वीर मेला राजाराव पठार महापंचायत 9 दिसंबर 2020 को पारित प्रस्ताव:-
वीर मेला समिति राजा राव पठार द्वारा 9 दिसंबर 2020, दिन- बुधवार को संध्या 6:00 बजे संरक्षक माननीय श्री अरविंद नेताम जी की अध्यक्षता में समाज के सम्मानीय पदाधिकारियों एवं समाज प्रमुखों की उपस्थिति में महापंचायत आहूत की गई। जिसमें निम्नानुसार निर्णय लेते हुए पूर्व वर्ष लिए गए निर्णय पर भी चर्चा किया गया जो निम्नानुसार है:-
वीर मेला राजाराव पठार महापंचायत 9 दिसंबर 2020 को पारित प्रस्ताव:-
01.पेसा कानून पर विस्तार से चर्चा कर महापंचायत द्वारा निर्णय लिया गया कि 10 जनवरी 2021 को रायपुर में बैठक आयोजित कर माननीय मंत्री महोदय को पेसा का ड्राफ्ट को पारित कराने हेतु सौंपा जावेगा।
- राष्ट्रीय जनगणना 2021 में आदिवासी धर्म कालम के मांग हेतु सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।
- राम वन गमन पथ रैली का विरोध पूरे प्रदेश स्तर पर किए जाने का निर्णय लेते हुए ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों एवं ग्राम वासियों को अवगत कराने राम वन गमन रैली को अपने अपने गांव में प्रवेश न दिया जावे और अपने ग्राम का मिट्टी ना ले जाने देने हेतु निर्णय लिया गया। साथ ही इसकी सूचना सभी जिला अध्यक्षों को सूचना पत्र के माध्यम से दिया जावे।
- पाटेश्वर धाम तूवे गोंदी ग्राम पंचायत तुमड़ीकसा विकासखंड डौंडीलोहारा जिला बालोद से प्राप्त आवेदन पर चर्चा करते हुए महापंचायत में निर्णय लिया गया कि प्रदेश स्तरीय सर्व आदिवासी समाज का अगला बैठक पाटेश्वर धाम तूवे गोंदी में आहूत किया जावे। साथ ही डीएफओ बालोद के द्वारा पाटेश्वर धाम में किए गए अवैध कब्जा के खिलाफ जो वैधानिक कार्य किया गया है उसकी महापंचायत द्वारा भूरी- भूरी प्रशंसा करते हुए उनके स्थानांतरण रोके जाने हेतु उच्चाधिकारियों को अनुरोध करने का निर्णय लिया गया।
- नक्सल पीड़ित परिवारों से प्राप्त आवेदन पर चर्चा करते हुए महापंचायत द्वारा तय किया गया कि नक्सल पीड़ितों के व्यवस्थापन करने हेतु भूमि प्रदान करने तथा नक्सल उत्पीड़न के निराकरण हेतु जगदलपुर में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापना प्रारंभ करने की मांग किया जावे। इस हेतु शासन से सर्व आदिवासी समाज द्वारा मांग पत्र दिए जाने का फैसला हुआ है।
- कुकरेल विकासखंड के संबंध में :- नगरी तहसील के कुकरेल को तहसील का दर्जा दिए जाने का प्रस्ताव शासन द्वारा है जिसे तहसील बनाने में समाज को कोई परेशानी नहीं है,लेकिन उसे विकासखंड ना बनाया जाए। जिससे आदिवासी परिवार को क्षति हो। क्योंकि यह क्षेत्र पांचवी अनुसूची के अंतर्गत है। इसमें उप तहसील कुकरेल में मगरलोड ब्लाक का हल्का नंबर विलुप्त कर धमतरी तहसील का हल्का नंबर एवं मगरलोड का ट्राइबल क्षेत्र सिंगपुर को जोड़ें जाने का अनुरोध महापंचायत छत्तीसगढ़ शासन से करेगी।
- नगरीय क्षेत्रों में जमीन पट्टा के नाम से राशि वसूली के विरोध में:-
