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जय गुरुवाइन दाई नागपंचमी कबड्डी प्रतियोगिता, देव किरारी 2025 में मस्तुरी विजेता और लिमहा उपविजेता रहे

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 
नागपंचमी के शुभ अवसर पर ग्राम देव किरारी (अकलतरा) में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गुरवाइन दाई ठाना में नाग पूजा उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. गुरुवाइन दाई पर पर आसपास के गाँवो के सर्व समाज के लोग अटूट आस्था रखते हैं. इसका प्रमाण भी है कि किरारी गाँव में सर्प काटने से किसी की मृत्यु नहीं होती है. इसीलिए गुरुवाइन दाई को नाग पंचमी के दिन दूध लाई और नारियल भेंट किया जाता है. नाग पंचमी के दिन गाँव में हल चलाना और मिटटी खोदना पुर्णतः वर्जित है. यह परंपरा गाँव में आदिकाल से चला आ रहा है. ठाना में झांपीनुमा दो चट्टान है जिसे सौरीन दाई (सपेरन) का समाधि माना जाता है. झांपीनुमा चटान के दरार में दूधनाग के दर्शन भी सौभाग्यवान को मिलता है.
आस्था और उत्साह के समागम ने आजकल मेले का रूप धारण कर लिया है. नागपंचमी के अवसर पर ग्राम देव किरारी में आयोजित कबड्डी प्रतियोगिता दूर दूर के गाँवों तक प्रसिद्ध है. इस वर्ष पचास से भी अधिक गावों की टीम ने नाम दिया था. लेकिन समयाभाव को देखते हुए 32 गाँव के टीमों को प्रतियोगित में प्रवेश दिया गया. दो ग्राउंड में साथ साथ मैच चलता रहा. रिमझिम बरसात और कीचड-कांदो के बावजूद भी दर्शक डटे रहे. जैसे जैसे खेल आगे बढ़ता गया, खिलाडियों और दर्शको दोनों का रोमांच निरंतर बढ़ता गया. अंत में फायनल मुकाबला मस्तुरी और लिमहा के बीच हुआ. जिसमे ग्राम मस्तुरी विजेता रहा. .
ज्ञात हो कि ग्राम देव किरारी छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रमेश चन्द्र श्याम का पैतृक गाँव है. जय गुरुवाइन दाई नाग पंचमी कबड्डी प्रतियोगिता 2025 के मुख्य अतिथि के रूप में अपने उम्र का हवाल देते हुए उन्होंने कई पुरानी यादें साझा की. उन्होंने बताया कि उन्हें उम्र के सत्तर वर्ष चल रहा है, यहाँ यह खेल तब से चल रहा है जब कबड्डी … कबड्डी…. कबड्डी नहीं … भका डू डू डू डू डू बोलते हुए खेलते थे. मध्य रेखा को छूना नहीं पार करना पड़ता था. मध्यरेखा छूने से “मारमुछ” हो जाता था. और फिर से रैड करना पड़ता था. उन्होंने नाग पंचमी के कबड्डी प्रतियोगिता को गाँव में निरंतरता और नवीनता प्रदान करनेवाले दो खेल पुरोधाओं को याद किया. एक बड़े परिवार के स्व. बडेदाऊ जी … गाँव के ही पटवारी शिवकुमार तिवारी जी के नौ पुत्रों और दो बहनों में सबसे बड़े रामनारायण तिवारी जी… वे “बड़ेदाऊ”के नाम से जाने जाते थे. दुसरे उनके सहयोगी अकलतरा के कैवर्त सर जो जिम्नास्टिक प्रशिक्षक थे और कबड्डी के विख्यात अम्पायर थे.
ग्राम मस्तुरी के विजेता टीम को विजेता शील्ड, नकद दस हजार रूपये अंगवस्त्र, उप विजेता टीम लिमहा को उपविजेता शील्ड, नकद साढ़े सात हजार रूपये, अंगवस्त्र तथा तीसरे स्थान पर रहे ग्राम साबर (भाटापारा) के टीम को सांत्वना पुरस्कार, नकद पांच हजार रूपये सहित अंग वस्त्र प्रदान किया गया. चौथे स्थान पर रहे परसाही नाला के टीम को भी प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गया.
सम्पूर्ण आयोजन का भार ग्राम पंचायत के सरपंच अशोक कश्यप, पञ्चगण और आयोजन समित के कार्यकर्ताओं ने संभाला.
स्थानीय पुलिस और स्वास्थ्य विभाग का विशेष सहयोग रहा.
रमेश चन्द्र श्याम