भ्रूण हत्या से काली कमाई करने वाले स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी पर कार्यवाही न करने पर ग्रामीण नाराज
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
मिली जानकारी अनुसार रेमावंड ग्राम वासियों द्वारा उनके ग्राम के उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ स्वास्थ सुपरवाइजर रैतूराम कश्यप के विरुद्ध कई वर्षों से विभागीय एवं जनप्रतिनिधियों से शिकायत करते आ रहे थे कि रैतूराम कश्यप शासकीय समय पर भी प्राइवेट इलाज करता है एवं गर्भपात करता है जिसके एवज में वह मोटी कमाई करता है ।
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में रैतूराम कश्यप के ऊपर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कार्रवाई की गई थीं, पर पूर्व शासन काल में जनप्रतिनिधियों से संपर्क में का कारण वह पुनः रेमावंड में कार्य करने लगा । ग्राम वासियों से इलाज के बदले पैसा का मांग करने लगा। शासन बदलने के पश्चात ग्रामीणों ने लिखित विभागीय एवं प्रशासन को शिकायत पत्र जारी किया था , जिससे रैतूराम कश्यप ग्रामीण स्वास्थ्य सुपरवाइजर के शासकीय आवास पर प्रशासनिक अधिकारी , पुलिस अधिकारी एवं विभागीय अधिकारी कर्मचारी कार्यवाही हेतु उपस्थित रहें ।
ग्रामीणों ने बताया कि रैतूराम कश्यप अपने आपको नारायणपुर के पूर्व विधायक का अपने आपको करीबी बता कर अधिकतर मुख्यालय से भी नदारत रहता था। बेनूर अस्पताल में कई बार मौखिक शिकायत करने के बाद भी उन्हें कुछ लाभ नहीं मिला ।
जॉच जहां दल का हिस्सा रहे डॉक्टर केशव साहू ने बताया कि कश्यप ग्रामीण स्वास्थ्य सुपरवाइजर पर पूर्व में भी शिकायत पर करवाई किया जा चुका था एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्रवाई करते हुए लिखित पत्र जारी किया था कि अगर भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति की गई तो शासकीय सेवा से पृथक कर दिया जाएगा । जिससे प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश पर यह जांच किया जा रहा है । जांच में रैतूराम कश्यप प्राइवेट इलाज करते हुए पाया गया , जिसके एवज में वह मरीज से पैसा लेना पाया गया एवं ईलाज के बदले वसूले लाखों रूपये की लें देन की पंजी जब्त किया गया । उसके पास इंजेक्शन और अन्य ईलाज युक्त सामग्री भी था जो की बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट , एम टी पी एक्ट एवं नर्सिंग होम एक्ट का उल्लंघन है एवं शासकीय सेवा के साथ-साथ मरीजों से पैसा लेना सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का भी उल्लंघन था।
उक्त जांच SDM सर के निर्देशानुसार किया गया था एवं अग्रिम कार्यवाही हेतु जिला कलेक्टर को पत्राचार किया गया था। पर आज दिनांक तक कार्यवाही नहीं होने के कारण रेमावंड के ग्रामीणों द्वारा जिला कलेक्टर के पास पुनः शिकायत करने आए थे ।