छत्तीसगढ़ में पांचवी अनुसूची क्षेत्रों में संचालित नगरी प्रशासन, नगर पंचायत /नगर पालिका/ नगर निगम में शासकीय जमीन का पट्टा देने के नाम पर कई वर्षों से निवासरत आदिवासियों से शुल्क वसूली की जा रही है। जो कि असंवैधानिक है। चूंकि प्रदेश के 37 नगरीय निकाय क्षेत्रों में संविधान के अनुच्छेद 243 (य)(ग) के तहत असंवैधानिक रूप से संचालित है। ऐसे में उन स्थानों पर पट्टा के नाम पर शुल्क वसूली गैरकानूनी है ।महापंचायत द्वारा सर्वसम्मति से इस पर तत्काल समीक्षा करते हुए रोक लगाने की राज्य शासन से मांग करने का निर्णय लिया गया है। - आदिवासी महापंचायत में गत वर्ष 2019 में सर्वसम्मति से आदिवासी समाज के द्वारा 46 बिंदुओं पर लिए गए प्रस्ताव के संबंध में शासन को मांग पत्र दिया गया था ।जिस पर अभी तक शासन प्रशासन के द्वारा कोई सार्थक कार्यवाही नहीं किया गया है। जिससे समाज में असंतोष व्याप्त है तथा यह भी कहा गया है कि समाज के प्रतिनिधि मंडल के द्वारा इस वर्ष 2020 महापंचायत द्वारा लिए गए निर्णय एवं 2019 महापंचायत के 46 सूत्रीय मांग को शासन प्रशासन को पुनः अवगत कराया जावे। मांग नहीं सुनने पर सर्व आदिवासी समाज कठोर निर्णय लेकर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
- महापंचायत द्वारा गंभीर चिंता व्यक्त की गई कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर शासकीय सेवा करने वालों के खिलाफ कार्यवाही हेतु न्यायालय स्तर पर जो कार्रवाई हो रही है वह पर्याप्त नहीं है। इसके लिए समाज की ओर से इंटर विनर( थर्ड पार्टी) बनकर कोर्ट में सभी प्रकरणों पर अधिवक्ता नियुक्त करने और सरकार को सलाह देने के लिए जानकर व्यक्तियों को नियुक्त करने का निर्णय लिया गया।
- नक्सल समस्या का स्थाई समाधान हेतु शांति वार्ता के संबंध में चर्चा:-
बस्तर में नक्सल समस्या का स्थाई समाधान हेतु विस्तृत चर्चा कर माननीय श्री अरविंद नेताम जी पूर्व केंद्रीय मंत्री को महापंचायत द्वारा जिम्मेदारी सौंपी गई। यहां पंचायत ने सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए नक्सलीयो और सरकार के बीच चर्चा हेतु स्थाई समाधान के लिए माननीय नेताम जी के नेतृत्व में कमेटी गठित कर तत्काल पहल शुरू की जावे। जिससे नक्सली के नाम पर मरने वाले निर्दोष आदिवासियों को बचाकर देश की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। - लोगों की आस्था लगातार वीर मेला के प्रति बढ़ रहा है। इसलिए वीर मेला क्षेत्र राजाराव पठार के विकास हेतु मांग पत्र शासन प्रशासन को भेजा जावे।
12.शासन प्रशासन से वार्ता हेतु समिति गठित की गई जिसमें माननीय श्री अरविंद नेताम जी, माननीय श्री सोहन पोटाई जी, माननीय श्री नवल सिंह नेताम जी, माननीय श्री बीएस रावटे जी, माननीय श्री विनोद नागवंशी जी, माननीय श्री प्रकाश ठाकुर जी एवं प्रदेश के अन्य गणमान्य समाज प्रमुखों को भी सम्मिलित करने का निर्णय लिया गया।
वीर मेला राजाराव पठार महापंचायत 9 दिसंबर 2019 को पारित प्रस्ताव:-
1- छत्तीसगढ़ में पांचवी अनुसूची प्रकोष्ट का गठन किया जाये। जिसके माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री द्वारा विशेष रूप से पेसा कानून वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम तथा जनजाति उप योजना (TSP) की प्रत्येक माह में समीक्षा हो।
2- पांचवी अनुसूची क्षेत्र में नगरीय निकायों को जो कि संविधान के अनुछेद 243 (यग) के अंतर्गत असंवेधानिक है ,को मेसा कानून बनने तक तत्काल भंग किया जाये तथा ऐसे क्षेत्रों को ग्राम पंचायत में पुनः परिवर्तित कर पेसा कानून के अंतर्गत लाया जाये साथ ही ऐसे क्षेत्रों में गैर अनुसूचित वर्ग को हस्तांतरित सभी भूमि को अनुसूचित जनजाति वर्ग को वापस की जाये।
03 राज्य में काफी सारे अधिकारी जाति प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाए जाने के बाद भी पद पर बने हुए है। ऐसे लोगो को तत्काल सेवा से मुक्त करते हुए कानूनी कार्यवाही की जाये।
