बादल महल जूना शहर के शक्ति स्थल एवं महामाई मंदिर रतनपुर के मध्य शक्ति संयोजन… 15 अक्तूबर
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
गोंड समाज के प्रत्येक परिवार में अपना निजी देवालय होता है. जहाँ पूर्वजों द्वारा स्थापित शक्ति, शस्त्र, और पाट पीढ़ा विद्यमान होता है.उस देवालय में प्रति दिन पूजा सेवा अर्जी के साथ दिया जलाया जाता है. परिवार के परम्परानुसार विशेष संकल्प अथवा निश्चित समय के अन्तराल में जोत जवांरा और जीव सेवा भी अर्पित किया जाता है.
इसके अतिरिक्त गाँव में एक सार्वजानिक देवालय / कुटीया (अब पक्का मंदिर) भी होता है जहाँ ग्राम देवता ठाकुर देवता, महमाई दाई ठकुराइन दाई आदि शक्ति विराजित होती हैं. जहाँ गाँव भर के लोग सामूहिक और सार्वजनिक पूजा सेवा अर्जी ग्राम बईगा के माध्यम से करते है.
वैसे ही जुना शहर बादल महल की शक्ति स्थल गोंड़ राजवंश का राज देवालय है. जहाँ राजपरिवार शक्ति साधना करते थे. महामाया मंदिर प्रजा जनो के लिए सार्वजनिक पूजा स्थल है.
सम्पूर्ण ब्रम्हांड एक नैसर्गिक नियम के अनुशासन का पालन करते है. सौर मंडल के समस्त खगोलीय पिंड निश्चित लय, गति, पथ और निश्चित उर्जा उत्सर्जित करते हैं. जिसे सजीव निर्जीव पिंड / प्रक्रिया ग्रह नक्षत्र, पर्वत नदी सागर प्राणी वनस्पति दिन रत मौसम आदि का निश्चित क्रम / अस्तित्व सुरक्षित होता है. इसके तनिक भी उलंघन / विचलन से सर्वनाश संभव है. मुझे बादल महल के सेवा अर्जी में शामिल होने का गौरव पूर्ण अवसर प्राप्त है, जिसमें प्रथम सेवा अर्जी ब्रम्हांड की खगोलीय पिंड को अर्पित किया जाता है.
बादल महल के शक्ति साधना में प्रकृतिधर्मी आदिवंशीय गोंडी नेंग, नीति, नियम और निषेध (परहेज) जैसे जातक शूतक, मृतक शूतक, मासिक धर्म शूतक, फुलपरी शूतक, नशा निषेध आदि का कठोरता पूर्वक पालन किया जाता है. जीव सेवा सहित समस्त पारंपरिक नेंग का पालन किया जाता है. इसलिए यहाँ शक्ति अब भी जागृत है.
महमाई मंदिर रतनपुर में जिस समाज के लोग पुजारी बने हैं वे उपरोक्त गोंडी नेंग नियम और निषेध का पालन नहीं करते हैं. यह गोंड समाज के लिए अपमान और तिरस्कार विषय है.
गोंडवाना गौरव के स्वप्नद्रष्टा दादा हीरासिंह मरकाम ने ऐसी स्थिति को वर्षों पहले भांप लिया था. उन्होने बादल महल के शक्ति साधना में आम जन को जोड़ने का प्रयास किया था. कुछ वर्षों तक गोंडवाना समग्र क्रांति के कार्यकर्ताओं के सहयोग से बादल महल महमाई मंदिर के बीच शक्ति संयोजन अनुष्ठान होता रहा. लेकिन अपरिहार्य कारणों से कालांतर में गाँव के लोगों का उत्साह कम हो गया लेकिन अनुष्ठान सतत जारी रहा.
उस क्षीण शक्ति को उर्जित करने के लिए देवहार गढ़ पुजारी संगठन के मुख्य संस्थापक संरक्षक गुरुदेव ऋषिराज और बादल महल रतनपुर इकाई के साधकों और सेवादारों के देखरेख में स्थानीय लोग फिर सक्रीय हो रहे हैं.
15 अक्तूबर को गोंडी नेंग नियम और निषेध का पालन करते हुए बादल महल शक्ति स्थल में शक्ति साधना होगी और महमाई दाई मंदिर तक उसका शक्ति संधारण होगा. जिसमे सभी समाज के साधक गण नियम का पालन करते हुए शामिल हो सकते हैं. ध्यान रहे यह राजनेताओं के देखा देखी की जानेवाली चुनरी चढावा यात्रा, जत्था, रैली नहीं है. सदाचरण और सत्यनिष्ठ के साथ महमाई दाई पर आस्था के साथ उनकी शक्ति संधारण एवं संयोजन का अनुष्ठान है. आइये गोंडवाना गौरव के लिए संकल्पित और सहभागी बने.
रमेशचंद्र श्याम
सेवादार
बादल महल, जुना शहर, रतनपुर


