शंभू शेक नरक पंडुम के महान पर्व पर बड़ा देव की हर गांव में स्थापना डौडीं ब्लॉक सर्किल बलौदा
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
बड़ा देव की स्थापना बालोद जिले के ब्लॉक डौंडी गोड़ समाज के अध्यक्ष की तरफ से पहल किया गया बेलोदा सर्कल के प्रत्येक गांव में बड़ा देव की स्थापना किया जाए एवं समाज के आर्थिक रोजगार शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए बच्चों के भविष्य बनाने के लिए समाज में एकत्र होकर सहयोग करना होगा डौंडी ब्लॉक के गोंडवाना गोंड महासभा के अध्यक्ष आत्माराम कौड़ों ने बड़ा देव की स्थापना के बारे में सर्कल के हर गांव में जन जागरूकता किया ग्राम परलकसा में बड़ा देव की स्थापना किया गया इस अवसर पर ग्राम प्रमुख ईश्वर सलाम ने बताया कि बड़ा देव का स्थापना इसलिए किया जाता है कि समाज में एकता के साथ-साथ एक सूत्र में बांधना है और समाज की रीति और नीति साथ में आर्थिक एवं रोजगार शिक्षा के बारे में विचार विमर्श करना है गांव में आर्थिक स्थिति मजबूत करना होगा और प्रत्येक रविवार को बड़ा देव के स्थान पर इकट्ठा होकर समाज की आगे बढ़ाने के रणनीति तैयार करेंग इस अवसर पर ग्राम प्रमुख के साथ गांव अन्य लोग भी उपस्थित तुलसीदास धुर्वा ग्राम गायत चंम्पा धुर्वा घुरऊ धुर्वा ग्राम पटेल मोहन सलाम रुपचंद हिंडको छबिलाल सिडको इस प्रकार से सैकड़ो की संख्या में ग्राम वासियों महिला और पुरुष उपस्थित थे उसी तत्वाधान पर सिंघोला में भी बड़ा देव की स्थापना किया गया इस सर्किल का सदस्य संजय कोर्राम ने कहा कि बड़ा देव की स्थापना से समाज में संगठन एवं मजबूती आएगी और जन्म विवाह और मृत्यु वह खर्च कम वाली को आने वाला समय में काम करना होगा इसी प्रकार ग्राम कंजली में छबिलाल कोर्राम ने कहा कि बड़ा देव की स्थापना मात्र से गौड़ समाज का विकास नहीं होगा उसके लिए प्रत्येक परिवार को बड़ा देव के स्थान पर आकर प्रत्येक घर से एक मुट्ठी चावल एवं ₹10 पैसा इकट्ठा करना होगा इससे किसी भी गौड़ समाज के शिक्षा या स्वास्थ्य रोजगार नौकरी के लिए सहयोग किया जा सकता है एवं गांव को एवं समाज को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से इसी प्रकार बेलोद सर्कल के देवेन्द्र करगा ने कहा कि पिछले समय में मगलतराई चौंकी पुलिस स्टेशन के अधिकारियों से सम्पर्क कर गौड़ समाज के बेरोजगार समाज के लडका एवं लडकीयौ को पुलिस विभाग में रोजगार के अवसर प्रशिक्षण शिविर लगाया गया जिसमें सात बच्चे को चयनित हुए बस्तर फयटर पुलिस विभाग अग्निवीर एवं अन्य जगहों पर नौकरी मिली उसी तत्वाधान को बढ़ाने की प्रेरणा समाज के बच्चे देना तब समाज जागेगा यह योजना पिछले 4 सालों से प्रयास के बाद सफलतापूर्वक सर्कल के हर ग्राम में बड़ा देव की स्थापना की जा रही है फरसबिरही में बड़ा देव की स्थापना किया गया जिसमें डौंडी ब्लॉक गोंडवाना गोंड महासभा के संरक्षण गंगाराम दर्रों ने कहा कि बड़ा देव का स्थापना करने का उद्देश्य गोड समाज में जन जागरूकता करने की पहल है समाज में एकता का प्रतीक लाने का प्रयास है साथ में डौडीं ब्लॉक के गोंडवाना महासभा के सलाहकार भोलाराम नेताम ने कहा कि मैं आज तक बड़ा देव और बुड़ा देव को को समझ नहीं