4- अनुसूचित क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति वर्ग की किसी भी भूमि को जिला के कलेक्टर अथवा अन्य कोई अधिकारी द्वारा गैर अनुसूचित वर्ग को हस्तांतरित की गयी है उसकी जांच करवाई जाये तथा ऐसी भूमि भू-राजस्व संहिता की धारा 170 (ख)(2-क) के अनुसार वापस की जाये। - ग्राम सभा को पांचवी अनुसूची क्षेत्रों में एक निगमित निकाय का दर्जा देते हुए स्वयं का बैंक खाता संचालित करने की व्यवस्था दी जाये।
- अनुसूचित क्षेत्रों में नगरी विकासखंड के जैसे मोहल्ला, मजरा, टोला, पारा स्तर पर ग्राम सभा का गठन किया जाए।
- अनुसूचित क्षेत्र में सभी गौण खनिज के विदोहन का अधिकार अनिवार्य रूप से ग्राम सभा अथवा ग्राम सभा की सहमति उपरांत अनसूचित जनजाति की ही सहकारी समिति को दिया जाये।
- सभी गौण वनोपज, जिसमे बांस भी शामिल है, का मालिकाना हक ग्राम सभा को दिया जाये जिसमे वन विभाग एवं लघु वनोपज सहकारी समिति का कोई भी हस्तक्षेप न हो।
- अनुसूचित क्षेत्र में, विशेष कर के नगरीय क्षेत्रों में, किसी भी तरह के ब्याज पर लेन-देन की प्रक्रिया को नियंत्रित किया जाये। अनुसूचित क्षेत्र में किसी भी तरह का ऋण ग्राम सभा की अनुमति के बाद ही दिया जाए।
- वन विभाग द्वारा अपने वन मंडल अनुसार जो कार्य योजना (वर्किंग प्लान) बनाया गया है जिसके अनुसार अगले 10 वर्ष में जिस भी गाँव के जंगल में कूप कटाई की जानी है उसके लिए वृक्षों का चिन्हांकन (मार्किंग) करने से पहले तथा वृक्षों की कटाई शुरू करने से पहले पेसा कानून और वन अधिकार मान्यता कानून के अनुसार ग्राम सभा का अनुमोदन लिया जावे।साथ ही ऐसी कूप कटाई से प्राप्त लकड़ी की नीलामी से होने वाली आय की राशि, जो अभी मात्र 20 प्रतिशत है, को पूरा 100 प्रतिशत ग्राम सभा को हस्तांतरित की जावे जो की वन अधिकार मान्यता कानून 2006 के नियम 4 (1)(f) केअंतर्गत गठित समिति के नियंत्रण में हो।
- सम्पूर्ण पांचवी अनुसूची क्षेत्र में वन अधिकार मान्यता अधिनियम 2006 के अंतर्गत सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (Community Forest Resource Rights) तथा सामुदायिक अधिकार (Community Rights) दिए जाये तथा उसके अनुसार राजस्व तथा वन विभाग के बंदोबस्त तथा निस्तार रिकॉर्ड दुरुस्त किये जाये।
- वन ग्राम को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर पूर्ण करवाई जाये।
- टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में जहाँ पर अनुसूचित जनजाति की बाहुल्यता है, जिसमे सीतानदी- उदंती, इन्द्रावती एवं भोरमदेव अभ्यारण्य क्षेत्र भी शामिल है, से गावों के विस्थापन पर पूर्णतः रोक लगाई जाये।साथ ही सीतानदी-उदंती बाघ अभ्यारण्य क्षेत्रों के 34 गाँव का विस्थापन निरस्त किया जाए।
- अनुसूचित क्षेत्रों से किसी भी अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति को विस्थापित करने से पहले ग्राम सभा से अनिवार्य रूप से अनुमति ली जावे एवं विकास कार्यो के लिए किसी को विस्थापित न किया जावे।
- सलवा जुडूम के समय बस्तर से विस्थापित लोग जो आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र तथा ओडिशा में निवासरत है उन्हें वापस लाने हेतु ठोस प्रयास किये जाए तथा इसके लिए स्थानीय आदिवासी व्यक्तियों की ही उच्च अधिकार प्राप्त समिति बनायी जाए जो इस हेतु कार्य को समन्वित करे।
