बाबू राव पुल्लीसुर सडमेक गोण्ड

आज 25 साल की उम्र में
बाबू राव पुल्लीसुर सडमेक जी को शहीद किया गया था, आपका जन्म ,मोहम पल्ली अहेरी ( गढ़ चिरोली महाराष्ट्र) मे 12 मार्च 1833 मे पिता पुल्लीसुर सडमेक जी और माता जुरयायाल के यहाँ हुआ था
3 साल की उम्र में आपको गोटुल मे डाला गया था जहाँ आपने , तीर कमान, मल्लयुद्ध, तलवार भाला मे प्रशिक्षित हुए पिर
प्राइमरी की शिक्षा लार्ड डलहौजी स्कूल में , मिडिल स्कूल आपने, ब्रिटिश इंग्लिश मीडियम स्कूल में
और आगे
गोण्डी राजाओ द्वारा संचालित स्थापित राजकुमार कालेज मे किया, जहां आपकी मुलाकात
गढ मंडला रियासत के राजकुमार रघुनाथ शाह मडावी के साथ हुआ आप दोनों ही – अंग्रेजों द्वारा गोन्डो के शोषण से बहुत दुखी और आक्रोशित थे
इसी बीच
धोखेबाजो ने शंकर शाह रघुनाथ शाह मडावी को अंग्रेजों से गिरफ्तार करवा दिया था और उन्हें जबलपुर में मौत की सजा हो गयी थी
आप इस घटना से बेहद दुखी और आक्रोशित थे
वापस गांव आ कर 500 गोण्डी युवाओं को जोड कर आपने छोटी सी सेना तैयार की थी
नाम था * जंगोम * इसका मतलब होता है क्रांति
और लगातार अंग्रेजों पर आक्रमण करने लगे थे, गोण्डी युवा आपसे जुडने लगे सेना बड़ी हो रही थी
आक्रमण से सैकड़ों अंग्रेजों को मौत के घाट उतार दिया तो दर्जनों गोण्डी युवा भी शहीद हुए
तभी
कुछ गांव की जमींदारी के लालच में बुआ लक्ष्मी बाई ने
बाबू राव पुल्लीसुर सडमेक जी को अंग्रेजों से गिरफ्तार करवा दिया था
फांसी की सजा 21 अक्तूबर 1858 तय हुई
कयी गोण्डी राजाओ की तरह बाबु राव पुल्लीसुर सडमेक जी ने भी ताड़वा जंगली फल खाया था इसमे शरीर वज्र की तरह हो जाता है, किसी वार का असर नहीं होता
चान्दा गढ़ ( महाराष्ट्र ) के रानी हिराइ आत्राम गोण्ड के महल मे पीपल के पेड़ मे फांसी दी गई थी
कहते हैं फांसी का फंदा चार बार टूट गया था , पाचवी बार फांसी होने देह त्यागने के बाद भी अंग्रेजों को उनकी मौत का विश्वास नहीं हुआ था और उन्होंने उनका शरीर खुलते चूने की भट्टी में डाला था
वह पीपल का पेड़ आज भी महल परिसर में है
आज गोण्डी समाज वहां पेन गोगो करेंगे
समाज सेवा के प्रति मेरे जुनून के प्रेरणा स्रोत 🙏🙏 बाबू राव पुल्लीसुर सडमेक जी भी है 🙏🙏 पुरखा पेन ता सेवा सेवा जोहार — कोयताड़ सुशीला धुर्वे
चित्र ÷
चान्दा गढ़ मे बाबू राव पुल्लीसुर सडमेक जी के बलिदान दिवस का है
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