पाया था मुझे समझने के लिए 60 वर्ष लगा की बड़ा देव क्यों कहा जाता है बुड़ा देव का मतलब क्या है बताते हुए बड़ा देव का अर्थ है जल अग्नि पृथ्वी हवा आकाश यह पांच तत्वों से बना हुआ को ही बड़ा देव कहते हैं जो प्रकृति पूजक है और बुड़ा देव प्रत्येक घर के सदस्य पेनवाशी याने पुरखा को मानने वाले प्रत्येक गौड़ समाज देव संख्या के 750 बुड़ा देव है जो कि बड़ा देव में ही समाहित है ऐसा भोलाराम नेताम डौंडी जनपद उपाध्यक्ष डौंडी ब्लॉक गोड़ महासभा का अध्यक्ष आत्माराम कौडो ने बड़ा देव की स्थापना के बारे में विधि विधान बताया सबसे पहले बुद्धदेव की स्थापना के लिए पांच सदस्य पुरुष एवं पांच सदस्य मातृ शक्ति यानी सम देव संख्या और विषम देव संख्या समाज में सम और विषम की देव संख्या की बहुत बड़ी महत्वपूर्ण है जिस प्रकार संविधान में अनुच्छेद का होता है इस प्रकार अपने गोंडवाना गौड़ समाज में देव संख्या की बहुत बड़ी भूमिका होती है इस प्रकार आगे बडा देव की स्थापना के लिए सेवा अर्जी प्रकृति के विधि विधान के साथ में सतरंगी झंडा के बाद में चौक पूरना पांच परसा पान में अलग-अलग स्थान पर धान के ऊपर पांच कलश रख रखा जाता है साथ में पांच प्रकार के पेड़ को भी पूजा जाता है वह पेड़ का नाम है सेमर परसा साजा निम डुमर पौधे को रखा जाता है इस अवसर पर बेलोदा सर्कल अध्यक्ष मानसिंह दरपटृटी देवेन्द्र करगा जिवराखन लाल उसारे गोंडवाना गोंड महासभा प्रदेश मीडिया प्रभारी डौडीं ब्लॉक गोड़ समाज अध्यक्ष आत्मा राम कौडौ ने कहा कि बड़ा देव स्थापना के क्या रहस्य है उसके बारे में पूरा विस्तार से बताया
जाने क्या है…. कोयतुर इतिहास
शंभू सेक नरका पण्डुम को ” संभू की जागने का रात या नरका ” अर्थात् संभू की जागरण की रात को कहा जाता है। यह त्यौहार माघ पूर्णिमा से तेरह दिन बाद मनाया जाता है। कोया वंशीय गोंड समुदाय के गण्डजीव इस तिथि को इसलिये जानते और मानते हैं कि इस दिन ह्युंग खण्डी दीपा अर्थात पंच खण्ड धरती ” गण्डोदीप” के अधिपति संभू सेक अर्थात पांच खंड धरती के मालिक सम्भू ने अपने गण्डजीवों(जो गण्ड वंश की व्यवस्था में शासित व नियंत्रित होते हैं) को मौत के मुंह से बचाने हेतु जो विष प्राशण किया था, उसे पचाकर वे होश में आ गये थे और उसके कारण गण्डजीवों में खुशी की माहौल छा गया था ,इसलिए इस पर्व को वे संभू जागरण जतरा(गोंडी भाषा) कहते हैं ।
सम्भू हजोर नरका के सम्बंध में कोया वंशीय गोण्ड समुदाय में ऐसी इतिहास है कि प्राचीन काल में सतपुड़ा के पेनक मढ़ही कोट के गणप्रमुख कुलीतारा के पुत्र ” कोसोडुम ” ने अपने कोया पुनेमी बिदया से इस गण्डोदीप के सभी प्राणी मात्रों का कल्याण साध्य करने वाला ” _मूंदमून्दशूल हर्रि_ “त्रेगुण्यशूल मार्ग प्रतिपादन किया । अपने कोया पुनेमी ज्ञान से वे गण्डोदीप के अधिपति बने । इसलिए गण्डोदीप के गण्डजीवों ने उसे संभूसेक उपाधि से विभूषित किया। इस गण्डोदीप में एक के पश्चात् दूसरा ऐसे कोयतुर कुल में ८८वें शंभूसेकों ने अपनी अधिसत्ता चलाई । संभूसेक को कोया वंशीय गोण्ड समुदाय के कोयतुर संभू मादाव भी कहते हैं । _संभू मादव ह्युंग भु गोंडी बोली की शब्द है ह्युंग – पांच ,भु – माटी का राजा, याने पंच खण्ड भूमि का पिता ।_

