सावधान आदिवासीओ सावधान सजग हो एकता लाओ राजनीति से ऊपर उठकर जागरूकता अभियान चलाओ. आर.के.कुजांम प्रांता महासचिव
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज़ आदिवासी बहन बेटियों पर अत्याचार बंद हो
हमारे समाज समुदाय की बिखराव और अनेक संगठनों समूहों के होते हुए भी आज आदिवासी बहन बेटियों के साथ आए दिन ऐसा व्यवहार शर्मशार करने वाला है।
अन्य जाति समुदाय का होता तो आज इस देश में आग लग जाता पर इतने संगठन होते हुए भी खून में उबाल नहीं आ रहा युवाओ , युवतियों में बड़ी दिक्कत है।
इस देश के अंतर्गत कहीं भी हो या विदेशों में भी अपने समाज के लिए आग के शोले उगलना चाहिए पर कुछ नहीं।
हर प्रदेश से चाहे कोई भी आदिवासी संगठन हो सबको एक साथ विरोध होना चाहिए। महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री के नाम हर गांव जिला प्रदेश से ज्ञापन और संबंधित लोगों को फांसी के लिए ज्ञापन जाना चाहिए और ये त्वरित होना चाहिए।पर हम देखते रहते हैं।
आदिवासियों में शासन प्रशासन को हिलाने की ताकत है।पर अन्य संगठनो की जकड़न समाज को उठने नहीं दे रहा है। राजनीति समर्थित कुछ लोग अन्य संघ संगठनों की कब तक गुलामी करेंगे, समझ से परे है।
कुछ राजनीति की आड़ में अपने को छुपा लेते हैं,कुछ अन्य संगठनो में जुड़े और समर्थक होने के कारण अपने को छुपा लेते हैं।कैसी विडम्बना है। आखिर समाज समाज है समाज की बहन बेटी अपने ही है।तो शांत क्यों और कैसे ?
जागो और ईंट से ईंट बजाने तैयार रहो,ऐसो पर तत्काल कार्रवाई होना चाहिए बिना छान बीन बीच चौराहे पर फांसी की सजा दिया जाना चाहिए।पर शासन प्रशासन चाहे मणिपुर की हो या कहीं की सब शासन प्रशासन को ताकते हैं जबकि शासन प्रशासन में बैठे लोग बचाव पक्ष में रहते हैं।
ऐसे घटनाओं पर संबंधितो के परिवारो के साथ भी ऐसा हो।जो जैसा करता है वैसा ही व्यवहार जब तक आदिवासी नहीं करेंगे जुल्म कर्ता का हौसला बढ़ता ही जायेगा।
इसीलिए चाहे ऐसे लोग किसी के भी संरक्षण में रहे कोई भी राज्य रहे चाहे बस्तर ही क्यों न हो अब सीधा बलात्कारियों, अपमान करने वालों को नष्ट करने की मन ठानो।कब तक हाथ जोड़ गुलामी करोगे।
हमारा समाज युगों से संघर्षरत है।पर सफलता आखिर क्यों नहीं मिलती आखिर दबा दिया क्यों जाता है कारण अन्य धर्मों, संगठनो , राजनीति पार्टीयो में होने के कारण पर बाकी युवा युवतियों क्या करते हैं।
यही अन्य समाज पर होता मिडिया और दिल्ली तत्काल हिल जाता पर आदिवासियों के लिए किसी के कान में जूं तक नहीं रेंग रहा। कहीं पेशाब कांड,तो कहीं टायलेट कांड ,तो कहीं जंगल कांड ये सब क्या है,इन सबके बावजूद इस देश का कानून आदिवासी नेता मंत्री मौन क्यों रहते हैं। आखिर ऐसे दोषियों का संरक्षण क्यों?
उलगुलान उलगुलान उलगुलान संघर्ष का ऐलान हो। दोषियों पर तत्काल फांसी हो चाहे किसी भी राज्य में ऐसी घटनाएं हो। कानून बने , बलात्कारियों, अपराधियों की सजा केवल मौत हो चाहे कोई भी हो। शासन प्रशासन द्वारा नियम बनाया जाना चाहिए कोर्ट द्वारा नियम बनाया जाना चाहिए।
अन्य संगठनों की तुलना इसलिए किया जाता है कि अन्य जाति धर्म वालो के बहन बेटियों के साथ ऐसी घटनाएं होती है तो हर मिडिया में छा जाता है, अखबारों में छा जाता है।पर आए दिन आदिवासी बेटियों पर चाहे मप्र हो छत्तीसगढ़ हो या अन्य प्रांतों में आवाज तक नहीं उठाया जाता। आवाज उठ भी जाता है तो दबंग नेताओं और प्रशासनिक अधिकारीयों द्वारा दबा दिया जाता है।
अब ये सब इस देश के युवा युवतियों को सोचना है। कैसे भेदिया नीति इस देश में चल रहा है।जब सबके साथ सबका विकास कि बात, समानता की बात होती है तो भेद भाव क्यों और ऐसे बातों के लिए महिला सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाया जाना चाहिए। बलात्कारियों को सीधा फांसी होना चाहिए।

