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केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने ‘हिंदी दिवस’ पर देशवासियो को शुभकमनाएं दीं

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Posted On: 14 SEP 2020 12:00PM by Delhi Jiwrakhan lal Ushare cggrameen nëws

हिंदी दिवस के अवसर पर मैं इसके सशक्तिकरण में योगदान देने वाले सभी महानुभावों को नमन करता हूं और देशवासियों से आह्वान करता हूं कि अपनी मातृभाषा के साथ साथ हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग कर उनके संरक्षण व संवर्धन में अपना योगदान देने का संकल्प लें

भारतीय सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों की अविरल धारा, मुख्य रूप से हिंदी भाषा से ही जीवन्‍त तथा सुरक्षित रह पाई है

माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्‍व में आज भारत एक संसाधन-संपन्न शक्तिशाली देश के रूप में उभर रहा है और इसमें देश की समृद्ध भाषा हिंदी का बहुत बड़ा योगदान है

वैश्विक मंचों पर प्रधानमंत्री जी द्वारा हिंदी में दिए गए भाषणों से, हिंदी का वैश्वि‍क कद मजबूत हुआ है और हिंदी प्रेमियों को प्रेरणा भी मिल रही है

हिंदी की सबसे बड़ी शक्ति इसकी वैज्ञानिकता, मौलिकता, सरलता, सुबोधता और स्‍वीकार्यता है, हिंदी भाषा की विशेषता है कि इसमें जो बोला जाता है, वही लिखा जाता है

मोदी सरकार की नई शिक्षा नीति से अन्य भारतीय भाषाओं व हिंदी का समानांतर विकास होगा

प्रधानमंत्री जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के अभियान को आगे बढ़ाते हुए, राजभाषा विभाग द्वारा हिंदी के लिए ई-टूल्स सुदृढ़ करने का काम किया जा रहा है

हिंदी भाषा और बाकी सारी भारतीय भाषाओं ने मिलकर भारत की सांस्कृतिक विविधता को आगे ले जाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है

हिंदी की प्रति‍स्‍पर्धा कभी भी स्‍थानीय भाषा से नहीं रही, यह पूरे भारत के जनमानस में ज्‍यादा स्‍पष्‍ट होने की जरूरत है

हम प्रतिज्ञा लें कि हिंदी की उन्नति व प्रगति की यात्रा पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ाते हुए, हम सब मिलकर राजभाषा हिंदी को सभी स्‍थानीय भाषाओं के साथ में रखते हुए, हिंदी के माध्‍यम से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करेंगे

संवैधानिक दायित्‍वों का निर्वहन करने के लिए आवश्‍यक है कि सरकारी कामकाज अनुवाद की अपेक्षा मूल रूप से हिंदी में किया जाए और अन्‍य स्‍थानीय भाषाओं में इसका अनुवाद किया जाए

केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने हिंदी दिवस पर देशवासियो को शुभकमनाएं दी हैं। अपने संदेश में श्री अमित शाह ने कहा कि हिंदीदिवस के अवसर पर मैं इसके सशक्तिकरण में योगदान देने वालेसभी महानुभावों को नमन करता हूं और देशवासियों से आह्वानकरता हूं कि अपनी मातृभाषा के साथ साथ हिंदी का अधिक सेअधिक प्रयोग कर उनके संरक्षण व संवर्धन में अपना योगदान देनेका संकल्प लें। श्री अमित शाह ने कहा कि अनेक भाषाएं एवं संस्कृतियां हमारी न केवल विरासत हैं हमारी ताकत भी हैं, इसलिए हमें इसको आगे बढ़ाना है। सांस्‍कृतिक व भाषाई विविधता से भरे, इस गौरवशाली देश में – पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण के बीच, सदियों से, कई भाषाओं ने संपर्क बनाए रखने का काम किया है। हिंदी इसमें प्रमुख भाषा रही है और ये योगदान जो हिंदी का है इसको देश के कई नेताओं ने समय-समय पर सराहा है और हिंदी ने भारत को एकता के सूत्र में पिरोने का काम किया है।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि हिंदी भाषा और बाकी सारी भारतीय भाषाओं ने मिलकर भारत की सांस्कृतिक विविधता को आगे ले जाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है । हिंदी के साथ बृज, बुंदेलखंडी, अवधी, भोजपुरी, अन्य भाषाएं और बोलियां इसका उदाहरण हैं। हिंदी हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम के समय से राष्ट्रीय एकता और अस्मिता का प्रभावी व शक्तिशाली माध्यम रही है। हिंदी की सबसे बड़ी शक्ति इसकी वैज्ञानिकता, मौलिकता, सरलता, सुबोधता और स्‍वीकार्यता भी है। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि हिंदी भाषा की विशेषता है कि इसमें जो बोला जाता है, वही लिखा जाता है। हिंदी की इन विशेषताओं एवं सर्वग्राह्यता को ध्‍यान में रखते हुए भारतीय संविधान सभा ने 14 सितंबर, 1949 को हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में अंगीकार किया।

