छत्तीसगढ़

9 अगस्त : विश्व आदिवासी दिवस या अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 
देश के ट्राइबल कम्युनिटी 9 अगस्त को विश्व आदिअवासी दिवस के रूप में बड़े धूमधाम से मनाता है लेकिन भारत गणराज्य का इस पर्व पर विस्मयकारी मौन कई सवाल खड़े करता है. भारत सरकार की इस विषय पर नीति क्या है? और नियत कैसा है? इस पर चर्चा करना सामयिक है.
विश्व महापंचायत जिसे “ संयुक्त राष्ट्र संघ “ यूनाइटेड नेशन ऑर्गेनाइजेशन –UNO के वैधानिक नाम से जाना जाता है. इस माह पंचायत के भारत सहित विश्व भर के 193 देश सदस्य हैं. द्वितीय विश्वयुद्ध में परमाणु अस्त्रों के विभीषिका के बाद 1945 में स्थापित यह संगठन मुख्य रूप से विश्व शांति, मानवाधिकार और पर्यावरण जैसे विषयों पर केन्द्रित कार्यदल गठित कर वैश्विक विमर्श और कार्य योजना तैयार करता है.
विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर फोकस करने के लिए कुछ “ ध्येय दिवस” निर्धारित किया गया है. जैसे 5 जून : विश्व पर्यावरण दिवस, 22 मार्च : विश्व जल दिवस, 21 सितम्बर अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस, 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस … इत्यादि. इनमे से कुछ “विश्व दिवस” और कुछ “अंतर्राष्ट्रीय दिवस” हैं. ऐसा क्यों ? जिस विषय पर समस्त सदस्य राष्ट्र एकमत हैं उस मुद्दों पर “विश्व दिवस” घोषित किया जाता है . जिन मुद्दों पर सभी सदस्य राष्ट्रों की सहमति नहीं बन पाती उसे “अंतर्राष्ट्रीय दिवस” का नाम दिया जाता है.
ऐसा ही UNO के मानवाधिकार पर गठित कार्य दल ने यह पाया कि सर्वाधिक मानवाधिकार का उलंघन (Human right Violetion) और भेदभाव पूर्ण व्यौहार किसी भी राष्ट्र के देशज जनसंख्या (native / Indigenous Population) पर हो रहा है. उनके सम्मानपूर्ण जीवन के अधिकार सहित उनके भूमि, भाषा, भूषा, संस्कृति एवं आस्था के संरक्षण की आवश्यकता है. जिस उप आयोग ने यह परामर्श प्रस्तावित किया उसकी पहली बैठक 9 अगस्त 1982 को जेनेवा में हुई थी.
23 दिसंबर 1994 में संयुक्तर राष्ट्र संघ के महासभा (General Assembly of U.N.O.) ने उपरोक्त प्रस्ताव को पारित किया और 9 अगस्त को “अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस” ‘The International day of World’s Indigenous people “ घोषित किया.
संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत गणराज्य का प्रतिनिधित्व भारत सरकर ( Government of India) करता है न कि कोई राज्य सरकार. UNO द्वारा पारित उक्त प्रस्ताव और घोषणा से कुछ राष्ट्र सहमत नहीं हैं उसमें भारत भी शामिल है. इसलिए 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस न होकर अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस (The International day of World’s Indigenous people) हो गया. 1982 से लेकर अब तक भारत राष्ट्र में सरकारें बदलती रही है लेकिन UNO में भारत का स्टैंड अपरिवर्तित है कि देश में सभी indigenous people हैं किसी के साथ भेदभावपूर्ण व्यौहार नहीं हो रह है. इसलिए भारत सरकार अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस को अधिकारिक मान्यत नहीं देता.
2000 के दशक में देश में पहली बार रांची झारखण्ड में विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया जिसमें देश भर के आदिवासी नेता, कार्यकर्त्ता गण शामिल हुए थे. छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व मा. अरविन्द नेताम और शिशुपाल शोरी जी ने किया था.
भारत में ट्राइबल कम्युनिटी ही अपने आप को देशज या नेटिव (indigenous people) मानता है और अपने साथ अन्याय और शोषण के लिए बाहरी व्यक्तियों को जिम्मेदार ठहराता है. इसलिए indigenous people शब्द को सुविधानुसार “आदिवासी” या “मूलनिवासी” से प्रतिस्थपित किया जा सकता है.
अमेरिका और आस्ट्रेलिया जैसे विकसित राष्ट्र में भी tribals हैं और उनके अधिकार सुरक्षित हैं. अमेरिका में 574 और आस्ट्रेलिया में 600 ट्राइबल प्रजातियाँ को मान्यता प्राप्त है. अमेरिका में प्रमुख नेटिव ट्राइब्स में से एक “रेड इंडियन” है. इसवी सन 1492 में इटली के समुद्र यात्री क्रिस्टोफर कोलंबस ने गोल्डन बर्ड – इंडिया के खोज में जहाज लेकर निकला और पहुँच गया अमेरिका. अपने यात्रा वृतांत में वहां के गोरे – लाल रंग के त्वचा वाले ट्राइबल्स को गलत पहचान से “रेड इन्डियन” नाम दे दिया.
सयुंक्त राष्ट्र संघ ने अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस के लिए हर वर्ष एक ध्येय (Theme) निर्धारित करता है और सदस्य राष्ट्रों से उस पर क्रियान्वयन रिपोर्ट मांगता है. 2026के लिए यह ध्येय (थीम) निर्धारित किया है जिसमें पारंपरिक देसी दाइयों : प्रसूति (जचकी) कर्मियों के ज्ञान और अनुभव को संरक्षित और सम्मानित करना है.
“Honouring Indigenous Midwives: Safeguarding Life and Well-being.”
“देसी दाइयों का सम्मान : सुरक्षित और बेहतर जीवन का प्रमाण”