ग्रामीण विशेष

गोंडवाना गोंड महासभा ग्राम इकाई खटोला (अकलतरा) के अध्यक्ष महेश राम नेताम नहीं रहे… श्रद्धान्जलि देने पहुंचे वरिष्ठ सामाजिक सियान.

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

श्री महेश राम नेताम निवासी ग्राम खटोला (अकलतरा) १० जुलाई को पञ्च महाभूत में लीन हो गए थे. उनका दसकर्म उनके गृह ग्राम खटोला में १९ जुलाई को संपन्न हुआ. ज्ञात हो कि गोंडवाना समाज व्यवस्था के तहत ग्राम खटोला खरौद राज परसाही नाला प्रधान केंद्र के उपकेन्द्र परसाही के आश्रित ग्राम है. महेष राम नेताम ग्राम खटोला के गोंड समाज के अध्यक्ष थे.
ग्राम खटोला अकलतरा – बलौदा रोड पर अकलतरा से एक डेढ़ कि. मी. की दुरी पर उत्तर दिशा में स्थित गोंडवाना ग्राम है. गोंड के साथ कँवर समाज के लोग “दांत काटी रोटी” का सम्बन्ध निभाते आ रहे हैं. खटोला में प्राचीन गढ़ है जो ग्राम कोटगढ़ और खटोला के बीच में स्थित है. चारों दिशाओं में खाई (खइया) खोदकर पहाडी (पहरी) बनाया गया है. ऐसी मानव निर्मित गढ़ बाहरी आक्रमण विरुद्ध प्रतिरक्षात्मक व्यूह संरचना की हिस्सा होते थे. गढ़ के अन्दर एक पूरा गाँव या छावनी बस सकता है, लेकिन अभी सपाट मैदान है.
ग्राम खटोला के इतवारी नेताम एक सम्पन्न किसान थे और गाँव में उनका बड़ा नाम था. उनका अधिकाँश धनहा खेत गाँव के सोनबरसा खार में था . उन धान उगलने वाले उर्वरा भूमि के कारण ही खार का नाम सोनबरसा पडा होगा. वे तमूरा बजाकर अपने मधुर आवाज में मनमोहक भजन सुनाते नहीं गाते थे. ये उनका शौक था. वे घर में ही अपने हमउम्र एक दो साथियों तथा घर के बच्चों के बीच ही अपनी संगीत प्रेम का शौक पूरा करते थे. वर्षा ऋतू में उनका शौक चरम पर होता था. झमाझम बरसात के साथ उनका तमुरा और भजन ताल-कदमी करते थे. ज्यों ज्यों बरसात झमकता जाता था त्यों त्यों उनका स्वर-आरोह भी बढ़ता जाता था. तमूरा के बजनिया तार में बंधे घुंघरू के गुच्छे ऐसे ताल मिलाते थे कि किसी और वाद्य यंत्र के संगत की जरूरत ही नहीं पड़ती थी.
ऐसे यशोधनी एवं लोकसंगीत प्रेमी इतवारी नेताम के नाम का परचम आसपास के गाँवों तक लहराता था. पुराने लोग उन्हें बड़े सिदार तथा युवा जन भजनहा के नाम से जानते थे. बलौदा के पाण्डेय जी जिनकी पुरोहिती आसपास के गाँवों में थी वे प्रवास में भजनहा के घर ही ठहरते थे और अपना जेवन बनाते थे. पाण्डेय जी अधेड़ उम्र के गोरा रंग और दोहरी काठी शरीर के स्वामी थे. गोल चेहरा, चौड़े माथे पर बड़ा सा तिलक, सिर से बाल नदारद लेकिन पिछले हिस्से में कद्दू के डंठल के मूलाकर जितने भाग में उगी मुट्ठी भर धूसर बाल की चोटी की गाँठ उन्हें चाणक्य सा प्रारूप देते थे. लेकिन बड़े सिदार से उनकी चतुराई नहीं चलती थी.
बलौदा के सोनार अपनी गहनों की चलती फिरती दूकान भी भजनहा के घर ही लगाते थे. क्योंकि भजनहा के एकलौती लाडली भतीजी भूरी बाई… अपने पिता की इकलौती वारिस… उनके सबसे बड़े ग्राहक थी. गले में सोने की “कंठा” कमर में चार अंगुल चौड़ा चांदी का “कमरपट्टा”, पैर में चांदी का “कटहर” उनके भतीजी के प्रिय गहने थे जिसे वह कुछ दिनों के अंतराल में कपड़ों की तरह बदलती रहती थी.