श्री अमित शाह ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 का उल्‍लेखकरते हुए कहा कि 26 जनवरी 1950 को लागू इस संविधान में यहप्रावधान रखा गया कि संघ की राजभाषा ‘हिंदी’ व लिपि  ‘देवनागरी’ होगी। श्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय सभ्यता,संस्कृति और संस्कारों की अविरल धारा, मुख्य रूप से हिंदी भाषा सेही जीवन्‍त तथा सुरक्षित रह पाई है। हिंदी भाषा ने बाकी स्‍थानीयभाषाओं को भी बल देने का प्रयास किया है। हिंदी हर राज्‍य कीभाषा को ताकत देती है। हिंदी की प्रति‍स्‍पर्धा कभी भी स्‍थानीयभाषा से नहीं रही, यह पूरे भारत के जनमानस में ज्‍यादा स्‍पष्‍ट होनेकी जरूरत है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 351 केअनुसार भारत की अन्य भाषाओं का प्रयुक्त रूप, शैली और पदों कोआत्मसात करते हुए, जहां आवश्यक है या वांछनीय हो, वहां उसकेशब्द-भंडार के लिए मुख्यतः संस्कृत से, और गौणतः अन्य भाषाओंसे शब्द ग्रहण करते हुए, हिंदी की समृद्धि सुनिश्चित की जानी है।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि संवैधानिक दायित्‍वों का निर्वहन करने केलिए आवश्‍यक है कि सरकारी कामकाज अनुवाद की अपेक्षा मूलरूप से हिंदी में किया जाए और अन्‍य स्‍थानीय भाषाओं में इसकाअनुवाद किया जाए । भारत सरकार के सभी मंत्रालयों/ विभागों/कार्यालयों/ उपक्रमों तथा बैंकों इत्‍यादि के कार्यालय प्रमुखों एवंवरिष्‍ठ अधिकारियों से मेरा विनम्र आग्रह है कि स्‍थानीय भाषाओंके साथ-साथ वे सरकारी कामकाज में, मूल रूप से हिंदी का प्रयोगकरें ताकि कार्यालय के अन्‍य अधिकारियों व कर्मचारियों को भीअपना कार्य हिंदी में करने की प्रेरणा मिले। 

