ग्रामीण विशेष

पंडोनगर पंडो समाज के मुखिया के असामयिक निधन पर परिजनों को सांत्वना देने पहुचे गोंडवाना महासभा के पदाधिकारी गण…

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

पंडो समाज के मुखिया मा. बनारसी पंडो छः मार्च को एक सड़क दुर्घटना में काल कवलित हो गए थे. 10 मार्च के पंडोनगर में आदिवासी सभा के आयोजन में उनकी अहम् भूमिका थी. जब हमें यह दुखद जानकारी मिली तो कार्यक्रम से पहले शोक संतप्त परिवार को संवेदना और सहानुभूति जताने सामाजिक जन उनके निवास पर पहुचे.
स्मृतिशेष बनारसी पंडो जी क्षेत्र के पंडो समाज के मुखिया थे. पैंसठ बसंत देखकर एक पुत्र और पांच पुत्रियों के नाती पोतों की खुशहल पारिवारिक बगिया छोड़ गए हैं. उनकी बहु बसंती पंडो अभी सरपंच चुनी गयी हैं.
यद्यपि शोक की घडी थी लेकिन कुतूहल वश पंडो समाज की देवी देवताओं की जानकारी पूछी तो उनके बड़े भाई ने पारिवारिक परम्पराओं के कुछ बाते साझा की. परिवार का गोत्र बलुख है. गउन्हा देवता को ग्राम देवता मानते हैं. हर साल नारियल सुपारी से सेत (श्वेत) पूजा करते हैं. पांचवे साल में खैरा बोकरा देते हैं. समलाई माता कुल देवी है. एक साल के आड़ में कारी पाठी देते हैं. पास के पिलखा पहाड़ में पिलखा पाठ देवता है हर तिसाला में पर्रा बोकरा देते हैं.
गाँव में सरकारी स्कुल है जहाँ आठवी कक्षा तक पढाई होती है. गाँव के कच्चे मकान जिसमे खपरे या एस्बेस्टस शीट के छप्पर थे … गाँव के हालत बयां कर रहे थे. इसे खुशहाली और बदहाली के बीच कुछ भी कह सकते हैं. यह क्षेत्र भटगांव विधान सभा (सामान्य) क्षेत्र में आता है. जहाँ से अभी श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े प्रतिनिधित्व करती हैं.

कार्यक्रम के संयोजक श्री तेरन सिंह कोर्राम जी ने पुष्पांजलि की व्यवस्था कर दी थी. दिवंगत आत्मा को पुष्पांजलि देकर भारी मन से हम सभा स्थल की और रवाना हुए.
जो हरहाल में हो खुशहाल… उसे ही आदिवासी कहते हैं… ये हमारी विवशता है… यही हमारी विशेषता है….

(रमेश चन्द्र श्याम)
कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष