथ राजपूत, बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO), आरंग, रायपुर तथा श्री प्रितेश पांडे, शैक्षणिक प्रमुख, थिंक IAS विशेषज्ञ वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मैट्स स्कूल ऑफ एजुकेशन के प्रशिक्षु शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

*शिक्षक शिक्षा एवं विद्यालय प्रबंधन पर श्री दिनेश शर्मा ने किया मार्गदर्शन*

खंड शिक्षा अधिकारी श्री दिनेश शर्मा ने शिक्षक शिक्षा एवं विद्यालय प्रबंधन के संदर्भ में प्रशिक्षु शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आधारशिला एक सक्षम, संवेदनशील एवं जिम्मेदार शिक्षक तथा प्रभावी विद्यालय प्रबंधन है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, उनकी क्षमताओं के विकास और भविष्य को दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मार्गदर्शक होता है।

उन्होंने विद्यालय में सकारात्मक एवं सीखने के अनुकूल वातावरण विकसित करने, शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास तथा विद्यालय स्तर पर बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। श्री शर्मा ने कहा कि विद्यालय की सफलता केवल परीक्षा परिणामों से निर्धारित नहीं होती, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान, व्यवहार, कौशल, आत्मविश्वास, अनुशासन एवं सामाजिक जिम्मेदारी का विकास भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने प्रशिक्षु शिक्षकों से कहा कि वे अपने भावी दायित्व को केवल एक पेशे के रूप में न देखते हुए इसे समाज और राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करें। उन्होंने विद्यार्थियों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझते हुए संवेदनशील एवं प्रभावी शिक्षण करने पर भी बल दिया।

*शिक्षा के व्यापक उद्देश्य एवं विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण पर श्री मुरली मनोहर देवांगन ने रखे विचार*

थिंक IAS के निदेशक श्री मुरली मनोहर देवांगन ने शिक्षा को विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सोचने, समझने, निर्णय लेने और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता विकसित करना भी है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों में जिज्ञासा पैदा करने और उन्हें निरंतर सीखने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षकों को विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें समाज, देश और वर्तमान परिस्थितियों से जोड़कर सीखने के अवसर प्रदान करने चाहिए।

श्री देवांगन ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षक एवं विद्यार्थी के बीच निरंतर संवाद को आवश्यक बताते हुए कहा कि जब विद्यार्थी अपनी जिज्ञासाओं एवं विचारों को स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर पाता है, तब सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है। उन्होंने प्रशिक्षु शिक्षकों को अपने विषय के साथ-साथ विद्यार्थियों के दृष्टिकोण एवं व्यक्तित्व को समझने की आवश्यकता पर बल दिया तथा उन्हें लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयासरत रहने के लिए प्रेरित किया।

*बाल विकास, अभिभावकीय सहभागिता एवं समुदाय की भूमिका पर श्री सोमनाथ राजपूत ने किया जागरूक*

बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) श्री सोमनाथ राजपूत ने अपने वक्तव्य में बाल विकास के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे का विकास केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार एवं समुदाय की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उन्होंने कहा कि बच्चे के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं सामाजिक विकास के लिए परिवार, विद्यालय एवं समुदाय के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक है। अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता बच्चों की शिक्षा एवं व्यक्तित्व विकास को सकारात्मक दिशा प्रदान कर सकती है।

श्री राजपूत ने प्रशिक्षु शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि भावी शिक्षक के रूप में उन्हें बच्चों की आवश्यकताओं, भावनाओं एवं व्यक्तिगत क्षमताओं को समझना होगा। बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार तथा उन्हें सुरक्षित, सकारात्मक एवं सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराना शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

उन्होंने विद्यालय एवं समुदाय के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जब अभिभावक, शिक्षक एवं समुदाय मिलकर बच्चों के विकास के लिए कार्य करते हैं, तो उसके परिणाम अधिक प्रभावी एवं स्थायी होते हैं।

*गुणवत्तापूर्ण अधिगम परिणाम एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा पर श्री प्रितेश पांडे ने साझा किए विचार*

