छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ी को निराकृत हाईकोर्ट द्वारा करे जाने पर एम ए छत्तीसगढ़ी छात्र संगठन ने निम्न बिंदु पर हाईकोर्ट से शनिवेदन पुनः सुनवाई कि मांग कि

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 
छत्तीसगढ़ी भाषा को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट मे बिलासपुर निवासी श्रीमती लता राठौर द्वारा माध्यम को लेकर एक याचिका पिछले 3 वर्ष पूर्व डाली गई थी जिसमे शुक्रवार को हाईकोर्ट ने यह याचिका ये करके ख़ारिज कर दिया कि राज्य सरकार किसी न किसी रूप मे छत्तीसगढ़ी को पढ़ा रही है इस निराकृत किये मामला पर एम ए छत्तीसगढ़ी छात्र संगठन ने प्रेस वार्ता कर कुछ तर्क और बिन्दुओ पर विचार कर पुनःइस पर सुनवाई होनी चाहिए ऋतुराज साहू ने कहा कि हाईकोर्ट ने सर्वप्रथम छत्तीसगढ़ी बोली है या भाषा इस बर निराकरण कि बात कही है तो छत्तीसगढ़ी राजपत्र 2007 के प्रकासन के आधार पर भाषा है जिसे सविधानिक रूप से विधानसभा मे विधेयक के साथ हिंदी के बाद दूसरी राजभाषा प्रदेश कि घोषित किया है इसको आधार मानते हुए इस पर पुनः सुनवाई होनी चाहिए. दूसरी बात है कि सुनवाई के दौरान चुकी भाषा से जुडी हुई मुद्दा है यहां कि छत्तीसगढ़ी पहचान को दर्शाती है तो यहां के साहित्यकार, राजभाषा आयोग, भाषाविद, महिला साहित्यकार, एम ए छत्तीसगढ़ी डिग्रीधारी कि सहायता लेनी चाहिए. इसके आलवा अन्य राज्य मे प्रचलन त्रिभाषा फार्मूला को भी आधार मानते हुए छत्तीसगढ़ मे छत्तीसगढ़ी पढ़ाया जाना चाहिए. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के एससीआरटी द्वारा प्रस्तुत तर्क को आधार माना कि यहां 16 बोली को मिक्स करके पाठ के रूप मे पढ़ाई जा रही है इसलिए यह मामला निराकृत इस आधार पर किया जाता है कि राज्य सरकार किसी न किसी रूप मे पढा रही है ऋतुराज साहू क कहना है कि भाषा को कम से कम एक अलग विषय के रूप मे किताब तैयार करके पढ़या जाना चाहिए. इसके लिए अन्य राज्यों कि सिक्छा प्रणाली क अवलोकन भी करवा कर भाषा को माध्यम के रूप मे पढ़ाने पर विचार होना चाहिए.मिक्स भाषा याचिका के पूर्व भी शामिल थी पर याचिका माध्यम को लेकर लगाया गया था तो उस पर निर्णय होना चाहिए था. ऋतुराज साहू ने हाईकोर्ट मे पुनः माध्यम को लेकर मांग कि है कि छत्तीसगढ़ी को माध्यम बनाने के लिए विभिन्न तर्कों के आधार मानकर पुनः इस पर सुनवाई किया जाये ताकि छत्तीसगढ़ी भाषा को इस्कूली सिक्छा मे अलग रूप मे शामिल किया जा सके. निराकृत किये जाने से छात्र संगठन साहित भाषाप्रेमी खासे उदास है. क्योंकि छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ के लोगो कि मातृभाषा है यह इनकी अस्मिता से जुडी हुई मुद्दा है अतः मातृ भाषा के हक के संदर्भ मे हाईकोर्ट पुनः सुनवाई इस मामले को लेकर करे ये मांग एम ए छत्तीसगढ़ी डिग्रीधारियों ने कि है. इन लोगो को हाईकोर्ट से अब भी उम्मीद है कि निम्न पहलूओ के आधार पर छत्तीसगढ़ी मे पुनः सुनवाई हो सकेगी.इस प्रेस वार्ता मे संगठन के संजीव साहू, विनय बघेल, रजत आदि लोग उपस्थिति रहे.