खटोला के बड़े सिदार के गौरव गाथा ठाकुर भुवन भास्कर सिंह के प्रसंग के बिना अधुरा ही रह जाएगा… सो उन्हें भी जानिये. अकलतरा की ओर से खटोला ग्राम जाने पर बस्ती में प्रवेश करते ही दाहिनी ओर चार दिवारी से घिरा घने पेड़ों के बीच में शानदार कोठी है. इसे सामंती बोलचाल में “बड़े बखरी” बोलते हैं. बड़े बखरी ठाकुर भुवन भास्कर सिंह का निवास है इनके पूर्वज अकलतरा के लाल साहब ठाकुर इन्द्रजीत सिंह के भिराही हैं. ठाकुर भुवन भास्कर सिंह के छोटे भाई गाँव में ननकी बाबू के नाम से जाने जाते थे जो आगे चलकर शहरी संस्करण में “नक्की बाबू” हो गये.
अकलतरा का दशहरा इलाके भर में प्रसिद्ध था. उस दिन अकलतरा में लाल साहब के हवेली में उनके द्वारा शिकार किये गए शेरों की प्रदर्शनी होती थी. जिसको देखने के लिए दिनभर आसपास के गावों से लोगों का ताँता लगा रहता था. भुवन भास्कर सिंह के बड़े बखरी खटोला से दर्जनों बैल गाड़ियों में निकलने वाली दशहरा की झांकी आकर्षण का मुख्य केंद्र होता था. जिसमें रावण सहित रामायण के पात्रों की सजीव झांकी के साथ उन्नत कृषि के झांकियां भी होती थी. झांकियों के अकलतरा के रावन भांठा पहुंचने के उपरांत रात में रावण भांठा में लाल साहब के हाथों रावन के पुतला दहन के साथ दशहरा संपन्न होता था.
भुवन भास्कर सिंह और बड़े सिदार इतवारी नेताम उर्फ़ भजनहा के आपस में घनिष्ठ सम्बन्ध था. इस सम्बन्ध को मितनहा रूप प्रदान करने के लिए ठाकुर भुवन भास्कर सिंह के बेटी और बड़े सिदार इतवारी नेताम के भतीजी भूरी बाई को आपस में “गियाँ “ बदवाया गया था..
ऐसे बड़े सिदार इतवारी राम नेताम के दो बेटे बोलोराम और लालाराम नेताम थे. दिवंगत महेश राम नेताम बोलोराम के पुत्र थे. उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने परिजन, इष्ट मित्र सहित समाज के प्रतिष्ठित जन बड़ी संख्या में उपस्थित हुए थे. गोंडवाना गोंड महासभा खरौद राज परसाही नाला प्रधान केंद्र के अध्यक्ष इंदरमन प्रसाद मरकाम, उपाध्यक्ष छेदीलाल नेताम, बुधवार सिंह मरावी, भगवत प्रसाद जगत, विश्वनाथ नेताम कोषाध्यक्ष, प्रेम सागर मरकाम, समय सिंह गोंड़, राधेश्याम नेताम, कुवन सिंह मरावी, घनश्याम खुशरो, शिव चरण जगत जगदीश प्रसाद सिदार सहित कई गणमान्य सगा जन उपस्थित थे.फेकन सिंह मरावी और अजय जगत ने गोंडी रीति नेंग अनुसार कुंडा संस्कार संपन्न करवाया.
गोंडवाना गोंड महासभा खरौद राज परसाहीनाला प्रधान केंद्र के संरक्षक रमेश चन्द्र श्याम दशगात्र कार्य में विशेष रूप से उपस्थित थे. क्यों न हो ! बड़े सिदार इतवारी नेताम उर्फ़ भजनहा उनके नाना, बोलोराम मामा और दिवंगत महेश राम ममेरा भाई थे. भूरी बाई (गोरी होने के कारण घरेलु नाम) उर्फ़ बुद्धिवती उनकी माता जी हैं.
रमेश चन्द्र श्याम