ग्रामीण विशेषछत्तीसगढ़

सावन के पाबन महिना जेमा जोहिथन हरेली के तिहार। छत्तीसगढ़ के पहली तिहार जेला हरेली कहिथन,

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज हरियर हरेली छत्तीसगढ़ के पहली तिहार
नागर बईला, गैंती कुदारी,रापा रपली के पूजा करथे ,चीला,गुलगुल भजिया बनाके भावरूप म देथे नारियर तोड़के हुम धूप दे के घी नही त चाऊर पिसान के हाथा देथे महतारी मन।ये परंपरा हमर सियान पुरखा मन बरसों ल मनावत आवत हवयं ये ला संजो के रखे के आवश्यकता हवय।
आवव जानन छत्तीसगढ़ के पहिली तिहार
छत्तीसगढ़ ल धान के कटोरा कहिथे,खेती खार मन चारों डहर हरियर हरियर दिखथे,अईसे लगथे जनमना धरती दाई हरियर लुगरा पहिर के मुसकावत हे। माटी महतारी के रतन बेटा किसान के मन घलो अपन खेत खार ल देख के मन हरिया जथे।लहलहावत धान के फसल चिरई चिरगुन के सुघ्घर बोली, मेचका के टर्र टर्र के बोली झिंगुर के बोली सबों मिल के संगीत के निर्माण करथे जेला सुनत किसान के मन गदगद हो जथे।
हरेली बरस के पहली तिहार होय के खातिर गांव के बईगा बिमारी रोग राई के रोकथाम खातिर गांव बनाथे मेढ़ के मेढ़वईया,घाट के घटयारिन दाई ,भिलाल देव, ठाकुर देव शीतला महामाई ठाना म जाके गांव से सुखी समृद्धी बर अरजी विनती करथे। गांव के पौनी पसारी राऊत घरो घर नीम डारा खोंचथे,लोहार चौखट म खीला ठोकथे पाठ दाबथे।
गांव लोगन मन गौठान जाके अपन अपन मवेशी ल लोंदी (गहू़ं पिसान)खवाथे,खम्हार के पत्ता म नून , राऊत मन उपास रहिके जंगल ले माल मवेशी के रोग राई के रोकथाम खातिर दवा लाके देथे।
ये सब हमर पुरखा के चलाय संस्कृति रीति नीति अऊ परंपरा हरे।
लईका मन सुघ्घर बांस के गेंड़ी बनाके रचरच के अवाज के चलाथे।
अपन रीति नीति परंपरा संस्कृति अऊ ठाना,
अपन देवी अपन देवता अपन देव बाना।
प्रकृति के संरक्षण खातिर अपन खेत खलिहान म अधिक से अधिक पेड़ पौधा लगाना चाही,जेन हमला शुद्ध हवा पानी देथे संरक्षित कर एक पहचान बनाय जथे।
अईसे रूप ले ये तिहार ल गगन मगन ले मना जाना चाही।
🙏जय जोहार जय जोहार
हरेली हरियर तिहार 🙏
लेख – आर के कुंजाम प्रकृति
व्याख्याता
पंडित दीनदयाल उपाध्याय वार्ड कर्मचारी कालोनी भाटापारा जिला बलौदाबाजार भाटापारा छत्तीसगढ़