बेनामी लेनदेन के मुद्दे लेकर डिप्टी डायरेक्टर इनकम टैक्स – (बेनामी) के पास पहुंचे … रमेश चन्द्र श्याम
जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज
आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को नामांतरण कानूनन प्रतिबंधित है लेकिन विशेष परिस्थितियों में कलेक्टर के अनुमति से गैर आदिवासियों को नामांतरित किया जा सकता है. इसी लूपहोल का धड़ल्ले से दुरूपयोग किया जा रहा है.
आदिवासियों की जमीन हडपने की खेल में प्रचलित हथकंडा दो चरणों में पूरा होता है.
प्रथम चरण में आदिवासियों के गरीबी / मज़बूरी का फायदा उठाते हुए गैर आदिवासी अपने आदिवासी नौकर चाकर / विश्वस्त मित्र के नाम पर औने – पौने दाम पर उनकी जमीन खरीदकर सम्बंधित दस्तावेज अपने पास रख लेता है. दूर दृष्टि रखने वाले गैर आदिवासी किसी संपन्न आदिवासी से मितान बदकर उनके नाम पर आदिवासी जमीन खरीदता है. कभी कभी तो ये आदिवासी मितान की जमीन पर ही ललचाई नजर रखते हैं .
इस तरह से जमीन खरीदी में रूपया किसी अन्य व्यक्ति का और जमीन रजिस्ट्री किसी दुसरे व्यक्ति के नाम पर होता है. इसे ही बेनामी लेनदेन कहा जाता है. इस तरह के लेनदेन (tansaction) बेनामी (निषेध) अधिनियम 1988 संशोधन 2006 के तहत दंडनीय अपराध है.
दुसरे चरण में गैरआदिवासी जिस आदिवासी के नाम पर जमीन ख़रीदा है उसकी ओर से कलेक्टर से मंजूरी लेने के लिए आवेदन करता है. इस चरण में प्रत्यक्ष आवेदक आदिवासी खरीदार ही होता है लेकिन परोक्ष रूप से गैर आदिवासी ही न्यायालयीन और प्रशासनिक खर्च वहन करता है. इसी चरण में आदिवासी जमीन बचाओ अभियान के सिपाही न्यायलय में आपत्ति दर्ज करते है.
इसी बात को समझने के लिए रमेशचंद्र श्याम कार्यकारी अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा ने डिप्टी डायरेक्टर इनकम टैक्स – (बेनामी) से रायपुर में भेंट की. विभागीय अधिकारियों ने उनके पहल की प्रशंसा की ; और बेनामी ट्रांजेक्शन पर कार्यवाही के प्रविधियों को समझाते हुए समुचित मार्गदर्शन और सहयोग करने की आश्वासन दिया.
भारत सरकर, वित्त मंत्रालय के अधीन आयकर विभाग में बेनामी अनुभाग होता है. छत्तीसगढ़ राज्य में इस विभाग का मुख्यालय सीबीडी काम्प्लेक्स नया रायपुर में है.