थिंक IAS के शैक्षणिक प्रमुख श्री प्रितेश पांडे ने गुणवत्तापूर्ण अधिगम परिणामों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि शिक्षा की वास्तविक सफलता इस बात से निर्धारित होती है कि विद्यार्थी ने क्या सीखा, कितना समझा और उस ज्ञान का उपयोग वास्तविक जीवन में किस प्रकार कर पा रहा है।

उन्होंने कहा कि शिक्षण प्रक्रिया को केवल परीक्षा एवं अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों में विषय की समझ, तार्किक सोच, रचनात्मकता, संवाद कौशल एवं व्यवहारिक ज्ञान का विकास भी समान रूप से आवश्यक है।

श्री पांडे ने प्रशिक्षु शिक्षकों से कहा कि वे विद्यार्थियों की सीखने की गति, क्षमता एवं रुचि को ध्यान में रखते हुए शिक्षण की विभिन्न पद्धतियों का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता अलग होती है, इसलिए शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, संवेदनशील एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण अधिगम परिणाम तभी प्राप्त किए जा सकते हैं, जब शिक्षक विद्यार्थियों को सीखने के लिए प्रेरित करें और उन्हें अपनी क्षमताओं को विकसित करने के पर्याप्त अवसर प्रदान करें।

*प्रशिक्षु शिक्षकों ने विशेषज्ञों से किया संवाद*

व्याख्यान के दौरान प्रशिक्षु शिक्षकों ने शिक्षक की भूमिका, विद्यालय प्रबंधन, बाल विकास, अभिभावकीय सहभागिता, सामुदायिक भागीदारी, समावेशी शिक्षा तथा गुणवत्तापूर्ण अधिगम से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से प्रश्न किए। विशेषज्ञों ने उनकी जिज्ञासाओं का सरल, व्यावहारिक एवं उदाहरणों के माध्यम से समाधान किया।

संवादात्मक सत्र ने प्रशिक्षु शिक्षकों को शिक्षा के विभिन्न पक्षों को व्यापक दृष्टिकोण से समझने तथा अपने भावी शिक्षक जीवन में इन अवधारणाओं को व्यवहार में लागू करने की प्रेरणा दी। प्रशिक्षु शिक्षकों ने विशेषज्ञों के अनुभव एवं मार्गदर्शन को अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया।

कार्यक्रम में मैट्स स्कूल ऑफ एजुकेशन की अधिष्ठाता प्रो. परविंदर हंसपाल, प्राचार्य प्रो. संजीत तिवारी, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में प्रशिक्षु शिक्षक उपस्थित रहे।

*विशेषज्ञ अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया सम्मानित*

कार्यक्रम के समापन अवसर पर मैट्स स्कूल ऑफ एजुकेशन की ओर से उपस्थित सभी विशेषज्ञ अतिथियों श्री दिनेश शर्मा, श्री मुरली मनोहर देवांगन, श्री सोमनाथ राजपूत एवं श्री प्रितेश पांडे को उनके बहुमूल्य समय, मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी वक्तव्य के लिए स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विभाग की ओर से सभी विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

मैट्स यूनिवर्सिटी के माननीय कुलाधिपति श्री गजराज पगारिया, कुलपति प्रो. (डॉ.) के. पी. यादव, कुलसचिव श्री गोकुलानंद पंडा एवं महानिदेशक श्री प्रियेश पगारिया ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर मैट्स स्कूल ऑफ एजुकेशन को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र के विशेषज्ञों को प्रशिक्षु शिक्षकों के साथ संवाद के लिए आमंत्रित करना उनके ज्ञान, दृष्टिकोण एवं व्यावसायिक क्षमता के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

कार्यक्रम ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षक, शिक्षार्थी, विद्यालय, परिवार एवं समुदाय के बीच बेहतर समन्वय एवं सहभागिता की आवश्यकता को प्रभावी रूप से रेखांकित किया। कार्यक्रम का समापन अतिथियों, प्राध्यापकों एवं सभी प्रशिक्षु शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया।

मैट्स स्कूल ऑफ एजुकेशन
मैट्स यूनिवर्सिटी, गुल्लू (आरंग), रायपुर (छत्तीसगढ़)