छत्तीसगढ़

देश के विकास में मोदी सरकार का योगदान शून्य है, 12 साल में केवल अस्थिरता दी – विनोद चंद्राकर

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 

महासमुंद। पूर्व संसदीय सचिव छग शासन व महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 2047 तक विकसित भारत का केवल जुमला दिखाया जा रहा है। जबकि, देश के विकास में मोदी सरकार का योगदान शून्य है। ऐसा कोई ठोस कार्य नहीं है जिसे यह सरकार अपनी उपलब्धि बता सके। पिछले 12 साल में मोदी सरकार ने केवल देश को अस्थिर करने का काम किया है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि देश का विकास करना है तो सबसे पहले देशवासियों का विकास करना होगा। युवाओं को रोजगार देना होगा और देश की अर्थव्यवस्था में प्रमुख योगदान देने वाली शासकीय संस्थाओं को बेचना बंद करना होगा। दिए जलाकर, थाली बजाकर और रंगोली बनाकर विकसित भारत की परिकल्पना साकार नहीं हो सकती। विकसित भारत का लक्ष्य प्रतीकात्मक कृत्यों से नहीं बल्कि ठोस नीतियों, आर्थिक सुधारों, नवाचार और सामूहिक परिश्रम से हासिल होगा।
उन्होंने कहा कि नोटबंदी का बिना तैयारी लिया गया फैसला हो या कोरोना काल का कुप्रबंधन, हर बड़े मौके पर सरकार ने देश को अस्थिरता के सिवा कुछ नहीं दिया। नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी, छोटे उद्योग बंद हो गए और करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए। कोरोना काल में लोगों को ऑक्सीजन, दवा और इलाज के लिए भटकना पड़ा। आज भी सरकार के पास इन विफलताओं का कोई जवाब नहीं है।
पूर्व विधायक ने कहा कि आज देश में लोकतांत्रिक आवाज को दबाया जा रहा है। सवाल पूछने पर जेल, रोजगार मांगने पर जेल, भ्रष्टाचार का विरोध करने पर जेल, सच बोलने पर जेल, अधिकार मांगने पर जेल और महंगाई के खिलाफ बोलने पर जेल में डाल दिया जाता है। यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरे की घंटी है।
उन्होंने कहा कि सरकार के ही आंकड़ों के अनुसार 2016 से अब तक लगभग 10 से अधिक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में पूरी हिस्सेदारी निजी हाथों में सौंपी जा चुकी है, जिसमें एयर इंडिया और नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड जैसे बड़े संस्थान शामिल हैं। हाल ही में इंडियन मेडिसिंस फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी भी बेच दी गई। वित्त मंत्रालय के अनुसार 2014-15 से 2024-25 के बीच विनिवेश से लगभग 4.4 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए हैं, जिसका सीधा असर बेरोजगारी पर पड़ा है। श्री चंद्राकर ने कहा कि आज विदेशी उद्योगपति भी भारत पर तंज कस रहे हैं कि क्या देश अंबानी-अडानी जैसे लोग चला रहे हैं। टेस्ला प्रमुख एलन मस्क ने भी हाल ही में इस बात पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि भारत की नीतियां कुछ चुनिंदा बड़े औद्योगिक घरानों के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती हैं, जिससे वैश्विक निवेशकों में असमानता और एकाधिकार को लेकर चिंता है। जब दुनिया के बड़े उद्योगपति इस तरह सवाल उठा रहे हैं तो समझा जा सकता है कि देश की छवि कहां पहुंच गई है। देश कर्ज में डूब रहा है, हर नागरिक कर्जदार बन रहा है और बेरोजगारी, अपराध और भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। क्या यही मोदी सरकार का विकसित भारत है।