छत्तीसगढ़ में पहली बार दिखा यूरेशियन क्रेन, ठंडे देश में रहने वाले प्रवासी पक्षियों को देखकर खिले अधिकारियों के चेहरे
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विश्व पटल पर बहुत रेयर हो चुके यूरेशियन क्रेन जो सारस क्रेन के दूर के रिश्तेदार माने जाते हैं। ये बीते कुछ दिनों से डोंगरगढ़ क्षेत्र में देखे जा रहे हैं।
गोपाल खेमुका@ राजनांदगांव/डोंगरगढ़. जैव विविधता से भरपूर छत्तीसगढ़ प्रदेश में अब इस आशय का प्रमाण मिल चुका है कि यहां भी विभिन्न देशों से पक्षी भ्रमण के लिए आते हैं। विश्व पटल पर बहुत रेयर हो चुके यूरेशियन क्रेन जो सारस क्रेन के दूर के रिश्तेदार माने जाते हैं। ये बीते कुछ दिनों से डोंगरगढ़ क्षेत्र में देखे जा रहे हैं। इन पक्षियों को पहली बार पक्षी प्रेमी डोंगरगढ़ एसडीएम अविनाश भोई व प्रतीक ठाकुर ने देखा और अपने कैमरे में कैद किया।
जैव विविधता का अवलोकन किया
एसडीएम ने वीडियो-फोटो बनाकर वन विभाग के उच्च अधिकारियों एवं पक्षी विशेषज्ञों को भेजा। पक्षी विशेषज्ञ रवि नायडू ने यूरेशियन क्रेन नामक पक्षी को प्रदेश में पहली बार देखे जाने की पुष्टि भी की है। वन विभाग के उच्च अधिकारी धर्मशील गणवीर आईएफएस तथा राजनांदगांव वन विभाग में कार्यरत प्रशिक्षु आईएएस कुमार ने मौके पर पहुंचकर क्षेत्र की जैव विविधता का अवलोकन भी किया है।
ठंडे देश में मिलते हैं यूरेशियन क्रेन
इन पक्षियों को देखकर उत्साहित हो उठे अधिकारियों ने बताया कि प्रवासी पक्षियों के लिए प्रदेश में वातावरण बहुत अच्छा है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ क्षेत्र में पहली बार यूरेशियन क्रेन का झुंड दिखा है, जिसकी संख्या करीब 20 है। ये प्राय: रूस साइबेरिया एवं ठंडे प्रदेशों में रहते हैं एवं ठंड में भारत के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र खासकर राजस्थान व गुजरात में प्रवास करते हैं। यह पक्षी ठंड चालू होने के समय प्रवास में आते हैं और गर्मी बढ़ते ही वापस अपने देश लौट जाते हैं।
ई-वल्र्ड फाइल में किया जाएगा लोड
प्रदेश के अलावा सारस क्रेन जो विदेश महाराष्ट्र के गोंदिया के आसपास बहुतायत में देखे जाते हैं। जब भी ये दिखते हैं, तो पक्षी विभाग तथा वन विभाग उनकी सुरक्षा के तत्काल इंतजाम करता है। प्रदेश में इनका दिखना बड़े जलवायु परिवर्तन का संकेत है। यूरेशियन क्रेन मूलत: रशिया में देखे जाते हैं, किंतु इनकी संख्या बहुत कम है। ये डोंगरगढ़ विकासखंड के एक जलाशय में दिखाई दिए हैं। जैव विविधता के कारण इन्हें लोग पहचान नहीं रहे। डोंगरगढ़ क्षेत्र में घने जंगल हैं। इसलिए इनके रहने के लिए पर्याप्त सुरक्षित स्थान भी है। अब वन विभाग पक्षी विशेषज्ञों को बुलाने की योजना बना रहा है तथा इन रेयर पक्षियों को ई-वल्र्ड फाइल में भी लोड किया जाएगा। यह प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
