Wednesday, May 20, 2026
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मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता–कोविड-19 के संबंध में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग

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राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय, सेंदरी की पहल
बिलासपुर 16 जुलाई 2020 ।राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय,सेंदरी द्वारा मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता कोविड-19 के संबंध में स्पर्श क्लिनिक के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लगभग 150 कैंडीडेट्स को प्रशिक्षित किया गया।
इनमें मेडीकल ऑफिसर, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक (आरएचओ), ग्रामीण चिकित्सा सहायक (आरएमए), एएनएम, और नर्सिंग स्टॉफ शामिल थे |
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में स्पीकर के रूप में राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय, सेंदरी के अधीक्षक डॉ. बी.आर. नंदा, मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. बी.आर. होतचंदानी और डॉ. मल्लिकार्जुन राव सगी साइकेट्रिक सोशल वर्कर प्रशांत पांडे का विशेष रूप से सहयोग रहा ।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की जानकारी देते हुए डॉ. बी.आर. नंदा बताया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा को कोविड-19 महामारी के दौरान और बाद के संकटों में दूसरों की मदद करने वालों का सहयोग कैसे किया जाएगा । इसके प्रमुख घटक क्या होंगे और मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करते समय अपनी देखभाल करने के तरीके को कैसे पहचान पाएंगे विषय पर प्रतिभागियों को जानकारी दी गई ।
डॉ. नंदा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान प्रतिभागियों से कहा मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता विधि के अनुसार अधिकतर लोग अप्रिय घटनाओ को सहजता से सह लेते है। लेकिन कुछ कमजोर समूह होते है जो किसी आपदा के पश्चात् आने वाली कठिनाइयों का सामना करने में असमर्थ होते है। इसको जहाँ आवश्यक हो, व्यावहारिक देखभाल और सहायता प्रदान करना।लोगों की बुनियादी जरूरतों और चिंताओं को दूर करने में मदद करना, लोगों को सूचना, सेवाओं और सामाजिक सहायता से जोड़ने में मदद करना, उन्हें सांत्वना देना और उन्हें शांत महसूस करने में मदद करना महत्त्वपूर्ण होता है । लोगों को और खुद को नुकसान से बचाना भी ज़रूरी होता है ।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा सब्सटेंस डिपेंडेंस-अल्कोहल या नशीली दवाइयों का आदी होने के बारे में भी बताया गया। व्यक्ति जीवन में समस्याएं खड़ी होने के बावजूद शराब पीना या नशा करना जारी रखता है। कुछ समय के बाद व्यक्ति को उतना ही प्रभाव प्राप्त करने के लिए पहले से अधिक शराब या नशीली दवा की जरूरत पड़ती है । जैसे-जैसे यह पराश्रय बढ़ता जाता है व्यक्ति परिवार और दोस्तों से दूर हो जाता जाता है, काम या स्कूल में कार्य निष्पादन गिरता जाता है और स्वास्थ्य खराब हो जाता है । ऐसा व्यक्ति यह महसूस नहीं कर पाता कि शराब या नशे की दवा उसके जीवन को कैसे प्रभावित कर रही है । व्यक्ति जब नशे का सेवन कम कर देता है या बंद कर देता है तो वह शारीरिक या भावनात्मक संताप अनुभव करता है इसे निवर्तन या अपनयन (विदड्रावल) कहा जाता है।

साथ ही विशेषज्ञों ने कमजोर समूहों की जरूरतों को पहचानें और बच्चे और बुजुर्गपर मानसिक तनाव को कम करने के लियें भी सुझाव दिये।पहले से मौजूद मानसिक बीमारियाँ, सीमित संसाधनों वाले लोग जो बेघर हैं या शरण मांग रहे हैं लोग,बौद्धिक विकलांगता,शारीरिक कमजोरी जैसे श्रवण या दृष्टि बाधा की समस्याअतिरिक्त आघात से लोगों को सुरक्षित रखेंलोगों को केवल सूचना के सम्मानित स्रोतों तक पहुँचने के लिए प्रोत्साहित करें, औरजानकारी के लिए अत्यधिक जोखिम के खिलाफ सलाह दें |