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राजनांदगांव जिले के मोहला-मानपुर क्षेत्र में सक्रिय नक्सली दंपति ने आज राजनांदगांव पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है

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जिवराखन लाल उसारे रायपुर राजनंदगांव जिले के नक्सल प्रभावित मोहला मानपुर क्षेत्र में सक्रिय होकर काम कर रहे नक्सली दंपत्ति ने आज नक्सली संगठन के भीतर कथनी और करनी में फर्क को महसूस करते हुए शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया है। नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस के बढ़ते दबाव की वजह से इन नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। 35 वर्षीय आत्मसमर्पित नक्सली गैंदसिंह कवाची कांकेर जिले के भुरकेे गांव का निवासी है। वर्ष 2006 में गैंद सिंह नक्सली संगठन में शामिल हुआ था, उसकी सक्रियता को देखते हुए वर्ष 2014 में उसे आंैधी एलओएस का डिप्टी कमांडर बनाया गया। वहीं वर्ष 2015 में मोहला एलओएस कमांडर की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2019 से अब तक गैंदसिंह मोहला-औंधी एरिया कमेटी के सचिव के पद पर कार्य कर रहा था। शासन के द्वारा गैंद सिंह पर 8 लाख रूपये का इनाम भी घोषित था। आत्मा समर्पित नक्सली गैंदसिंह ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ पुलिस के बढ़ते दबाव और शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर वह मुख्यधारा में लौटा है। आत्मा समर्पित नक्सली ने कहा कि कुछ और नक्सली हैं जो अब संगठन छोड़कर वापस आना चाहते हैं।

राजनांदगांव के मोहला निवासी 22 वर्षीय आत्मसमर्पित महिला नक्सली रमशिला धुर्वे वर्ष 2010 में नक्सलियों के मोहला एलओएस में शामिल हुई थी। वर्ष 2011 में उसे जोनल मेडिकल टीम में शामिल किया गया। वर्ष 2019 में उसे मोहल्ला एलओएस में काम करने के लिए भेजा गया। आत्मा समर्पित महिला नक्सली रमिला धुर्वे पर 5 लाख का इनाम घोषित है। आत्मा समर्पित नक्सली ने कहा कि आंध्र प्रदेश के नक्सली नेता द्वारा छत्तीसगढ़ कैडर के नक्सलियों के साथ भेदभाव पूर्ण व्यवहार किया जाता है। वहीं छत्तीसगढ़ के नक्सली कैडर को निचले स्तर पर रखा जाता है, जिसे सिर्फ लड़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं महिलाओं का शारीरिक शोषण भी नक्सली संगठन के भीतर हो रहा है। आत्मसमर्पित नक्सली रमशिला ने कहा कि इस सबसे वाह परेशान हो चुकी थी और मुख्यधारा में लौटने का मन बना लिया था।

आत्मा समर्पित दोनों नक्सलियों को राजनांदगांव वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने शासन की पुनर्वास नीति के तहत 10-10 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि भेंट की। वही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नक्सल आॅपरेश गोरख नाथ बघेल ने कहा कि शासन की पूनर्वासनीति के तहत इन आत्मसमर्पित नक्सलियों को विभिन्न लाभ दिए जांएगें। पुलिस के नक्सल विरोधी अभियान के तहत जंगल के भीतर लगातार नक्सलियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। वहीं नक्सलियों को मिलने वाली बाहरी मदद पर भी अंकुश लगा है, ऐसे में नक्सली संगठन के भीतर बड़े नक्सली नेताओं के द्वारा शोषण से तंग आकर गृहस्थ जीवन बसाने के उद्देश्य से इन दोनों नक्सली दंपतियों ने आत्मसमर्पण की राह अपनाई है।

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