भादो अंधियारी अष्टमी तिथि को चिल्हीडार पूजा एवं बेटा जौतिया महाव्रत
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज चिल्हीडार पूजा बेटा जौतिया महाव्रत
भादो अंधियारी अष्टमी तिथि को चिल्हीडार पूजा एवं बेटा जौतिया महाव्रत प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति एवं छत्तीसगढ़ गोंडवाना संघ के संयुक्त तत्वावधान में परमश्रद्धेय गोंडवाना गुरुदेव एवं गुरु माता के सानिध्य एवं माता कलि कंकाली चिल्हो माता के आशीर्वाद से भोरमदेव के अंगना जिला कबीरधाम के कवर्धा नगर में धूमधाम से दिनांक 04/10/2026 दिन रविवार को प्रातः से पूर्ण रात्रिकालीन मनाया जाना है जहां छत्तीसगढ़ के अलावा मध्य प्रदेश उड़ीसा महाराष्ट्र से हजारों की संख्या में मात्राएं जई लेकर आती है जो एक आस्था और श्रद्धा के रूप में सात दिनों तक सेवा दिये रहते हैं।
यह महापर्व आदिवासी समाज आदिकाल से मनाते आ रहे हैं। जिसमें माताएं संतान प्राप्ति,तथा संतान और पारिवार के सुखी समृद्धि के लिए 24 घंटे का निर्जला व्रत धारण कर रात्रि में चिल्हीडार एक विशेष प्रकार का वृक्ष की डाल जिसमें माता कलि कंकाली का वास भादो अंधियारी अष्टमी तिथि को विशेष रहता है पूजा अर्चना कर लाया जाता है जिसमें माता कलि कंकाली तथा शंभू शेख का पूजा अर्चना कर नवमी तिथि प्रातः चिरचिटा दातून कर स्नान करके जौतिया जो रेशमी धागा से निर्मित रहता है,धारण कर वर्ष भर संतान तथा परिवार की सुखी समृद्धी हेतु अर्जी विनती करते हुए अरसा एक प्रकार छत्तीसगढ़ व्यंजन का पकवान और मुंगेशा एक प्रकार के फल का बीज से पारण करती है।यह व्रत भी प्रकृति पूजा से संबंधी है क्योंकि हमारा समाज प्रकृति पूजारी हमारे देव प्राकृतिक रूप से पेड़ पौधो में विराजमान रहते हैं। आदिवासियो को अपने संस्कृति रीति नीति परंपरा को समझने जानने और मानने की आवश्यकता है। प्रकृति ही सर्वोच्च शक्ति है।जो सृष्टि के समस्त प्राणियों का जन्म, जीवन और मृत्यु का कर्म के आधार पर संचालन करते हुए अंत तक साथ देता है।यही जीवन की पूर्णता है।
जब तक हम अपने समाज और समाजिक रीति नीति परंपरा संस्कृति को समझ नहीं पायेंगे संरक्षित नहीं कर सकते जान समझ नहीं पायेंगे।तब तक अपने आप को समझना मुश्किल है।
आर के कुंजाम
गोंडी धर्म संस्कृति संस्कृति संरक्षण समिति छत्तीसगढ़

