Tuesday, September 22, 2026
ग्रामीण विशेषछत्तीसगढ़

मूंद मुख दंडिन को चुगलों को चबाई खाई, खूंद डार दुष्टन को शत्रु संघारिका….शंकर शाह मंडावी : तेजस्वी गोंड राजा … ओजस्वी आदि कवि…

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज रणचंडी को ऐसे अग्निवाणी से जगाने वाले राजा शंकर शाह मंडावी एवं कुंवर रघुनाथ शाह मंडावी के सर्वोच्च बलिदान को याद किया गया… तहसील पाली, जिला कोरबा के गाँव लिमहा में जिसे गाँव वाले गर्व से लिमहा गढ़ कहते हैं. प्रचार प्रसार से दूर, बैनर पोस्टर पम्पलेट विहीन… गाँव के मुअखरा नेवता से जुटे ग्रामीण आदिवासी जन समुदाय… पारम्परिक सवांगा – परिधान में सजे धजे चेलिक – मुटीयारी, झांझ मंजीरा, मांदर के साथ सियान – सामरथ लोग. जुटते हैं ऐसे जतन से जैसे उनके अपने इष्टदेव ने बुलाया है. जहाँ न राजनेताओं से अनुदान राशि माँगने की लालसा होती है, न उनके साथ फोटो खिचाकर अपनी नजदीकी दिखाने की स्वार्थ. जो कुछ भी होता है वह है अपने पुरखों के प्रति सम्मान और श्रद्धा का भाव. ऐसे पवित्र सामाजिक कार्य को गोंडवाना समग्र क्रान्ति आन्दोलन के प्रणेता दादा हीरासिंह मरकाम के विश्वस्त सिपहसलार श्री एम् सिंह खुशरो जी विगत कई वर्षों से निरंतर करते आ रहे हैं. विगत तीन वर्षों से ऐसे आयोजन के साक्षी रहने का मुझे सौभाग्य प्राप्त है.
इस वर्ष भी राजा संग्राम शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह मंडावी के सन 1857 के क्रन्तिकारी बलिदान को गोंडवाना किला परिसर लिम्हागढ़ में श्री एम् सिंह खुशरो जी के नेतृत्व फिर से याद किया गया. परिसर में स्थापित बुढादेव के सुमरनी के साथ रानी दुर्गावती, वीर नारायण सिंह, भगवन बिरसा मुंडा, दादा हीरासिंह मरकाम, रामेश्वर खुशरो और मंगतीन खुशरो के आदमकद मूर्तियों की पूजा कर मंचीय कार्यक्रम प्रारंभ किया गया.
बालिकाओं के लोकनृत्यों ने सभी दर्शको का मन मोह लिया. सम्मानित अतिथियों एवं सामाजिक जनो ने अपने उद्बोधन में गोंडवाना के गौरवपूर्ण इतिहास को दुर्गावती से शंकर शाह रघुनाथ शाह तक सिलसिलेवार आम छत्तीसगढ़ी बोली में समझाया. जिसमें प्रमुख रूप से एम सिंह खुशरो, रामनाथ पुलस्त नवापारा, समय सिंह गोंड बिलासपुर , हीरालाल कुशरो बनिया डीह, अशोक रजवाड़े केरा .कछार , कमलेश कश्यप परमेश्वरी श्याम, रामायण कुंवर कोर्राम प्रमुख रहे. उपस्थित गणमान्य अतिथियों और सगाजनो में सर्व श्री रमाशंकर सिंह तंवर नाकापारा, कृष्णकुमार मरकाम हरदीपारा, नारायण सिंह उइके बकसाही, संतोष सिंह मरावी, कीर्तिकुमार सरोटीया, रामाधार श्याम, मधुर सिंह खुशरो मुरली राजकुमारी जगत, फूलकुमारी जगत, फिरतीन बाई, सुमरीत बाई, प्रेमलता, बिसहीन ,जानकी बाई, लछमिन बाई, निर्मला बाई, महामति, रत्नाबाई, चमेली, शिव कुमारी, सुषमा नेटी, उर्मिला कुशरो,बिदेश्वरी खुशरो, संतोषी सरोटिया, सुखमती सरोटिया, वेद्बाई टेकाम, रामाधार श्याम, हेमलता मरावी, राम कुमारी,कुमारी प्रियंका टेकाम, पूर्णिमा कोर्राम शिव कुमारी श्याम, चंपा रानी पोरते, संतोषी सोरठे, संगीता सोरठे
मुख्य अभ्यागत रमेश चन्द्र श्याम ने कहा कि जिनके राज में सोने के सिक्के चलते थे उनके वंशज आज मनरेगा मजदुर हो गए हैं. मुख्य कारण अशिक्षा और गरीबी है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही संपन्नता प्राप्त होगी.

छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा के सौजन्य से श्रीमती परमेश्वरी श्याम ने प्रतिभावान छात्र छात्राओं, हथकरघा महिला समिति तथा प्रसाद महिला समिति के सदस्यों को स्मृति चिन्ह और सुहाग सामग्री से सम्मनित किया.
मंच का गरिमापूर्ण सञ्चालन श्री फाग सिंह सरोटिया अध्यक्ष गोंडवाना किला परिसर ने किया. समस्त पारंपरिक पूजा नेंग परिसर के बईगा शत्रुहन सिंह मरकाम ने करवाया.

“मार अंगरेज रेज पर देई मात चंडी, बचे नहीं बैरी बाल बच्चे संहारिका” कुंवर रघुनाथ शाह

रमेश चन्द्र श्याम