ग्रामीण विशेष

ग्राम खजरी (पंधी) के गोंड़ समाज ने गोंड़ महासभा के जिला पदाधिकारियों से कोटवार के मनमानी के खिलाफ गोहार लगाई

जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज 
जीवन का एक और अध्याय पूरा हुआ, बहत्तरवाँ अध्याय का पहला पन्ना यूं तो मैं जूना शहर के बादल महल परिसर के गोंड़वाना शक्ति स्थल में आराधना के साथ प्रारंभ करना चाहता था लेकिन ग्राम खजरी के मातृ शक्तियों के बुलावा को टाल नहीं सका और उनकी समस्याओं के सुनवाई और समाधान में ही शाम हो गई। सो गाँव खजरी में साथियों ने जन्म दिन मनाया।
छत्तीसगढ़ गोंड़वाना गोंड़ महासभा के जिला इकाई एवं सीपत उप महासभा के कोषाध्यक्ष शिव चरण जगत के पास खजरी के सगाजनों ने ग्राम कोटवार के मनमानी से बचाने के लिए गोहार लगाई। फरियादी में वार्ड पंच श्रीमती रूपा ध्रुव के अगुवाई में सभी गोंड़ समाज की महिलाएँ थीं, कुछ पुरुष भी साथ थे। महिलाओं की शिकायत है की कोटवार अपने आप को खजरी ग्राम का कोटवार नहीं मानता, कोटवार का काम नहीं करता और हांका भी नहीं पारता। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर दो एकड़ भूमि को शहर के रसुखदार व्यक्ति को ईंटा भट्ठा संचालन के लिए दो लाख रुपये सालाना पर लीज में दे दिया है। जिसके वजह से सरकारी आवास के लिए भूखंड की कमी और श्मशान घाट के लिए निस्तारी मार्ग बाधित हो रहा है।
इस समस्या को लेकर फरियादी गण, सरपंच वीरेंद्र कुमार साहू, कोटवार परदेसी चौहान, और गोंड़ महासभा के पदाधिकारी गण ग्राम खजरी में बैठे.
ग्राम खजरी बिलासपुर – सीपत रोड में खारूँ नदी के किनारे बसा पंधी ग्राम पंचायत का बीसवाँ एवं अंतिम वार्ड है. जनसंख्या 300 के आसपास है जिसमें कुछेक घरों को छोड़ बाकी सभी गोंड़ समाज के हैं। ग्राम के कोटवार परदेसी पिता झनक राम के नाम पर राजस्व रिकार्ड में खसरा नं. 7/2 और 62 के अनुसार रकबा 8.79+1.2 एकड़ = कुल 10 एकड़ कोटवारी भूमि चार बोर वेल के साथ एक ही चक में स्थित है। दो एकड़ कोटवारी भूमि को ईंट भट्ठा के लिए बिलासपुर के आदमी को दो लाख रुपये सालाना पर लीज पर दे दिया है जिसका मियाद पूरा हो गया है। अब गाँव वाले ईंट भट्टी नहीं चाहते हैं। गोंड़ समाज का कहना है कि उनके पुरखों जो बड़े सम्पन्न किसान थे उन्होंने सात एकड़ जमीन कोटवारी के लिए दी थी. गाँव वालों के कथनानुसार कोटवार आसपास के भूमि को अतिक्रमण कर अपने भूमि में मिला लिया है। जिससे सरकारी योजनाओं के तहत गरीबों के देने के लिए आवासी भूखंड की कमी है। श्मशान घाट के लिए भी दिक्कत हो रही है इसलिए अवैध कब्जा को कोटवार का बेदखली चाहते हैं.
छत्तीसगढ़ गोंड़वाना गोंड़ महासभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र श्याम ने इसी तरह के अन्य क्षेत्र के प्रकरण का उदाहरण देते हुए यह समझाया कि प्रशासकीय और अदालती प्रक्रिया खर्चीला और लंबा समय लेने वाला होता है इसलिए दोनों पक्ष आपसी सहमति से समाधान निकालें। सरपंच ने समाज के विचार का सम्मान करते हुए उचित समाधान का वचन दिया। उन्होंने बताया कि दाह कर्म के लिए मुक्ति धाम प्रस्तावित है। जो लोग मिट्टी में दफन करना चाहते हैं उसके लिए खारून नदी किनारे मुक्ति धाम के लिये भूमि चिन्हाँकित किया जाएगा। अतिक्रमणकारी कोटवार ने यह स्वीकार किया कि गाँव के सभी लोगों ने अतिक्रमण / अवैध कब्जा किया है इसलिए उसने भी अतिक्रमण किया है। लेकिन नदी किनारे दफन कार्य के लिए निस्तारी मार्ग देने के लिए सहमत है। । यह भी वाकहन दिया कि ईंटा भट्ठा का लीज समाप्त हो गया है आगे ईंटा भट्ठा संचालित नहीं होगा. गाँववाले निस्तारी रास्ता के साथ पूरा अवैध कब्जा से बेदखली चाहते हैं. गाँववालों के मौका मुआयना किया गया। आगे फिर वार्ता बैटहक होगी।
बैठक में ग्राम सरपंच वीरेंद्र कुमार साहू, कोटवार परदेसी चौहान, वार्ड पंच श्रीमती रूपा ध्रुव, सुनीता सिदार, सीमा ध्रुव, पत्रिका, संतोषी गोंड़, सरिता गोंड़, प्रमिला गोंड़ ललिता गोंड़, सयबिन बाई,परदेसनीन गोंड़,शैल गोंड़,कलेसरी गोंड़, रामकली गोंड़, रामप्यारी गोंड,प्रियंका गोंड़,सानिया गोंड़,राम बाई गोंड़,अनीता गोंड़, शांति बाई गोंड, राजकुमारी गोंड, श्यामकली गोंड, गौरी गोंड़, रतानी बाई गोंड, सरिता बाई गोंड, संतोषी गोंड़, दूजबाई गोंड, अमरीका गोंड, बिरस्पति गोंड़, लछमीन भोई, संतोषी गोंड़ राजेश ध्रुव, शैल कुमार मरावी, विष्णु गोंड़, पंचराम गोंड़, देवनारायण मरावी, ईश्वर भोई सहित कई सगा जन उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ गोंड़वाना गोंड़ महासभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र श्याम के साथ छेदी लाल नेताम, जिला उपाध्यक्ष, तथा संरक्षक सीपत उप महासभा, समय सिंह गोंड, कार्यकारी जिला अध्यक्ष, घनश्याम खुशरों सचिव सीपत उपकेन्द्र, शिव चरण जगत जिला कोषाध्यक्ष, जगदीश सिदार कार्यकारिणी सदस्य, बदरी खैरवार प्रदेश सचिव खैरवार समाज समस्या समाधान के विकल्प सुझाए.
रमेश चंद्र श्याम