- वन अधिकार मान्यता अधिनियम 2006 के अंतर्गत मान्य की गयी कोई भी व्यक्तिगत वन अधिकार की भूमि अगर शासन द्वारा अधिग्रहित की जाती है तो उसका राजस्व भूमि की तरह ही अनिवार्यतः उचित मुआवजा दिए जाने हेतु प्रावधान किया जाए।
- राज्य शासन द्वारा आदिवासी व्यक्तियों के खिलाफ चल रहे न्यायिक प्रकरणों की जांच के लिए बनायीं गयी माननीय पटनायक समिति में अनुसूचित जनजाति के समाजिक प्रमुखों को भी शामिल किया जाए।
- National Mineral Development Corporation (NMDC) द्वारा संचालित बैलाडीला की खदान से लौह अयस्क का परिवहन सिर्फ रेल मार्ग से किया जाए तथा ट्रक तथा अन्य मार्ग से परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाए।
- बैलाडीला लौह अयस्क के निक्षेप क्रमांक 13 एवं अन्य निक्षेपों का संचालन सीधे तौर परNMDC तथा CMDC द्वारा किया जाये। Mine-Developer-cum-Operator (MDO) से कोई भी कार्य किसी भी निक्षेप में नहीं करवाया जाये।
- NMDC का मुख्यालय हैदराबाद से बस्तर में स्थानांतरित किया जाए।
- अनुसूचित क्षेत्र में सभी तरह के बड़े खनिज, जैसे कोयला तथा लौह अयस्क, के खनन को किसी भी तरह से निजी हाथों में दिए जाने पर पूर्णतः रोक लगायी जावे। अनुसूचित क्षेत्र में सभी खनिज खदान सिर्फ शासकीय निकायों अथवा अनुसूचित जनजाति द्वारा संचालित निकायों के माध्यम से किये जाए. नगरनार इस्पात सयंत्र का निजीकरण किसी भी हाल में न हो।
- बड़ी खनन परियोजनाओ जैसे लौह अयस्क, कोयला, इत्यादि की बिक्री से प्राप्त होने वाले मुनाफे की राशि, भूरिया समिति की अनुशंसा अनुसार 26 प्रतिशत निवेशकर्ताओं, 50 प्रतिशत ग्राम सभा एवं 24 प्रतिशत परियोजना से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित व्यक्ति कोसीधे हस्तांतरित किये जाए।
- अनुसूचित क्षेत्रों में कोई भी परियोजना, जिसमे बाँध और खनन परियोजना शामिल है,को शुरू करने से पहले उससे प्रभावित होने वाली प्रत्येक ग्राम सभा से सहमति ली जाएतथा कोई भी नयी परियोजना तभी शुरू की जावे जब पूर्व में संचालित परियोजना सेलाभ ले पाना संभव नहीं हो।उदहारण हेतु रावघाट परियोजना से खनन शुरू करने से पहले बैलाडीला की खदान से भिलाई इस्पात सयंत्र को आपूर्ति सुनिश्चित किया जाए।
- अनुसूचित जनजाति, विशेष कर विशेष पिछड़ी जनजाति समूह (PVTG), के बैकलॉग के पदों पर भर्ती जल्द से जल्द पूर्ण की जावे।
- राज्य के आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग में सभी पद अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति तथा अन्य पिछडा वर्ग के व्यक्तियों के लिए ही आरक्षित रखे जाये।
- अबूझमाड़ में पूर्व की तरह इनर लाइन परमिट लागू किया जाये तथा बाहरी व्यक्तियों के वहां पर प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए संविधान सम्मत कानून बनाया जाये।
- राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में बसाये गए बांग्लादेशी शरणार्थियों को गैर अनुसूचित क्षेत्रों में बसाया जाये तथा अवैध रूप से आये घुसपैठियों को चिन्हांकित कर उन्हें उनके मूल देश वापस भेजा जाये तथा उनके कब्जे की जमीन को अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को वापस सौंपा जाए।
- राज्य के सुकमा तथा बीजापुर जिला को प्रभावित करने वाले पोलावरम बाँध की ऊँचाई सीमित रखी जाए जिससे सुकमा तथा बीजापुर जिले का कोई भी गाँव इसके डूबान क्षेत्र में न आये।