श्री अमित शाह ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्‍व मेंआज भारत एक संसाधन-संपन्न शक्तिशाली देश के रूप में उभर रहाहै और इसमें देश की समृद्ध भाषा हिंदी का बहुत बड़ा योगदान है।वैश्विक मंचों पर प्रधानमंत्री जी द्वारा हिंदी में दिए गए भाषणों से,हिंदी का वैश्वि‍क कद मजबूत हुआ है और हिंदी प्रेमियों को प्रेरणा भीमिल रही है। इससे देश की युवा पीढ़ी भाषा के साथ जुड़ने की ओरअग्रसर हुई है। बस, आवश्‍यकता इस बात की है कि आगामी पीढ़ीको अधिक से अधिक सूचनाएं हिंदी में उपलब्ध कराई जाएं औरउनमें ऐसे संस्कार विकसित किए जाएं कि वह मूल रूप से हिंदीभाषा में काम करें।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में कोई भी भाषा सूचनाप्रौद्योगिकी के बिना पल्लवित और पोषित नहीं हो सकती। राजभाषाविभाग सूचना प्रौद्योगिकी के माध्‍यम से राजभाषा हिंदी का औरअधिक प्रचार करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में निरंतरकार्य कर रहा है। प्रधानमंत्री जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के अभियानको आगे बढ़ाते हुए, राजभाषा विभाग द्वारा हिंदी के लिए ई-टूल्ससुदृढ़ करने का काम किया जा रहा है। ‘वोकल फॉर लोकल’ केअंतर्गत किए जा रहे कार्यों में विभाग द्वारा निर्मित स्‍मृति आधारितअनुवाद टूल ‘कंठस्थ’ का विस्‍तार किया जा रहा है जिससे अनुवादके क्षेत्र में समय की बचत करने के साथ-साथ एकरूपता औरउत्‍कृष्‍टता भी सुनिश्चित की जा सके। इसके अतिरिक्‍त लीला हिंदीप्रवाह, ई-महाशब्दकोश मोबाइल एप्‍लीकेशन भी हिंदी प्रेमियों केलिए अत्‍यंत उपयोगी हैं। राजभाषा विभाग द्वारा ई-सरल हिंदीवाक्यकोश का विकास किया जा रहा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि राजभाषा हिंदी का प्रयोग बढ़ाने औरकार्यालय स्तर पर हिंदी में लेखन को प्रोत्साहित एवं प्रेरित करने में,हिंदी गृह-पत्रिकाओं का विशेष महत्व है। राजभाषा विभाग द्वाराबनाए गए ई-पत्रिका पुस्तकालय के माध्यम से हिंदी के पाठकविभिन्न सरकारी संस्थानों द्वारा प्रकाशित होने वाली ई-पत्रिकाओं सेलाभान्‍वित हो पाएंगे। आज हिंदी दिवस के मौके पर मेरा यह कहनाहै कि सभी मंत्रालय सरकारी कामकाज में इन ई-टूल्स का अधिक सेअधिक प्रयोग सुनिश्चित करें।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि विगत कई माह से पूरी दुनिया अत्‍यंतविषम परिस्थिति से गुज़र रही है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्‍व में भारतकोरोना महामारी से लड़ने में सफल रहा और इस लड़ाई में सभीराज्‍य सरकारों के साथ प्रत्‍यक्ष नागरिकों ने भी सहयोग किया है।समय-समय पर प्रधानमंत्री जी ने राष्‍ट्र को संबोधित कर देश कीजनता को कोरोना महामारी से लड़ने के लिए संबल प्रदान किया।कोरोना महामारी से उत्पन्न अप्रत्याशित संकट की स्थिति के कारण,जनहित को प्राथमिकता देते हुए इस वर्ष ‘हिंदी दिन समारोह’ काआयोजन नहीं किया जा रहा है लेकिन जिन मंत्रालयों, विभागों,संस्थाओं, बैंकों, सरकारी उपक्रमों, नगर राजभाषा कार्यान्वयनसमितियों ने पूरे वर्ष पूरी निष्ठा से हिंदी में श्रेष्‍ठ कार्य किया है औरप्रतिष्ठित राजभाषा कीर्ति पुरस्‍कार जीते हैं, उन्हें मैं अपनी ओर सेबहुत-बहुत बधाई देता हूं। इसके साथ-साथ हिंदी में मौलिक पुस्तकलेखन और पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित उत्‍कृष्‍ट लेखों के लिए प्रदानकिए जाने वाले राजभाषा गौरव पुरस्कार विजेता भी बधाई के पात्रहैं। मैं आशा करता हूं कि आप सभी पुरस्कार विजेता यहीं से थकेंगेनहीं, भविष्य में, हिंदी के लिए कार्य करने के लिए, उच्च औरअनुकरणीय मानदंड प्रस्थापित करते रहेंगे । ये प्रधानमंत्री जी कीप्रेरणा थी कि देश इस आपदा को अवसर में परिवर्तित करे ।राजभाषा विभाग ने भी इस अवसर का सकारात्‍मक उपयोग करतेहुए सूचना तकनीक का सहारा लिया और पहली बार वीडियोकॉन्फ्रेंसिंग जैसे ऑनलाइन माध्यमों के जरिए, बड़ी संख्‍या में, ई-निरीक्षण एवं नगर राजभाषा कार्यान्‍वयन समिति की बैठकों काआयोजन किया। राजभाषा विभाग के प्रशिक्षण केंद्र, केंद्रीय हिंदीप्रशिक्षण संस्थान तथा केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो द्वारा पहली बारऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन शुरू कियागया जिसमें परंपरागत क्‍लासरूम टीचिंग को परिवर्तित कर,ऑनलाइन वेब कांफ्रेंसिंग टूल के माध्‍यम से प्रशिक्षण दिया जा रहाहै।

श्री अमित शाह ने कहा कि संघ की राजभाषा नीति के अनुसारहमारा संवैधानिक दायित्व है कि हम राजभाषा संबंधि‍त अनुदेशों काअनुपालन करें, तत्‍परता के साथ अनुपालन करें । हम स्‍वयं मूलकार्य हिंदी में करते हुए अधिकारियों/कर्मचारियों से राजभाषाअधिनियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराएं ताकि आमजन सभीसरकारी योजनाओं व कार्यक्रमों का लाभ, निर्बाध रूप से उठा पाए ।

केंद्रीय गृहमंत्री ने देशवासियों का आहवाहन करते हुए कहा किआइए! हिंदी दिवस के इस अवसर पर हम प्रतिज्ञा लें कि हिंदी कीउन्नति व प्रगति की यात्रा पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ाते हुए, हमसब मिलकर राजभाषा हिंदी को सभी स्‍थानीय भाषाओं के साथ मेंरखते हुए, हिंदी के माध्‍यम से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करेंगे।इस मौके पर, उन्‍होंने देश के युवाओं से कहा कि कि जब स्‍थानीयभाषा में बोलने वाला साथी हो तब और कोई भाषा का प्रयोग नकरते हुए भारतीय भाषाओं के प्रयोग का आग्रह रखिए । श्री अमितशाह ने अभिभावकों को भी कहा कि अपने बच्‍चों के साथ भारतीयभाषाओं में बात करने की बात का संस्‍कार डालें और अपनीभाषाओं की यात्रा को आगे बढ़ाएं ।

श्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार की नई शिक्षा नीति से अन्यभारतीय भाषाओं व हिंदी का समानांतर विकास होगा, ऐसा मुझे पूराविश्‍वास है कि हमारे सामूहिक प्रयासों से हिंदी न केवल राष्‍ट्रीयस्‍तर पर अपितु, विश्‍वपटल पर ज्ञान-विज्ञान से परिपूर्ण समृद्ध भाषाके रूप में स्‍थापित होगी।