छत्तीसगढ़

आदिवासी संस्कृति और संघर्षो का मूर्त रूपांकन है नवा रायपुर स्थित जनजाति संग्रहालय और जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

छत्तीसगढ़ राज्य विभिन्न जनजातियों के जीवन शैली, विशिष्ट परम्पराओं, आस्थाओं, कला और विज्ञान से परिपूर्ण तो है ही, साथ में अपने अस्तित्व और जीविका के प्राकृतिक संसाधनों जल, जंगल और जमीन लिए संघर्षों के इतिहास से भी समृद्ध है. इसी तथ्य को टेक्नालाजी और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के माध्यम से दर्शाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने नवा रायपुर में जनजातीय संग्रहालय का निर्माण किया है. जिसका लोकार्पण राज्य स्थापना दिवस के उपक्षय में 1 नवम्बर 2025 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ने किया है.
ट्राइबल म्युजियम के दो प्रखंड हैं. एक में विभिन्न आदिवासी समुदाय के रहन सहन, औजार, आस्था, त्यौहार, संस्कृतिक परंपरा, विज्ञान और लोक नृत्य को मूर्त रूप दिया गया है. इसमें 14 गैलरी है. एक गैलरी में अगरिया आदिवासी लौह खनिज (अयस्क) को गलाकर कैसे लोहा बनाते थे उसका झांकी प्रदर्शित किया गया है. आदिवासी समुदाय को धातुकर्म विज्ञान का भी पारंपरिक ज्ञान था. बड़े बड़े इस्पात संयंत्र स्थापित होने से पूर्व अगरिया आदिवासी लौह अयस्क से लोहा प्राप्त कर कृषि, आखेट और आत्म रक्षा के लिए औजार बनाते थे.
संग्रहालय के दुसरे प्रखंड में छत्तीसगढ़ क्षेत्र के आदिवासी फ्रीडम फाइटर्स के इतिहास को प्रदर्शित किया गया है जिसमें अमर शहीद वीर नारायण सिंह के जीवनी और अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्षों को दिखाया गया है. भूमकाल विद्रोह और गुंडाध्रुर सहित बस्तर क्षेत्र के फ्रीडम फाइटर्स को संग्रहालय में स्थान दिया गया है.
टेक्नालाजी और AI का सुन्दर प्रयोग किया है. टच स्क्रीन के माध्यम से सम्बंधित विषय की आडियो विजूअल जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकते हैं. सेल्फी पाइंट भी हैं जिसका इच्छानुसार प्रयोग किया जा सकता है. शहीद वीर नारायण सिंह के जीवनी से सम्बंधित मूवी थियेटर है जहा लगातार फिल्म चलता रहत है. दंतेश्वरी माई की मंदिर भी है जिसके घंटा बजाने पर दंतेश्वरी माई वर्चुअल प्रकट होती है. AI के माध्यम से आपका आदिवासी वेशभूषा में तुरंत फोटो मिल जाता है. एक सेल्फी पाइंट है जहाँ एक कुर्सी रखी गई है. जिसके बगल में खड़े होने पर प्रधान मंत्री वर्चुअल प्रकट होते हैं और सेल्फी प्राप्त हो जाता है.
ध्यानपूर्वक दर्शन के लिए पुरे दिन भर का समय लग जाता है. विद्यार्थियों को संग्रहालय का अवश्य भ्रमण दर्शन करना चाहिए.
रमेश चन्द्र श्याम