- अनसूचित क्षेत्रों के जनपद तथा जिला पंचायत में ऐसे अनुसूचित जनजाति वर्ग के सदस्यों का नामांकन किया जाए जिनका उस स्तर पर कोई प्रतिनिधित्व न हो। इस हेतु प्रक्रिया बना कर अधिसूचित किया जाए।
- राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में कार्यरत सभी स्वयं सेवी संस्थाओं (NGO) की समीक्षा की जावे तथा फर्जी कार्य करने वाले संस्थाओं का पंजीकरण ग्राम सभा की अनुशंसा से रद्द किया जावे।
- जशपुर, सरगुजा, सूरजपुर तथा बलरामपुर से महिलाओं की तस्करी रोकने हेतु ठोस कदम उठाये जाए तथा गाँव के किसी भी व्यक्ति को किसी भी कार्य के लिए गाँव से बाहर ले जाने के पूर्व ग्राम सभा की अनुमति लेना अनिवार्य की जावे।
- आन्ध्र प्रदेश की तरह अनुसूचित क्षेत्रों में सभी शासकीय पद सिर्फ अनुसूचित क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के लिए आरक्षित किये जाए।
- अनुसूचित क्षेत्रों में विशेष रूप से प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में सिर्फ अनुसूचित जनजाति वर्ग के ही शिक्षक रखे जाए।
- राज्य में अनुसूचित जनजाति के लिए संचालित आश्रम शालाओ, एकलव्य विद्यालयों एवं कन्या शिक्षा परिसरों में आदिवासियों की स्थानीय बोली-भाषा, संस्कृति एवं परंपरा अनुसार शिक्षा प्रदान की जाए एवं उनकी गुणवत्ता नवोदय विद्यालय के समकक्ष करने हेतु समीक्षा की जाये।
- सभी खेल परिसरों में धनुर्विद्या को अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया जाए।
- बस्तर में शान्ति, सुशासन, प्रशासन और नियंत्रण के लिए दुर्गम और पर्वतीय अंचल के बच्चो को केशकाल के पास मारी क्षेत्र के चिन्हित स्थानों में सीबीएसई कोर्स से KG 1 से PG तक उनकी बोली-भाषा, संस्कृति के साथ आवासीय शिक्षा सुविधा सुलभ करवाई जाए।
- सभी कन्या आश्रम एवं छात्रावास में सुरक्षा एवं साप्ताहिक जांच हेतु पर्याप्त प्रबंध किये जाए जिससे झालियामारी जैसे भयावह कांड की पुनरावृति रोकी जा सके। इस हेतु कन्या आश्रम एवं छात्रावास में अनिवार्य रूप से अनुसूचित जनजाति के ही महिला अधीक्षक एवं होम गार्ड की नियुक्ति की जावे।
- एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (ITDP) के प्रशासक के रूप में IAS अधिकारीयों की नियुक्ति की जावे।
- आदिवासी इतिहास, कला एवं संस्कृति तथा विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति (PVTG) के बारे में जानकारी स्कूल के पाठ्य पुस्तक में सम्मिलित की जावे।
- जनजातिय सलाहकार परिषद् (TAC) की बैठक हर तीन माह में अनिवार्यतः आयोजित की जावे।
- छत्तीसगढ़ राज्य जनजाति, संस्कृति तथा भाषा आकादमी का गठन तत्काल किया जावे।
- बस्तर विश्वविद्यालय को केंद्रीय आदिम जनजाति विश्वविद्यालय का दर्जा दिलवाने हेतु पुनः प्रयास किया जाए।
- बस्तर जिले की अमरीत भतरा जनजाति को भतरा जनजाति की सूची में शामिल किया जाए।
- पांचवी अनुसूची क्षेत्र में ऐसे सभी गैर-अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों की जांच करवाई जाए जो अनुसूचित जनजाति की महिला को रख कर के अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ कर पद में आसीन है।ऐसे व्यक्तियों पर आत्याचार निवारण अधिनियम तथा धोखाधडी का मामला दर्ज कर एवं ऐसे व्यक्तियों के चुनाव की कार्यवाही संपन्न करवाने वाले अधिकारीयों पर दंडात्मक एवं सेवा से पृथक करने की कार्यवाही की जाए।

