चक्रवाती तूफान की दोहरी मार: किसानों के मकान क्षतिग्रस्त, फसलें बर्बाद
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
चक्रवाती तूफान एवं बारिश में किसानों का घर टूट गया एवं फसल नुकसान

डौंडी ब्लॉक के आदिवासी अंचल के ग्राम पंचायत चिहरों बेलसिंग गोटा एवं आश्रित ग्राम साल्हे 2 जगदीश आचला गनपत गावड़े चक्रवर्ती तूफान एवं बारिश से किसानों का घर टूट गया गया एवं फसल नुकसान संबंधित किसानों छूटने वाले किसान क्षेत्र के युवा जनपद सदस्य तुलेश्वर हिचामी को अवगत कराया जिसमें जनपद सदस्य तत्काल घर में जाकर उनको मुलाकात एवं जायजा लिया उसके बाद क्षतिपूर्ति मुआवजा के लिए तत्काल तहसीलदार देवेंद्र नेताम दूरभाष माध्यम से अवगत कराया जिसमें राजस्व विभाग आरई को भेजने का आश्वासन दिया ! प्रभावित किसानों ने शासन-प्रशासन से सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की
छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से हुई लगातार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्राकृतिक आपदा की इस मार से किसानों को दोहरी क्षति उठानी पड़ रही है। कई स्थानों पर तेज आंधी और बारिश के कारण किसानों के कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं, वहीं खेतों में पककर तैयार धान की फसल तेज हवाओं के चलते जमीन पर बिछ गई है।
किसानों के अनुसार, चार महीने तक दिन-रात मेहनत करके तैयार की गई धान की फसल कटाई के समय मौसम की मार से प्रभावित हुई है। कई किसानों की फसल खेतों में गिर गई है तथा लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से धान की गुणवत्ता खराब होने और उत्पादन में कमी आने की आशंका है। जिन किसानों ने धान की कटाई कर ली थी, उनका धान भी बारिश में भीगने से प्रभावित हुआ है।
इस प्राकृतिक आपदा से छोटे और सीमांत किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। खेती के लिए बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री जुटाने में किसानों ने काफी खर्च किया था। अब फसल खराब होने के साथ मकानों को भी नुकसान पहुंचने से उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं।
प्रभावित किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि गांव-गांव में तत्काल राजस्व एवं कृषि विभाग की टीम भेजकर क्षतिग्रस्त मकानों और फसलों का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए। प्रभावित परिवारों को मकान क्षति का मुआवजा तथा किसानों को फसल नुकसान के अनुसार उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के समय शासन-प्रशासन को प्रभावित परिवारों के साथ खड़े होकर उन्हें राहत पहुंचानी चाहिए, ताकि किसान दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
अब किसानों की निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं। प्रभावित किसानों को उम्मीद है कि जल्द सर्वे कराकर उन्हें उचित मुआवजा और राहत प्रदान की जाएगी।

