छत्तीसगढ़

भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 165( 6 )में संशोधन किया गया है उसे आदिवासी समाज को बहुत नुकसान हो रहा है -जिवराखन मरई

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जिवराखन लाल उसारे छत्तीसगढ़ ग्रामीण न्यूज भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 165( 6 )में संशोधन किया गया है उसे आदिवासी समाज को बहुत नुकसान हो रहा है जिसके कारण आदिवासी समाज भूमिहीन होते जा रहा है इस आदेश को निरस्त करने हेतु माननीय मुख्यमंत्री जी से विस्तार से चर्चा किया माननीय मुख्यमंत्री जी ने कार्यवाही करने का आश्वासन दिया

छ.ग. भू-राजत्य संहिता, 1959 की धारा 165(6) के तहत अंतरण पर प्रतिबंध में पटटा शामिल नहीं होने बाबत। छ.ग.शासन, उर्जा विभाग का पत्र क्रमांक 2480/आर-40/स्पष्टीकरण/2016/13/2

छ.ग.शासन, उर्जा विभाग के द्वारा अपने संदर्भित पत्र दिनांक 5/.8./2016 के माध्यम से राजस्य विभाग से इस बिन्दु पर अभिमत चाहा गया है, कि छ.ग. भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 165(5) के प्रावधान “भूमि की लीज” के संबंध में लागू होता है या नहीं ?

उक्त संबंध में यह स्पष्ट किया जाता है, कि छ.ग. भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 165 भूमिस्थानी द्वारा अपने स्वानित्व की भूमि को किसी अन्य व्यक्ति को अंतरण करने अधिकार से संबंधित है। धारा 165 की उपधारा (1) में यह प्रावधान किया गया है, कि “कोई भी भूमिस्वामी अपने भूमिस्वामी हक की भूमि को किसी भी दूसरे व्यक्ति को कभी भी अंतरित कर सकता है। उपधारा (1) के बाद सभी प्रावधान विभिन्न श्रेणी के प्रतिबंधों से संबंधित है। उपधारा 6 (1) में यह प्रावधान किया गया है, कि अधिसूचित क्षेत्र में किसी अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्ति द्वारा अपनी भूमि किसी गैर अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्ति को विक्रय अथवा अन्यथा हस्तांतरित, नहीं किया जायेगा। उपधारा 6 (दो) में यह प्रावधान हैं. कि गैर अधिसूचित क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्ति के द्वारा कलेक्टर के पूर्व अनुमति से ही अपनी भूमि किसी गैर अनुसूचित जनजाति को विक्रय अथवा अन्यथा हस्तांतरित किया जा सकेगा । धारा 6(2) के नीचे स्पष्टीकरण के रूप में यह स्पष्ट किया गया है, कि इस उपधारा के प्रयोजन के लिये अभिव्यक्ति “अन्यथा” के अंतर्गत पट्टा नहीं आता है

संहिता के उपरोक्त प्रावधानों’ से स्पष्ट है, कि धात्त 165(6) के तहत लगाये गये हस्तांतरित
पर प्रतिबंध में पट्टा शामिल नहीं है तथा अधिसूचित एवं गैर अधिसूचित दोनों क्षेत्रों में

अनुसूचित जनजाति वर्ग का कोई व्यक्ति अपनी भूमि को किसी गैर अनुसूचित जनजाति वर्ग

के व्यक्ति को पट्टे पर दे सकता है। इसके लिये संहिता के प्रावधानों के तहत किसी
पूर्वानुमति की आवश्यकता नहीं है