जंगल में बसे गाँव लिम्हागढ़ में आदिवासियों ने ९ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया..
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
विश्व आदिवासी दिवस के सन्देश को सिर्फ शहर में बसे सुविध संपन्न आदिवासियों तक ही नहीं वरन प्रकृति के गोद में बसे विपन्न लेकिन अलमस्त आदिवासियों तक पहुंचाना चाहिए. इसी अहम् उद्देश्य को लेकर डॉ. एम्. सिंह खुशरोजी विगत कई वर्षों से विश्व आदिवासी दिवस अपने गाँव लिम्हा गढ़ में मनाते आ रहे हैं. खुशरो जी भारत अल्युमिनियम कम्पनी (बालको) कोरबा के सेवा निवृत्त डाक्टर हैं. मै भी एनटीपीसी ज्वाइन करने से पहले चार वर्षो तक बालको में कार्य किया है. तब उनसे परिचय नहीं हुआ था, सामाजिक गतिविधियों दादा हीरा सिंह मरकाम के सानिध्य में उनसे परिचय हुआ. मेरे साथ एनटीपीसी सीपत में काम किये रामनाथ पुलस्त जी उसी गाँव से हैं. उन्होंने पेशकश की “क्षेत्र के सगाजन इस वर्ष आपके साथ आदिवासी दिवस मनाना चाहते हैं, समय दें.” मैंने कहा “ अहो भाग्य, आप लोगों के साथ से मैं गौरवान्वित होऊंगा.“ और उन्होंने मुझे मुख्य अभ्यागत का दर्जा प्रदान करते हुए आमंत्रित किया.
बिलासपूर कटघोरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर बेलतरा के बाद लिम्हा टोल प्लाजा पड़ता है. टोल प्लाजा के बाद दाई और उलटी दिशा में चलना पड़ता है. रोड से लगा हुआ पुलस्त जी का मकान पड़ता है. उनके मकान के बगल से जंगल की ओर जो सड़क निकलती है वह सीधे गोंडवाना किला महल पहुंचाती है. ग्राम लिम्हा जंगल में बसे सात छोटे छोटे सात टोलों का तीन साधे तीन हजार जनसंख्या की एक वन्य-आदिवासी ग्राम है. यह बिल्हा ब्लाक जिला बिलासपुर का सीमांत ग्राम. बगदेवा से जिला कोरबा प्रारंभ होता है. यहाँ श्री एम्. सिंह खुशरो जी ने गोंडवाना किला महल का निर्माण करवाया है. जिसमें रानी दुर्गावती, शंकर शाह, रघुनाथ शाह, वीर नारायण सिंह,बिरसा मुंडा, दादा हीरा सिंह मरकाम, रामेश्वर खुशरो (दि.पिताजी), मंगतीन खुशरो (दि. पत्नि) तथा स्वय उनकी आदम कद मूर्ति स्थापित है. इसी परिसर में प्रधान समाज ने हिरासुका ठाना का निर्माण करवाया है. लिम्हा गाँव से सम्बंधित एक कहावत है. “मांस खाय बर खोंधरा, मारे बर जेमरा अऊ न्याय करे बर लिम्हा.”
अपने गाँव देव् किरारी के कार्यक्रम को अमली जामा पहनाकर कर वापस
बिलासपुर आया. तब तक मेरे अगले आयोजन में शामिल होने वाले सर्व श्री समय सिंह गोंड, जगदीश सिदार, छेदीलाल नेताम, घनश्याम खुशरो,और शिव चरण जगत निवास पर पहुँच गए थे. करीबन साढ़े बारह बजे सब साथ निकले और गंतव्य तक अलग अलग मार्ग से लिम्हा गढ़ पहुंचे. तब जोरदार बारिश होने लगी बारिश में भी युवक युवती रैली में नाचते रहे. सब कुछ पानी पानी और कीचड़मय हो गया. स्मृति पटल पर बचपन में देखे और किये “दहिकान्दो”नाचा का चित्र उभर आया. कार्यक्रम कुछ विलम्ब से प्रारम्भ हुआ.
औपचारिक देवपूजन के साथ अभ्यागतों का पीले गमछे और मोमेन्टो प्रदान कर स्वागत सम्मान किया गया. वरिष्ठ जनो ने सभा को संबोधित किया जिसमें प्रमुख रहे सर्वश्रीबिलासपुर से पहुंचे भुनेश्वर सिंह राज (पूर्व सीईओ) बक्साही, फाग सिंह सरोटे व्याख्याता, दशरथ सिंह खुशरो जेवरा, राम नाथ पुलस्त पूर्व उप प्रबंधक एनटीपीसी, इंजिनियर मोनिका राज छेदीलाल नेताम गनेसिया बाई टेकाम. अंत में मुख्य अतिथि रमेश चन्द्र श्याम जी का उद्बोधन हुआ. कार्यक्रम का सफल संचालन दुजराम उइके जी ने किया.
शाम ७ बजे एनटीपीसी सीपत के संध्याकालिन आयोजन के लिए रवाना हुए.

