तीन दिन का चक्का जाम, सैकड़ों ग्रामीणों का दबाव आया काम मिला लिखित आश्वासन
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
*आड़ेझर में पानी के लिए आर-पार की लड़ाई खत्म, 29 सितंबर को बोर खनन का भरोसा….*

*पूरे आंदोलन के बीच लगातार ग्रामीणों के साथ खड़े रहे जनपद सदस्य तुलेश्वर हिचामी…*
बालोद/डौंडी। पेयजल की समस्या को लेकर डौंडी ब्लॉक के ग्राम आड़ेझर में पिछले तीन दिनों से चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन आखिरकार लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। ग्रामीण बोइरडीह जलाशय से बीएसपी के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग को लेकर महामाया-दल्लीराजहरा मार्ग पर दिन-रात धरने पर बैठे थे। आंदोलन के कारण महामाया माइंस की ओर जाने वाले वाहनों का आवागमन भी तीन दिनों तक प्रभावित रहा।
ग्रामीणों का कहना था कि खनन क्षेत्र में होने के बावजूद गांव के लोगों को बुनियादी पेयजल सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पूर्व में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई चर्चाओं से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलने के बाद ग्रामीणों ने इस बार आंदोलन समाप्त नहीं करने का निर्णय लिया था।
*भारी पुलिस बल पहुंचा तो बढ़ा तनाव..*
सोमवार देर शाम एसडीएम डौंडी सुरेश साहू, तहसीलदार देवेंद्र नेताम सहित प्रशासनिक अधिकारी धरना स्थल पहुंचे। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया। अधिकारियों की ग्रामीणों से चर्चा चल ही रही थी कि कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया।
धरना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों की संख्या अपेक्षाकृत कम होने और बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी से ग्रामीणों में यह आशंका बनी कि कहीं आंदोलनकारियों को बलपूर्वक हटाने की कार्रवाई न की जाए। इसके बाद देखते ही देखते आड़ेझर गांव से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष धरना स्थल पहुंच गए।
ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक पानी की समस्या का समाधान नहीं होगा, वे धरना स्थल से नहीं हटेंगे। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि कार्रवाई करनी है तो केवल कुछ आंदोलनकारियों के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे गांव के लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
स्थिति को बिगड़ता देख प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद कर ग्रामीणों को शांत करने का प्रयास किया।
*लिखित आश्वासन के बाद टूटा गतिरोध….*
लंबी बातचीत के बाद एसडीएम डौंडी सुरेश साहू की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया कि 29 सितंबर 2026 को पीएचई विभाग के माध्यम से बोर खनन कराया जाएगा। इसके बाद बोर में पर्याप्त पानी मिलने पर जल जीवन मिशन के तहत निर्मित पानी की टंकी और गांव में बिछाई गई पाइपलाइन के माध्यम से पूरे गांव में पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
पंचनामा में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि नए बोर में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होता है तो बीएसपी की पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। उक्त बातों का लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने अपना तीन दिवसीय धरना और चक्का जाम समाप्त कर दिया। आंदोलन समाप्त होने के बाद प्रशासन ने भी राहत की सांस ली।
*आंदोलन के बीच दूसरी बार ग्रामीणों के साथ पहुंचे तुलेश्वर हिचामी….*
आड़ेझर के आंदोलन में जनपद सदस्य तुलेश्वर हिचामी की भूमिका भी चर्चा में रही। ग्रामीणों के समर्थन में वे दूसरी बार धरना स्थल पहुंचे और आंदोलन के दौरान लगातार ग्रामीणों की मांगों के समर्थन में खड़े नजर आए।
ग्रामीणों ने भी उनकी मौजूदगी और लगातार समर्थन के लिए उनकी प्रशंसा की। आंदोलन के दौरान प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संवाद कायम रखने में तुलेश्वर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
ग्रामीणों के बीच तुलेश्वर हिचामी की सक्रियता को क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर मुखर होकर आवाज उठाने वाले एक उभरते हुए जनप्रतिनिधि के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर खनन प्रभावित क्षेत्र में पेयजल, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं के मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन सकती है।
“जरूरत पड़ी तो पूरे जनपद और सर्व आदिवासी समाज के साथ लड़ेंगे सड़क की लड़ाई”….*
जनपद सदस्य तुलेश्वर हिचामी ने कहा कि आड़ेझर के ग्रामीणों ने अपनी समस्या के निराकरण के लिए जिस एकजुटता, परिश्रम और साहस का परिचय दिया है, वह काबिले तारीफ है। उन्होंने कहा कि आड़ेझर सहित डौंडी ब्लॉक के पूरे खनन प्रभावित क्षेत्र के लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में यदि बीएसपी प्रबंधन आनाकानी करता है, तो पूरे जनपद सहित सर्व आदिवासी समाज के साथ सड़क की लड़ाई लड़ी जाएगी।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र, प्रदेश और देश के विकास के लिए हम सभी हमेशा शासन-प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए तैयार हैं, लेकिन खदानों से खनिज संपदा का दोहन होने के बावजूद क्षेत्रवासियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़े, यह स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में जनहित के मुद्दों को लेकर पुरजोर तरीके से आवाज उठाई जाएगी।
*अब 29 सितंबर पर टिकी ग्रामीणों की नजर…*
तीन दिन तक चले आंदोलन के बाद फिलहाल ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त कर दिया है, लेकिन अब उनकी नजर प्रशासन द्वारा दिए गए लिखित आश्वासन के पालन पर है। 29 सितंबर को बोर खनन और उसके बाद जल जीवन मिशन की टंकी व पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था कितनी तेजी से होती है, यह आने वाला समय बताएगा।
फिलहाल तीन दिन तक सड़क पर डटे ग्रामीणों के आंदोलन के बाद लिखित आश्वासन मिलने से तत्काल गतिरोध समाप्त हो गया है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार आश्वासन कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांव के घरों तक पानी पहुंचेगा।

